मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही हैं. इसी कड़ी में बीजेपी ने जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई वाली ड्राफ्ट समिति को अपने विस्तृत सुझाव सौंप दिए हैं. पार्टी ने विवाह से लेकर तलाक, संपत्ति, गोद लेने और NRI शादी तक के नियमों में बदलाव की पैरवी की है. खास बात यह रही कि समिति की बैठक में सभी दलों को बुलाया, लेकिन कांग्रेस सहित कई दल नहीं पहुंचे.
समिति बैठक में सीमित राजनीतिक भागीदारी
UCC पर सुझाव लेने के लिए समिति ने सभी राजनीतिक दलों को बुलाया था, लेकिन केवल दो ही दल अपने सुझाव लेकर पहुंचे. UCC का विरोध करने वाली कांग्रेस पार्टी का कोई प्रतिनिधि इस अहम बैठक में शामिल नहीं हुआ, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई.
विवाह और पंजीकरण पर सख्ती की मांग
बीजेपी ने अपने सुझाव में कहा है कि सभी धर्मों में विवाह की न्यूनतम उम्र का सख्ती से पालन कराया जाए और बाल विवाह के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो. इसके साथ ही हर विवाह का पंजीकरण अनिवार्य बनाया जाए, ताकि कानूनी विवादों को रोका जा सके.
संपत्ति और उत्तराधिकार में समान अधिकार
सुझावों में बेटा और बेटी को पैतृक और खुद की अर्जित संपत्ति में समान अधिकार देने की बात कही गई है. इसके अलावा पति या पत्नी की मृत्यु के बाद जीवित जीवनसाथी के अधिकार सुरक्षित करने और वसीयत के नियम सभी नागरिकों के लिए एक समान रखने का प्रस्ताव दिया गया है.
गोद लेने और संरक्षकता पर बराबरी
बीजेपी ने प्रस्ताव रखा है कि सभी धर्मों के लोग बिना किसी भेदभाव के बच्चा गोद ले सकें. गोद लिए गए बच्चे को भी जैविक बच्चे के समान अधिकार दिए जाएं. साथ ही बच्चों के प्राकृतिक संरक्षक के रूप में माता और पिता दोनों को समान कानूनी अधिकार देने की बात कही गई है.
तलाक और भरण-पोषण के लिए समान नियम
तलाक के मामलों में पत्नी, बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण के लिए एक समान और न्यायसंगत नियम बनाए जाने की सिफारिश की गई है. इसके अलावा शादी के बाद अर्जित संपत्ति में तलाक की स्थिति में पति-पत्नी को 50-50 हिस्सेदारी देने का सुझाव रखा है, ताकि आर्थिक संतुलन बना रहे.
डिजिटल व्यवस्था और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव
बीजेपी ने विवाह पंजीकरण, तलाक, गोद लेने और वसीयत से जुड़े मामलों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल बनाने का सुझाव दिया है. साथ ही विवाह के तुरंत बाद डिजिटल प्रमाणपत्र जारी करने की बात कही है. पारिवारिक विवादों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की भी वकालत की गई है, जहां मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर हो सके.
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रावधान
सुझावों में यह भी कहा गया है कि यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं. संपत्ति हस्तांतरण रद्द करने और भरण-पोषण की रकम सीधे आय से काटने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं. दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा के लिए भी विशेष ट्रस्ट और कानूनी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है.
NRI विवाह पर सख्त नियम की पैरवी
बीजेपी ने NRI शादियों को लेकर भी सख्त नियम लागू करने का सुझाव दिया है. प्रस्ताव में कहा गया है कि यदि कोई NRI भारत में शादी करता है, तो उसे 7 दिनों के भीतर शादी का पंजीकरण अनिवार्य रूप से कराना होगा, जिससे शादी के बाद विदेश में छोड़ देने जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके.
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