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सागर पुलिस को मिली बड़ी सफलता: 0001 गैंग का सरगना मनु सोनी गिरफ्तार, बार-बार बदल रहा था ठिकाना

0001 गैंग का सरगना मनु सोनी फरारी के दौरान सोशल मीडिया पर लाइव आकर हत्या की धमकी दी थी. वहीं पुलिस से बचने के लिए बार बार अपना ठिकाना बदल रहा था. इतना ही नहीं वो लंगर और भंडारे में खाना खाता था, ताकि पुलिस वहां तक पहुंच न सके.

सागर पुलिस को मिली बड़ी सफलता: 0001 गैंग का सरगना मनु सोनी गिरफ्तार, बार-बार बदल रहा था ठिकाना
आरोपी रेलवे ओवरब्रिज से कूदकर भागने की कोशिश रहा था. इस हादसे में उसका हाथ-पैर फ्रैक्चर हो गया.

मध्य प्रदेश के सागर पुलिस (Sagar Police) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है. लंबे समय से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी और 0001 गैंग का सरगना मनु सोनी आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया. मनु सोनी बीते माह हुए हाई-प्रोफाइल मयंक साहू हत्याकांड का प्रमुख आरोपी बताया जा रहा है. इसके अलावा वह कई अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में भी फरार चल रहा था. पुलिस के अनुसार, मयंक साहू हत्याकांड को अंजाम देने के बाद मनु अपने साथियों के साथ फरार हो गया था. घटना के बाद से ही पुलिस की कई टीमें लगातार उसकी तलाश में जुटी हुई थीं. हालांकि सभी आरोपी इतने शातिर थे कि उन्होंने पुलिस को चकमा देने के लिए मोबाइल फोन का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया था. साथ ही वे किसी होटल या लॉज में भी नहीं ठहर रहे थे, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था.

लंगर और भंडारे में खाता था खाना

जानकारी के अनुसार, हत्या के बाद आरोपी सागर से भोपाल पहुंचा. इसके बाद वे भोपाल से आंध्र प्रदेश के तिरुपति और वहां से हैदराबाद, फिर अमृतसर, दिल्ली और अंत में गुजरात के सूरत तक पहुंचा. लगातार शहर बदलने और तकनीक से दूरी बनाए रखने के कारण पुलिस को उसकी लोकेशन ट्रैक करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. बताया जा रहा है कि आरोपी न तो किसी होटल में खाना खाता था और न ही सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा रुकता था. अपनी पहचान छिपाने के लिए वे भंडारों और गुरुद्वारों के लंगर में भोजन करता था. इसी वजह से पुलिस को लंबे समय तक उनकी सटीक जानकारी नहीं मिल सकी.

पैसे खत्म होने पर करता था लूट

पुलिस जांच में सामने आया कि जब मनु और उसके साथियों के पास पैसे खत्म होने लगे तो उन्हें अपने छिपने के ठिकानों से बाहर निकलना पड़ा. खर्च निकालने के लिए गैंग ने अशोकनगर, पीथमपुर और आष्टा में ताबड़तोड़ लूट की वारदातों को अंजाम दिया. इन वारदातों से पुलिस को अहम सुराग मिले और आरोपियों के मूवमेंट का पता चलने लगा. इसके बाद पुलिस की स्पेशल टीमें उनके पीछे साए की तरह लग गईं.

पुलिस से बचने के लिए मनु ने गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र तक की खाक छानी. पूछताछ में मनु ने पुलिस को बताया कि फरारी के अंतिम दिनों में वह और उसके साथी पूरी तरह कंगाल हो चुके थे. हालात इतने खराब हो गए थे कि पेट भरने के लिए उन्हें ऐसे शहरों में रुकना पड़ता था, जहां गुरुद्वारों में मुफ्त लंगर या मंदिरों में भंडारे चलते हों.

भागने के लिए रेलवे ओवरब्रिज से कूदा

इसी बीच पुलिस को एक महत्वपूर्ण सूचना मिली कि तीनों आरोपी भोपाल की ओर से आने वाली ट्रेन से सागर पहुंचे हैं और शहर में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं. सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और संभावित स्थानों पर घेराबंदी शुरू कर दी. पुलिस को ग्राम बम्होरी रेंगुआ रेलवे ओवरब्रिज के पास तीन संदिग्ध दिखाई दिए. जैसे ही पुलिस ने उन्हें घेरने की कोशिश की, मनु सोनी ने भागने के प्रयास में रेलवे ओवरब्रिज से छलांग लगा दी. वहीं उसके दो अन्य साथी मौके का फायदा उठाकर फरार होने में सफल रहे.

गंभीर रूप से घायल 

ओवरब्रिज से कूदने के कारण मनु सोनी गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके एक हाथ और एक पैर में फ्रैक्चर बताया जा रहा है. इसके बाद पुलिस ने उसे मौके पर ही दबोच लिया. गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से 2 लाख रुपये की एमडी ड्रग्स और एक धारदार चाकू बरामद किया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की तैयारी में था.

थाना प्रभारी जसवंत सिंह राजपूत ने बताया कि आरोपी को पकड़ने के दौरान पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ जैसी स्थिति भी बनी. इस दौरान मनु सोनी ने पुलिस टीम पर चाकू से हमला करने की कोशिश की, लेकिन पुलिसकर्मियों ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए उसे काबू कर लिया.

हत्या की दी थी धमकी 

मनु सोनी करीब एक महीने से फरार चल रहा था. उसका दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि फरारी के दौरान भी उसने सोशल मीडिया पर लाइव आकर एक और मर्डर करने की खुली धमकी दे डाली थी. इसके बाद सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने मनु सोनी एंड कंपनी के सिंडिकेट को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने की रणनीति बनाई और ऑपरेशन की कमान सीएसपी ललित कश्यप को सौंपी गई. सीएसपी ललित कश्यप ने सबसे पहले मनु के सपोर्ट सिस्टम पर चोट की. पुलिस ने मनु के करीब 36 मददगारों और सपोर्टर्स को चिन्हित कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. ये वे लोग थे जो सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर मनु के खौफ और दबदबे को बनाए रखने का काम कर रहे थे और उसे आर्थिक मदद भी पहुंचा रहे थे. जैसे ही ये गुर्गे जेल पहुंचे, मनु और उसके साथियों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई.

दो अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, महज 23 वर्षीय मनु सोनी कम उम्र में ही अपराध जगत का बड़ा नाम बन चुका है. उसके खिलाफ लूट, हत्या, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में करीब 25 आपराधिक मामले दर्ज हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह कुख्यात 0001 गैंग का सरगना है और जिले में उसका नाम लंबे समय से दहशत का पर्याय बना हुआ था. फिलहाल पुलिस फरार दो अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है. वहीं घायल मनु सोनी का प्राथमिक उपचार कराने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस का मानना है कि मनु की गिरफ्तारी से जिले के कई अन्य गंभीर मामलों के खुलासे भी हो सकते हैं.

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हनी दुबे
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