Supreme Court Hearing Today: करीब 23 साल पुराने राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बिलासपुर हाई कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक अमित जोगी ने आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका की थी, जिसकी सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट होगी. बिलासपुर हाईकोर्ट की सजा को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अमित जोगी ने दलील दी है कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाई कोर्ट ने उन्हें बिना सुने ही सीबीआई की दलील पर 40 मिनट में फैसला सुना दिया.
ये भी पढ़ें-Nashik TCS scandal: शाहरुख, रज़ा, आसिफ, तौसीफ, शफी ने गलत तरीके से छूआ, मेरे देवी-देवताओं को कहे अपशब्द, नासिक पीड़िता की जुबानी
NCP नेता मर्डर केस में प्रमुख आरोपियो में एक थे अमित जोगी
गौरतलब है साल 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेता राम अवतार जग्गी की बिलासपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी और राजनीतिक माहौल गरमा गया था. मामले की जांच में कई बड़े राजनीतिक नाम सामने आए. इनमें पूर्व छत्तीसगढ़ सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी का नाम प्रमुख था.
अमित जोगी ने हाई कोर्ट फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी
हाई कोर्ट द्वारा केस की सुनवाई के बाद सुनाए गए आजीवन कारावास के फैसले को चुनौती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और आज होने वाली सुनवाई में यह तय हो सकता है कि उन्हें राहत मिलती है या हाई कोर्ट का फैसला बरकरार रहता है. छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री के बेटे अमित जोगी पूर्व विधायक रह चुके हैं और 23 साल पुराने मामले में आजीवन कारावास की तलवार लटक रही है.

राम अवतार जग्गी मर्डर केस टाइम लाइन-
ये भी पढ़ें-'करेरा तुम्हारे ‘डैडी' का है...' MP में पांच को थार से कुचलने वाले बेटे के विधायक बाप की पुलिस को खुली धमकी
सीबीआई ने अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टर माइंड बताया
राम अवतार जग्गी मर्डर केस की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी. सीबीआई ने पूर्व छ्त्तीसगढ़ सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हत्याकांड में मास्टर माइंड बताते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी. साल 2004 से 2007 तक निचली अदालत में चले केस के बाद साल 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे.
साल 2007 सबूतों के अभाव में बरी कर दिए गए थे अमित जोगी
साल 2007 से 2025 तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2011 में CBI ने अमित जोगी की रिहाई के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन देरी के आधार पर इसे खारिज कर दिया गया. बीते 6 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील में हुई 1,373 दिनों की देरी को माफ करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को मामले की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया.
ये भी पढ़ें-बदमाशों से अकेले भिड़ गई महिला, पकड़ लिया गिरेबां, चाकू घोंप जान बचाकर भागे लुटेरे, अस्पताल में दर्दनाक मौत

2 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया
बीते 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया और हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को अवैध और विकृत बताते हुए अमित जोगी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसकी सुनवाई आज होने वाली है.
ये भी पढ़ें-भोपाल में नारी शक्ति महा संकल्प यात्रा आज, वृहद जन आक्रोश पदयात्रा में शिकरत करेंगी 25,000 महिलाएं
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं