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पिता मल्टी स्किल कर्मचारी, नाबालिग बेटा OPD पर्ची प्रभारी; क्या मझगवां CHC में नाबालिगों की हो गई नियुक्ति?

सतना के मझगवां CHC में नाबालिग से ओपीडी पर्ची बनवाने का मामला सामने आया. पिता कर्मचारी, प्रशासन पर लापरवाही और बाल श्रम के आरोप, जांच की मांग.

पिता मल्टी स्किल कर्मचारी, नाबालिग बेटा OPD पर्ची प्रभारी; क्या मझगवां CHC में नाबालिगों की हो गई नियुक्ति?
मझगवां CHC में बड़ा खुलासा: नाबालिग बना ओपीडी पर्ची प्रभारी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

Satna CHC Controversy: सतना जिले के मझगवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अस्पताल की ओपीडी पर्ची बनाने का काम एक नाबालिग से कराए जाने के आरोप लगे हैं. घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और मरीजों में आक्रोश देखने को मिल रहा है. बताया जा रहा है कि जिस बच्चे को पर्ची काटने के लिए बैठाया गया, उसका पिता अस्पताल में मल्टी स्किल कर्मचारी है. इस प्रकरण ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि बाल श्रम कानूनों के उल्लंघन की आशंका भी पैदा कर दी है.

ओपीडी काउंटर पर नाबालिग, लोगों ने जताई आपत्ति

मंगलवार को अस्पताल में पंजीयन और ओपीडी पर्ची का काम करने वाला कर्मचारी मौजूद नहीं था. इसी दौरान एक कर्मचारी द्वारा अपने बेटे को पर्ची काटने के लिए बैठा दिया गया. जब यह तस्वीर सामने आई, तो अस्पताल में मौजूद लोगों ने इसका विरोध किया और सवाल उठाए कि क्या स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारियों की इतनी कमी है कि बच्चों से काम कराया जा रहा है.

पिता कर्मचारी, बेटा बना पर्ची प्रभारी

जानकारी के अनुसार जिस नाबालिग को ओपीडी काउंटर पर बैठाया गया, उसका पिता अस्पताल में मल्टी स्किल कर्मचारी के पद पर कार्यरत है, हालांकि वह बीएमओ का ड्राइवर के तौर पर काम कर रहा है. यह भी आरोप है कि बीएमओ की सहमति से ही बच्चे को यह जिम्मेदारी दी गई.

बाल श्रम कानून के उल्लंघन का आरोप

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पूरा मामला बाल श्रम कानूनों का उल्लंघन हो सकता है. स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी नाबालिग को नियुक्त करना न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और गोपनीयता पर भी खतरा पैदा कर सकता है.

अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठे सवाल

मरीजों और उनके परिजनों ने बताया कि मझगवां स्वास्थ्य केंद्र पहले से ही स्टाफ की कमी और अव्यवस्थाओं के कारण चर्चा में रहा है. अब नाबालिग से काम कराए जाने की घटना से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

जवाबदेही पर जनता की मांग

स्थानीय नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि यदि समय पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की है, बच्चों से काम लेना समाधान नहीं है.

बीएमओ का पक्ष

मामले में जब बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उस समय अस्पताल में मरीजों की भीड़ थी और कुछ गंभीर मरीजों का पंजीयन जरूरी था. उन्होंने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी निजी कारणों से बाहर गया था और नियमित कर्मचारी चित्रकूट मेले में ड्यूटी पर है, इसलिए अस्थायी तौर पर बच्चे ने पर्ची बनाई.

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