MP Tiger Death News: मध्य प्रदेश में एक बार फिर बाघों की मौत ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शहडोल जिले में खेतों में बिछाए गए करंट की चपेट में आकर एक बाघ और एक बाघिन की मौत हो गई. दो टाइगर के शव मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब कुछ ही दिन पहले इसी क्षेत्र से एक घायल बाघ को रेस्क्यू कर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेजा गया था.
यह मामला शहडोल जिले के उत्तर वन मंडल अंतर्गत जयसिंहनगर रेंज का है. करपा गांव के पास बनचाचर बीट में जंगल से सटे खेतों में बिछाए गए करंट की चपेट में आने से एक बाघ और एक बाघिन की जान चली गई. बताया जा रहा है कि किसानों ने फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों में अवैध रूप से करंट फैलाया था.
अलग-अलग समय पर मिले शव
वन विभाग के अनुसार, बाघिन का शव शुक्रवार शाम को खेत के पास मिला था, जबकि बाघ का शव शनिवार सुबह बरामद हुआ. दोनों शव जंगल से सटे खेतों के पास पाए गए, जिससे यह साफ होता है कि बाघों का मूवमेंट इस इलाके में लगातार बना हुआ है.
वन विभाग में मचा हड़कंप
दो बाघों की मौत की खबर मिलते ही वन विभाग में अफरा-तफरी मच गई. सुबह से ही मौके पर CCF, DFO, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की टीम और डॉग स्क्वायड पहुंच गया. पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया और मामले की गंभीरता से जांच शुरू की गई.
उत्तर वन मंडल शहडोल की DFO तरुणा वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोनों बाघों की मौत करंट लगने से हुई है. उन्होंने कहा कि खेतों में जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए करंट लगाया गया था, जिसकी चपेट में आने से यह हादसा हुआ. दोनों बाघों का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार कर दिया गया है.
तीन ग्रामीण हिरासत में
डॉग स्क्वायड की मदद से जांच के दौरान तीन ग्रामीणों को पूछताछ के लिए पकड़ा गया है. इनसे यह जानने की कोशिश की जा रही है कि करंट किसने और किस उद्देश्य से लगाया था. वन विभाग का कहना है कि जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
मृत बाघिन को लेकर आशंका जताई जा रही है कि उसके साथ शावक भी हो सकते हैं. फिलहाल शावक लापता बताए जा रहे हैं. वन विभाग की टीमें जंगल और आसपास के इलाकों में उनकी तलाश कर रही हैं, ताकि किसी और अनहोनी को रोका जा सके.
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
यह कोई पहली घटना नहीं है. बीते वर्षों में भी कई बार बाघ और तेंदुए खेतों में बिछाए गए करंट की चपेट में आकर मारे जा चुके हैं. खास बात यह है कि यह इलाका बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है, जहां बाघों का मूवमेंट लगातार बना रहता है.
वन विभाग की लापरवाही पर सवाल
कुछ दिन पहले ही इसी क्षेत्र से एक घायल बाघ को रेस्क्यू कर बांधवगढ़ भेजा गया था. इसके बावजूद चार दिन के भीतर दो बाघों की करंट से मौत होना कहीं न कहीं वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है. बाघों की मौजूदगी के बावजूद न तो खेतों में करंट लगाने पर सख्ती हुई और न ही समय रहते निगरानी बढ़ाई गई.
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