Naxal Commader Papa Rao Surrender: छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त करने के अभियान में अंतिम बड़ी चुनौती पार कर ली गई है. NDTV की टीम की मदद से छत्तीसगढ़ में सक्रिय अंतिम सबसे बड़े नक्सली लीडर पापा राव ने अपने 17 अन्य साथियों के साथ सरेंडर (पुनर्वास) कर लिया है. 25 लाख के इनामी सुन्नम चन्द्रेया उर्फ़ पापा राव नक्सलियों कि बस्तर में सबसे प्रभावी विंग DKSZC (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) का सदस्य और नेशनल पार्क एरिया कमेटी का लीडर था.
पापा राव के सरेंडर के बाद उससे जुड़ी कई कहानियां अब चर्चा में हैं. इसमें सबसे ज्यादा पापा राव के जिंदा रहते मारे जाने की खबरों की चर्चा हो रही है. सुरक्षा बल के जवानों को चकमा देने के लिए पापा राव ने कई बार खुद के मौत की अफवाह उड़ाई और अपने मंसूबों को अंजाम देता रहा.
20 वर्षों में कई भार फैलाई अफवाह
नक्सल संगठन में सक्रिय रहते हुए पापा राव ने पिछले 20 सालों में कई बार ऐसी अफवाह फैलाई, जिसमें उसने खुद की मौत होना चर्चित करवाया. लेकिन इसमें से तीन बार ऐसा हुआ, जब लोगों ने लगभग यकीन कर लिया कि पापा राव मर गया है या उसकी मौत हो चुकी है.
कभी सांप काटने तो कभी किडनी खराब से मौत की खबर
साल 2015-2016 में बस्तर में नक्सल संगठन में बस्तर में नक्सली संगठन पर जब सुरक्षा बल के जवानों का दबाव बढ़ता दिखा, तब जुलाई 2016 में सुकमा से खबर नक्सल कमांडर पापा राव की सांप काटने से मौत हो गई है. हालांकि सुरक्षा एजेंसियों ने जब इंटेलिजेंस की मदद ली, तब पता चला कि यह खबर सिर्फ अफवाह है. इसके बाद मैं 2020 में किडनी की बीमारी से पापा राव की मौत की खबर आई.
मुठभेड़ में मारे जाने की खबर आई
कोरोना काल के इस समय में कई नक्सलियों की मौत होने की सूचनाएं लगातार मिल रही थी. ऐसे में इस बात पर भी लोगों को यकीन हो गया कि पापा राव किडनी फेल होने से मर गया है, लेकिन बात के कुछ मुठभेड़ में पापा राव की भूमिका सामने आई. इसके बाद इसी साल जनवरी महीने में बीजापुर में एक मुठभेड़ के दौरान पापा राव के मारे जाने की खबर आई.
नेशनल पार्क एरिया में हुई इस मुठभेड़ में पापा राव की टीम के चार सदस्य मारे गए थे, लेकिन पापा राव बच गया था. हालांकि, साल 2005 से 2025 के बीच में अलग-अलग समय पर मलेरिया, सुरक्षा बलों से मुठभेड़ तो कभी अन्य बीमारी की वजह से पापा राव की मौत की अफवाह उड़ती रही.
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नए कैडर का ट्रेनर था 'पापा'
छत्तीसगढ़ के सबसे खौफनाक हमले में शामिल ताड़मेटला कांड जिसमें 76 जवानों की शहादत हुई थी, उसमें पापा राव की भूमिका अहम बताई जाती है. इसके अलावा कई बड़ी नक्सली वारदातों में भी पापा राव मास्टरमाइंड के तौर पर जाना जाता है. हम लोग की साजिश रचने के अलावा संगठन में शामिल नए युवाओं को लड़ाई की ट्रेनिंग देना, आईईडी प्लांट करना, सुरक्षा बलों की टुकड़ियों को एंबुश में फसाने की साजिश रचना, नई वहां को जंगल में डटे रहने की ट्रेनिंग देने जैसी अहम जिम्मेदारियां पापा राव संगठन में निभाता रहा है.
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