Twisha Sharma Death News: संदेहास्पद परिस्थितियों में अपनी बेटी ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma ) को खोने वाले पिता नवनिधि शर्मा का दर्द और आक्रोश अब व्यवस्था के खिलाफ खुलकर सामने आ गया है. उन्होंने साफ तौर पर भोपाल प्रशासन की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब घटना से जुड़े सबूत और सामने आ रही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आपस में रत्ती भर भी मेल नहीं खा रहे हैं, तो वे अपनी बेटी के शव को स्वीकार कैसे कर लें?
मृतका के पिता ने कहा कि जब पूरा मामला ही पूरी तरह से संदिग्ध है, तो हम शव को अपने हाथ में क्यों लें? जो मेडिकल रिपोर्ट दिखाई जा रही है और जो जमीनी सबूत हमारे सामने हैं, उनमें जमीन-आसमान का अंतर है. कई ऐसे ठोस सबूत हैं, जो जांच को गुमराह करने की गवाही दे रहे हैं, इसलिए हमने दोबारा पोस्टमार्टम (PM2) कराने की मांग की है.
"कानूनी प्रक्रिया के चक्रव्यूह में उलझाने की कोशिश"
ट्विशा के पिता ने दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर एक बड़ी साजिश की आशंका जताई है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में पुलिस कमिश्नर ने दोबारा पोस्टमार्टम के आवेदन को मंजूरी दे दी थी. लेकिन, बाद में न्यायपालिका (ज्यूडिशियरी) की तरफ से यह कह दिया गया कि यह मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका के इस रवैए का सीधा मतलब यह है कि हमें जानबूझकर उनके सिस्टम के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जा रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि वे अधिकतम समय ले सकें और इस देरी के कारण शव अपने आप खराब हो जाए. मुझे सबसे बड़ा डर इसी बात का है कि वे सबूत मिटाने के लिए समय का खेल खेल रहे हैं.
केस लड़ने को तैयार नहीं वकील
पीड़ित परिवार ने भोपाल के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में आरोपियों के गहरे रसूख को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. ट्विशा के पिता ने सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र में बैठे उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि आरोपियों का बैकग्राउंड इतना हाई-प्रोफाइल है कि इस मामले में उनके पक्ष से खड़े होने के लिए कोई वकील तक तैयार नहीं हो रहा है. उन्होंने सीधे तौर पर लोकायुक्त सत्येंद्र सिंह का नाम लेते हुए कहा कि उनका परिवार इस पूरे मामले से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है और उनके करीबी लोग प्रशासनिक पदों पर बैठे हैं.
प्रशासन से लेकर मीडिया तक हर तरफ घेराबंदी
नवनिधि शर्मा ने मीडिया और सरकार से अपील करते हुए कहा कि इस मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पारिवारिक संबंधों की जांच होनी चाहिए. उन्होंने लाचारी व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपियों के रिश्तेदार और मददगार प्रशासन, मीडिया, मेडिकल डिपार्टमेंट और हर महत्वपूर्ण जगह पर बैठे हैं. यही वजह है कि हम चाहकर भी इस मामले में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. हमें हर कदम पर दबाया और मैनिपुलेट (प्रभावित) किया जा रहा है. भोपाल की इस व्यवस्था से अब हमने पूरी तरह से न्याय की उम्मीद खो दी है. हमें कहीं से भी कोई स्थानीय समर्थन या मदद नहीं मिल रही है.
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हर तरफ से निराश होने के बावजूद ट्विशा शर्मा का परिवार अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है. पिता ने बताया कि वे इस मामले में चुप्पी साधने वाले नहीं हैं. घटना के पहले दिन से ही सरकार, मानवाधिकार संगठनों और उच्च अधिकारियों को लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं. सच को सामने लाने के लिए परिवार की ओर से हर दिन प्रेस रिलीज जारी की जा रही है, ताकि सत्ता के गलियारों में बैठी सरकार को इस मामले की पूरी सच्चाई का पता चल सके और उनकी बेटी के गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा मिल सके.
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