Naxal Free Village: केंद्र सरकार की ओर से नक्सलियों के खात्मे की तारीख मार्च, 2026 तय की गई है. लेकिन, छत्तीसगढ़ में इसका असर पिछले कुछ महीनों से दिखाई दे रहा है. इसकी ताजा तस्वीर प्रदेश के सुकमा जिले से सामने आई है, जो घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसे गोगुंडा गांव की हैं. ये पहाड़ी गांव आजादी के बाद से नक्सल हिंसा के कारण मुख्यधारा से कटा रहा. यहां न सड़क थी, न स्वास्थ्य सुविधाएं और न ही सरकार की योजनाओं की पहुंच. अगर, कुछ था तो गरीबी, नक्सली और हिंसा. लेकन, अब यहां के हालात धीरे-धीरे बदल रहे हैं.

दरअसल, गोगुंडा में सुरक्षा कैंप की स्थापना के बाद पहली बार गांव तक प्रशासन की सीधी पहुंच शुरू हुई है. हाल ही में पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम गांव पहुंची और ग्राउंड जीरो पर उतरकर हालात का जायजा लिया. आजादी के बाद से यह पहला मौका है, जब कोई कलेक्टर और प्रशासन की टीम यहां पहुंची हो. कलेक्टर अमित कुमार और एसपी के साथ पूरी प्रशासनिक टीम गांव में कोतहूल मच गया. अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत की और लंबे समय से चली आ रही उनकी समस्याओं को सुना.

अफसरों ने दी योजनाओं की जानकारी
नक्सली हिंसा के डर से अब तक शासन की योजनाओं से वंचित रहे ग्रामीणों को अधिकारियों ने राशन, स्वास्थ्य, पीने के पानी, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की जानकारी दी गई. केंद्र सरकार की पीएम आवास योजना समेत अन्य जनहितकारी योजनाओं के बारे में भी उन्हें बताया गया. अफसरों ने ग्रामीणों से इन योजनाओं का लाभ लेने की अपील की.

दिखाई दे रही विकास की हलचल
ऐसे में यही कहा जा सकता है कि जिस गांव में कभी डर, हिंसा और सन्नाटा था, वहां अब विकास की हलचल दिखाई दे रही है. यह विकास इस गांव और यहां रहने वाले लोगों के लिए ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ के लिए भी जरूरी है. क्योंकि गांवों के विकास के बिना प्रदेश आगे नहीं बढ़ सकता.
कलेक्टर बोले- नए सिरे से संवारा जाए गोगुंडा
कलेक्टर अमित कुमार ने NDTV से बात करते हुए कहा कि हमारा प्रयास है कि गोगुंडा को नए सिरे से संवारा जाए. स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी जरूरी सुविधाएं हर हाल में गांव तक पहुंचे, इसके लिए प्रशासन पूरी गंभीरता से काम करेगा.
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