God of Cricket Birthday: भारत रत्न व देशभर में आज क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर अपना 53वां जन्मदिन मना रहे हैं. सचिन ने इस बार अपना बर्थडे छत्तीसगढ़ में इंद्रावती नदी के तट पर बसे छोटे से सुदूर आदिवासी गांव में भी सेलिब्रेट किया है. नक्सल से प्रभावित रहे बस्तर क्षेत्र में सचिन तेंदुलकर के आने की खबर सुनकर वहां के लोगों का खुशी का ठिकाना न रहा था. वह यहां 22 अप्रैल को दो दिन के लिए दंतेवाड़ा पहुंचे थे, जहां उन्होंने अपने जन्मदिन का केक भी काटा और बच्चों के साथ वॉलीबॉल भी खेला.
दरअसल, सचिन तेंदुलकर दो दिन पहले ही दंतेवाड़ा जिले के सुदूर आदिवासी गांव छिंदनार पहुंचे थे. इस दौरान उनके साथ बेटी सारा तेंदुलकर और उनकी पुत्रवधु सानिया तेंदुलकर भी थीं. सचिन ने नव-निर्मित खेल मैदान में स्थानीय बच्चों से मुलाकात की. यही नहीं, बच्चों के साथ मिलकर उनका जन्मदिन भी बड़े ही सादगी और आत्मीयता के साथ मनाया. उस दौरान बच्चे अपने आदर्श को अपने बीच देखकर बेहद उत्साहित नजर आए. हर चेहरा खुशी और गर्व से चमक रहा था.

बच्चों के साथ बिताया समय
सचिन तेंदुलकर को अपने बीच पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी. जब उन्होंने अपने आदर्श के साथ केक काटा तो पूरा मैदान “हैप्पी बर्थडे सचिन सर” के नारों से गूंज उठा. इस दौरान सचिन ने बच्चों के साथ समय बिताया. उनके साथ वॉलीबॉल भी खेला. सचिन ने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया.

यही वजह है कि यह दौरा खेल प्रेमियों के साथ-साथ आदिवासी अंचल के लोगों के दिलों में एक अलग ही जगह बना गया है. कह सकते हैं कि जहां एक तरफ देशभर में सचिन का जन्मदिन सेलिब्रेट हो रहा है. वहीं, दंतेवाड़ा के छिंदनार में यह जश्न एक यादगार अनुभव बन गया.

खेल मैदान निर्माण में निभा रहे अहम भूमिका
बच्चों के साथ खेलने के बाद सचिन ने पूरे खेल मैदान का भ्रमण किया और उन लोगों को सम्मानित किया, जिन्होंने इस मैदान के निर्माण में अहम भूमिका निभाई. जानकारी दी गई कि दंतेवाड़ा जिले में अब तक 25 खेल मैदान तैयार हो चुके हैं और 25 नए मैदानों पर काम जारी है. मंच से बोलते हुए सचिन ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि वे सिर्फ 50 नहीं, बल्कि 100 से ज्यादा खेल मैदानों के निर्माण में सहयोग देंगे. उन्होंने कहा, “यहां आकर मुझे बहुत खुशी हुई. जब पता चला कि खिलाड़ियों में प्रतिभा है, लेकिन मैदान नहीं, तो मुझे अपना बचपन याद आ गया. मेरी जिंदगी की शुरुआत भी मैदान से ही हुई थी.”
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