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मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में नया मोड़: जेल के भीतर से गवाहों को प्रलोभन, बस्तर के पत्रकारों में भारी आक्रोश

छत्तीसगढ़ के बीजापुर से बड़ी खबर है, जहां दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में जेल के भीतर से गवाहों को खरीदने और धमकाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस मामले में एक ऑडियो वायरल होने के बाद बस्तर के पत्रकारों में भारी आक्रोश है, जिसके बाद पुलिस से लेकर जेल प्रशासन तक की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में नया मोड़: जेल के भीतर से गवाहों को प्रलोभन, बस्तर के पत्रकारों में भारी आक्रोश
 मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में नया मोड़: जेल के भीतर से गवाहों को प्रलोभन, बस्तर के पत्रकारों में भारी आक्रोश
Pankaj Singh Bhadauria

छत्तीसगढ़ के बीजापुर के चर्चित दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड में एक नया और बेहद गंभीर विवाद खड़ा हो गया है. इस सनसनीखेज मामले में अब गवाहों को खरीदने और उन पर दबाव बनाने के संगीन आरोप लगे हैं. बस्तर संभाग के स्थानीय पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि मामले का मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर जेल की सलाखों के पीछे से ही गवाहों को प्रभावित करने का खेल खेल रहा है. कोर्ट में बयान बदलवाने के लिए गवाहों को भारी-भरकम रकम का प्रलोभन दिया जा रहा है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है.

इस पूरे मामले की सबसे गंभीर बात यह है कि मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के अधिकांश मुख्य गवाह खुद बीजापुर के स्थानीय पत्रकार हैं. पत्रकारों का सीधा आरोप है कि सुनील मर्सकोले नाम का एक स्वयंभू पत्रकार इस पूरे रैकेट की मुख्य कड़ी है. सुनील लगातार केंद्रीय जेल जगदलपुर में बंद मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के सीधे संपर्क में बना हुआ है. आरोप है कि वह जेल में बंद आरोपी के इशारे पर गवाह पत्रकारों से संपर्क साध रहा है, उन पर कोर्ट में गवाही पलटने का दबाव बना रहा है और इसके बदले मोटी आर्थिक मदद यानी पैसे का लालच दे रहा है.

कथित ऑडियो वायरल होने से मचा बवाल

इस गवाह-खरीद फरोख्त के मामले का खुलासा तब हुआ, जब इससे जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. ऑडियो सामने आते ही बस्तर और बीजापुर के पत्रकार बिरादरी में जबरदस्त गुस्सा फूट पड़ा. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बीजापुर के पत्रकारों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक (SP) के नाम एक लिखित ज्ञापन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चंद्रकांत गवर्ना को सौंपा है. इस पत्र में पत्रकारों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की बिना किसी दबाव के निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाए. साथ ही वायरल हो रहे कथित ऑडियो की फॉरेंसिक और तकनीकी पड़ताल की जाए. इसके अलावा, कोर्ट में सरकारी पक्ष के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम को आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड में शामिल कराया जाए, ताकि आरोपी को इसका फायदा न मिले.

जगदलपुर केंद्रीय जेल प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने छत्तीसगढ़ के जेल प्रशासन की सुरक्षा और दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. पत्रकारों ने तीखे सवाल उठाते हुए पूछा है कि आखिर जगदलपुर केंद्रीय जेल जैसी संवेदनशील जगह पर बंद एक कत्ल का आरोपी इतनी स्वतंत्रता कैसे भोग रहा है? वह जेल के भीतर से लगातार मोबाइल फोन का इस्तेमाल कैसे कर रहा है और बाहरी दुनिया के लोगों के साथ संपर्क में कैसे है? पत्रकारों का साफ आरोप है कि पैसे और रसूख के दम पर जेल के अंदर से ही एक पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा है. उन्होंने इस मामले में जेल प्रशासन की मिलीभगत की आशंका जताते हुए उनकी भूमिका की भी जांच की मांग की है.

पत्रकारों ने अंतम सांस तक कानूनी लड़ाई लड़ने की खाई कसम

पत्रकार मुकेश चंद्राकर को न्याय दिलाने और गवाहों को सुरक्षा देने की इस मुहिम में बस्तर के तमाम छोटे-बड़े पत्रकार एकजुट हो गए हैं. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपने वालों में बीजापुर के प्रमुख पत्रकार पी. रंजन दास, पवन दुर्गम, गणेश मिश्रा, पुष्पा रोकड़े, नितिन रोकड़े, चेतन कापेवार, सतीश अल्लूर, भरत दुर्गम, संतोष तिवारी और घनश्याम यादव मुख्य रूप से शामिल रहे. इस दौरान बस्तर के दो बेहद वरिष्ठ और दिग्गज पत्रकार धर्मेंद्र महापात्र और बादशाह खान भी विशेष रूप से मौजूद रहे, जिन्होंने इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया है.

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गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के जांबाज खोजी पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या बस्तर क्षेत्र में एक सड़क निर्माण परियोजना में हुए ₹120 करोड़ के भारी भ्रष्टाचार और घोटाले को उजागर करने की वजह से की गई थी. मुकेश चंद्राकर स्वतंत्र रूप से 'NDTV' के लिए रिपोर्टिंग करते थे और 'बस्तर जंक्शन' नाम से एक लोकप्रिय यूट्यूब चैनल भी चलाते थे. मुकेश चंद्राकर ने मिरतुर से गंगालूर के बीच बन रही 52 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजना की खराब गुणवत्ता और अनियमितताओं को जनता के सामने लाया था. विशेष जांच दल (SIT) के मुताबिक एक जनवरी 2025 की रात को मुख्य आरोपी और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, उसके भाइयों रितेश और दिनेश चंद्राकर, जो मुकेश के चचेरे भाई बताए जाते हैं. उन्होंने मुकेश को भोजन के बहाने एक परिसर में बुलाया. इसके बाद वहीं पर  धारदार हथियारों और लाठियों से बर्बरतापूर्वक हमला कर उनकी जान ले ली गई. इसके बाद उनका शव छिपाने के लिए सेप्टिक टैंक में डाल दिया गया था. 

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पंकज सिंह भदौरिया
संवाददाता
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