- रायपुर के नकटी स्थित ब्लू वॉटर खदान में 77 घंटे की खोज के बाद 24 वर्षीय आदिल खान का शव मिला था.
- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद लेने का फैसला किया था.
- 2017 से अब तक ब्लू वॉटर खदान में डूबने से कुल दस लोगों की मौत हो चुकी है.
रायपुर के नकटी स्थित ब्लू वॉटर खदान एक बार फिर दर्दनाक हादसे की वजह बन गई है. 24 वर्षीय आदिल खान का शव यहां 77 घंटे की तलाश के बाद पानी की सतह पर तैरता मिला. SDRF और NDRF की टीमें लगातार तीन दिनों तक सर्च ऑपरेशन चलाती रहीं, जबकि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद लेने का भी फैसला किया था. हालांकि नेवी की टीम के पहुंचने से पहले ही आदिल का शव मिल गया. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर खूबसूरत दिखने वाली यह खदान बार-बार लोगों की जान क्यों ले रही है?
77 घंटे बाद मिला आदिल का शव
दरअसल, 19 अगस्त को ब्लू वॉटर खदान में डूबे आदिल खान की तलाश लगातार जारी थी. रेस्क्यू टीमों ने हर संभव प्रयास किया, लेकिन खदान की अत्यधिक गहराई और ठंडे पानी के कारण सफलता नहीं मिल सकी. शनिवार देर रात आदिल का शव पानी की सतह पर तैरता दिखाई दिया, जिसके बाद उसे बाहर निकाला.
नेवी की मदद लेने की तैयारी भी हुई
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भारतीय नौसेना के विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद लेने का निर्णय लिया था. ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापट्टनम से एक अधिकारी और 10 विशेषज्ञ गोताखोरों की टीम रायपुर पहुंचने वाली थी. लेकिन उनके आने से पहले ही शव बरामद हो गया और तलाश अभियान समाप्त हो गया.
2017 से अब तक 10 लोगों की जा चुकी है जान
ब्लू वॉटर खदान में डूबकर मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है. आदिल की मौत के बाद वर्ष 2017 से अब तक यहां डूबने से मरने वालों की संख्या 10 पहुंच गई है.
- 2017 - 17 वर्षीय सुनैना की मौत
- मई 2019 - 17 वर्षीय मोहन बाघ की डूबने से मौत
- मार्च 2023 - दो युवकों की मौत
- जून 2023 - नदीम, फैजल और शहबाज की डूबने से मौत
- 31 अक्टूबर 2025 - स्कूली छात्र जयेश साहू और मृदुल की मौत
- 19 अगस्त 2026 - आदिल खान की मौत
इन लगातार हादसों के बावजूद लोग यहां पहुंचते रहे हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता दोनों पर सवाल उठते हैं.

खदान के पानी में दिखा आदिल खान का शव.
क्या है ब्लू वॉटर खदान?
ब्लू वॉटर रायपुर के माना क्षेत्र में नकटी गांव के पास स्थित एक पुरानी खदान है. समय के साथ खदान में पानी भर गया और यह एक झील जैसी दिखाई देने लगी. अपने चमकदार नीले पानी और लाल चट्टानों के कारण यह जगह सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो गई. दूर से देखने पर यह स्थान बेहद खूबसूरत और शांत नजर आता है, लेकिन इसके भीतर कई ऐसे खतरे छिपे हैं जिनका अंदाजा आम लोगों को नहीं होता.
खूबसूरती के पीछे छिपा है बड़ा खतरा
ब्लू वॉटर कोई सामान्य झील नहीं है. इसकी गहराई करीब 300 से 400 फीट तक बताई जाती है. पानी ऊपर से भले ही शांत दिखाई दे, लेकिन अंदर का तापमान काफी कम रहता है. साथ ही गहरे हिस्सों में भंवर और अचानक बढ़ने वाली गहराई लोगों के लिए जानलेवा साबित होती है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि पानी की वास्तविक गहराई का अनुमान लगाना मुश्किल है. कई लोग तैराकी या रोमांच के लिए पानी में उतर जाते हैं और फिर बाहर नहीं निकल पाते.
सोशल मीडिया की वजह से बढ़ी भीड़
स्थानीय लोगों के अनुसार, ब्लू वॉटर की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होते रहते हैं. इसकी प्राकृतिक खूबसूरती लोगों को आकर्षित करती है. बड़ी संख्या में युवा यहां घूमने और वीडियो बनाने पहुंचते हैं. कई बार लोग खतरों को नजरअंदाज कर पानी के करीब चले जाते हैं, जिससे हादसे हो जाते हैं.
लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए प्रशासन ने इस क्षेत्र में जाने और पानी में उतरने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है. इसके बावजूद कुछ लोग नियमों की अनदेखी कर खदान क्षेत्र तक पहुंच जाते हैं. यही लापरवाही कई बार दुर्घटनाओं की वजह बनती है.
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