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अरबों के मालिक नागौद राजघराने के गोलीकांड की कहानी, बाबा राजा की 2 पत्नियां क्यों बनी एक दूसरे की दुश्मन?

रूपेंद्र सिंह की वजह नागौद राजपरिवार पहले भी चर्चा में रह चुका है. रूपेंद्र के कहने पर ही उसकी दूसरी पत्नी सुनीता ने पहली पत्नी योगिता सिंह पर गोली चलाई थी. जानिए क्या है पूरा विवाद, जो गोलीकांड तक जा पहुंचा...

अरबों के मालिक नागौद राजघराने के गोलीकांड की कहानी, बाबा राजा की 2 पत्नियां क्यों बनी एक दूसरे की दुश्मन?
गोली चलाने वाली सुनीता सिंह, सबसे दायीं तरफ रूपेंद्र सिंह व उनकी पहली पत्नी योगिता सिंह.

नागौद राजघराने में गोलीबारी की घटना के बाद पूरे मध्य प्रदेश और राजस्थान तक इसकी चर्चा हो रही है. नागौद विधायक नागेंद्र सिंह के भतीजे रूपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा की पहली पत्नी योगिता सिंह को उनकी ही दूसरी पत्नी सुनीता सिंह ने गोली मारी है. सुनीता पुलिस की गिरफ्त में हैं. रूपेंद्र सिंह मध्य प्रदेश के नागौद राजघराने में गिने जाते हैं तो वहीं, योगिता उदयपुर राजपरिवार की बेटी हैं. इस हाई-प्रोफाइल घराने में गोलीकांड की वजह संपत्ति विवाद सामने आ रहा है. आरोप है कि सुनीता ने गोली रूपेंद्र सिंह के उकसावे पर ही मारी है.

कौन हैं सुनीता सिंह

सुनीता सिंह मूल रूप से सतना जिले के उमरी गांव की रहने वाली हैं. पिता आर्मी से सेवानिवृत्त थे, जिनका निधन हो चुका है. सुनीता की दो बहनें और एक भाई है. बहन की बांदा में शादी हुई है. भाई झोलाछाप डॉक्टर है. वहीं, परसमनिया में सुनीता एनजीओ का काम करती थीं. कहा जाता है कि इसी दौरान वह रुपेंद्र सिंह बाबा राजा के संपर्क में आईं. इसके बाद वह पेप्टेक में रहने लगीं. सतना के भरहुत नगर में रेस्तरां का कारोबार किया. बताया जाता है कि रुपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा के पिता के देहांत बाद सुनीता सिंह परसमनिया गढ़ी में रूपेंद्र के साथ रहने लगीं, वहीं से सुनीता और योगिता (पहली पत्नी) के बीच विवाद शुरू हो गया. इसके चलते योगिता सिंह नागौद स्थित गढ़ी में शिफ्ट हो गईं. यह मामला भी थाने पहुंचा था. हालांकि, तब मामला राजपरिवार के रसूख के चलते दब गया और सुनीता सिंह बाबा राजा के साथ अघोषित पत्नी के रूप में रहने लगीं.

कुर्सी पर बैठी सुनीता सिंह गोलीकांड की आरोपी है, जो परसमनिया थाने के लॉकअप में बंद होने के बजाय कुर्सी पर बैठी हुई हैं. इसके बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. लॉकअप में बंद करने के बजाय इन्हें कोल्डड्रिंग पिलाई गई है. 

उदयपुर की बेटी हैं योगिता सिंह

बाबा राजा के उकसावे पर सुनीता सिंह ने जिस योगिता सिंह को गोली मारी, वह बाबा राजा की विवाहित पत्नी हैं. साल 2000 में राजस्थान के उदयपुर राजपरिवार ने अपनी बेटी योगिता सिंह का विवाह रुपेंद्र सिंह बाबा राजा के साथ किया था. बताया जाता है कि योगिता सिंह एक पंचवर्षीय कार्यकाल तक परसमनिया पंचायत की सरपंच रहीं. उनका एक बेटा प्रथूदेव सिंह है, जिसकी प्रारंभिक शिक्षा नागौद में हुई. इसके बाद आगे की पढ़ाई देहरादून से हुई. वहीं, अब वह भोपाल में रहकर सीए की प्रैक्टिस कर रहा है. तीन साल पहले योगिता के पिता का निधन हुआ था, जिसके बाद योगिता सिंह अपने मायके उदयपुर चली गई थीं. वह अभी दो दिन पहले ही लौटी हैं, जिसके बाद विवाद हो गया.

नागौद विधायक नागेंद्र सिंह.

क्या था घटनाक्रम

बताया जाता है कि बीते गुरुवार को योगिता सिंह, उनकी मां नरेंद्र कुमारी सिंह, बेटा प्रथूदेव सिंह और भाई नागेंद्र सिंह राठौर अपना सामान लेने परसमनिया गढ़ी पहुंचे थे. गढ़ी में पहुंचने के साथ ही बाबा राजा ने मारपीट की. चूंकि योगिता सिंह के साथ उनका बेटा और भाई था, जब उन्होंने बीच-बचाव किया तब बाबा राजा ने गोली मारने को कहा. इसके बाद सुनीता ने पॉइंट 22 की बंदूक से पांच राउंड फायरिंग की और एक गोली पेट में लग गई. वहीं, एक गोली बंदूक में फंसी रही, जिसे पुलिस ने जब्त किया है.

पेट्रोल पंप के संचालन को लेकर भी विवाद रहा

परसमनिया राजघराने की बहू योगिता सिंह के नाम पर एक पेट्रोल पंप भी संचालित हो रहा था, जिसका संचालन अवैध रूप से सुनीता सिंह बाबा राजा के इशारे में करने लगी थी. इसी विवाद के चलते बाद में इस पेट्रोल पंप को कंपनी ने अपने हैंडओवर ले लिया था. यहां के तमाम विवाद थानों तक पहुंचे, लेकिन राजनीतिक प्रभाव के चलते उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी. अब यह पेट्रोल पंप सुनीता के नाम पर हो चुका है, जिसका वह संचालन कर रही हैं. इसको लेकर भी योगिता और उनके पति में विवाद चल रहा है.

कुंजल हत्याकांड और आदिवासी युवती से रेप कांड से सुर्खियों में आया बाबा राजा का नाम

रुपेंद्र सिंह उर्फ बाबा राजा का नाम हमेशा विवादों में रहा. विवाहित पत्नी को महिला मित्र से गोली मरवाने से पहले बाबा राजा कई आपराधिक घटनाओं में शामिल रह चुका है. साल 1991 में पहली बार कुंजल भूमिया नामक व्यक्ति की हत्या में बाबा राजा का नाम सामने आया. बताया जाता है कि बाबा राजा ने बीच चौराहे में कुंजल की हत्या कर दी थी. उन दिनों यह मामला काफी उछला. मुद्दा विधानसभा के सदन तक पहुंचा, लेकिन राजपरिवार और राजनीतिक रसूख रखने वाले नागेंद्र सिंह के दबाव में यह मामला पूरी तरह से दफन हो गया. इसके बाद एक आदिवासी परिवार की लड़की से दुष्कर्म के मामले में बाबा राजा का नाम साल 2010-11 में भी सुर्खियों में रहा. इसी प्रकार की कई और घटनाओं में रुपेंद्र सिंह का नाम उछला, लेकिन प्रभावशाली परिवार होने के चलते किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हो सकी.

नागौद राजपरिवार की पारिवारिक पृष्ठभूमि

परसमनिया और उचेहरा किला दोनों नागौद राजपरिवार के ही अंग हैं. महेंद्र सिंह यहां के अंतिम राजा रहे, जिनकी दो पत्नियां थीं. पहली पत्नी गुजरात के धरमपुर रियासत की थीं, जबकि दूसरी पत्नी पूर्व सांसद दादा सुखेंद्र सिंह (बांधी-रैगांव) की बहन श्यामकुमारी सिंह थीं. इनके सबसे बड़े पुत्र नागेंद्र सिंह हैं, जो भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान समय में विधायक हैं. इसके अलावा छोटे भाई रामदेव सिंह हैं. तीसरे नंबर पर रंतिदेव सिंह, चौथे नंबर पर कांतिदेव सिंह उर्फ कुन्नू और पांचवें भाई छत्रसाल सिंह उर्फ छत्तू हैं. रुपेंद्र सिंह कांतिदेव सिंह कुन्नू के पुत्र व नागेंद्र सिंह के भतीजे हैं.

अरबों में है राजपरिवार की संपत्ति

नागौद राजपरिवार के पास अरबों की पैतृक संपत्ति है. परसमनिया गढ़ी में रहने वाले बाबा राजा के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति है. राजशाही ठाठ वाली गढ़ी के अलावा सैकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि है. इसके अलावा अन्य व्यावसायिक भूमियां और भवन हैं. कहा जाता है कि असल विवाद संपत्ति का है. चूंकि योगिता सिंह का एक बेटा है, जो राजपरिवार का वारिस है, ऐसे में वह बेटे के लिए यहां पहुंचीं, लेकिन उन्हें अपने जीवन से बेदखल करने के बाद अब उनकी जान लेने पर आमादा हो गए.

बाबा राजा ने भी दिया आवेदन

एक ओर उचेहरा थाना में योगिता सिंह की तरफ से एफआईआर दर्ज कराई गई है, जिसमें सुनीता सिंह को आरोपी बनाया गया है. वहीं, देर शाम रुपेंद्र सिंह बाबा राजा की ओर से भी शिकायत की गई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि योगिता सिंह, उनके भाई नागेंद्र सिंह और प्रथूदेव सिंह सहित छह लोग पहुंचे थे, जिन पर मारपीट का आरोप लगाया गया है. लेकिन यह आवेदन तब आया, जब इस मामले में दूसरे पक्ष ने एफआईआर दर्ज कराई. माना जा रहा है कि बाबा राजा इस मामले में काउंटर एफआईआर कराकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं, उन्होंने सुनीता सिंह के मामले में सफाई दी है कि वह उनकी बिजनेस पार्टनर हैं. कुछ जगहों पर उन्होंने यह कहा कि योगिता सिंह के साथ मिलकर वह पिछले दस सालों से काम कर रहे थे. परसमनिया गढ़ी को एक रिसॉर्ट के तौर पर विकसित किया जा रहा था, जिसमें सुनीता की अहम हिस्सेदारी है.

राजपरिवार की बहू को गोली मारने की आरोपी सुनीता सिंह भेजी गई जेल

नागौद राजपरिवार से जुड़े चर्चित गोलीकांड मामले में आरोपी सुनीता सिंह को उचेहरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. उचेहरा थाना प्रभारी सतीश मिश्रा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में लिया. आरोप है कि सुनीता सिंह ने पारिवारिक विवाद के दौरान राजपरिवार की बहू योगिता सिंह को गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था. घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी. गिरफ्तारी के बाद सुनीता सिंह को उचेहरा न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए.

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विधायक नागेंद्र सिंह के बारे में

सतना जिले के नागौद विधायक नागेंद्र सिंह विंध्य क्षेत्र के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में गिने जाते हैं. उनका राजनीतिक सफर लगभग पांच दशक पहले शुरू हुआ. वे पहली बार वर्ष 1977 में नागौद विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए. इसके बाद 1980 में दोबारा विधानसभा पहुंचे. लंबे अंतराल के बाद उन्होंने 2003 और 2008 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की. इसके अलावा साल 2018 व 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नागौद सीट से जीत हासिल कर भाजपा का परचम लहराया. मध्य प्रदेश सरकार में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. वर्ष 2005 से 2007 तक वे गृह, तकनीकी शिक्षा और जनसंपर्क विभाग में राज्य मंत्री रहे. इसके बाद 2007 से 2008 तक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कैबिनेट मंत्री बने. वर्ष 2008 से 2013 तक उन्होंने लोक निर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया.

राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में वे खजुराहो संसदीय क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए और 16वीं लोकसभा के सदस्य बने. सांसद के रूप में उन्होंने वित्त, व्यापार और सतत विकास संबंधी संसदीय समितियों में भी कार्य किया. राजघराने से संबंध रखने वाले नागेंद्र सिंह जूदेव आज भी विंध्य क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली जनप्रतिनिधि माने जाते हैं. वहीं, नागौद राजपरिवार के सदस्य रामदेव सिंह भी वर्ष 1993 में इसी विधानसभा से विधायक रह चुके हैं.

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