MP's Lapta Ladies: मध्य प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 130 महिलाएं और बालिकाएं लापता हो रही हैं. यह चौंकाने वाला आंकड़ा विधानसभा में सामने आया, जब कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार से जानकारी मांगी. मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने लिखित जवाब में स्वीकार किया कि वर्ष 2020 से 28 जनवरी 2026 तक राज्य में कुल 2 लाख 74 हजार 311 महिलाएं और बालिकाएं लापता दर्ज की गईं.
हर साल करीब 45 हजार, हर महीने लगभग 3700, और हर दिन औसतन 130 महिलाएं व बच्चियां गायब हो रही
अगर इस आंकड़े को बांटकर देखें तो तस्वीर और भयावह हो जाती है. यानी हर साल करीब 45 हजार, हर महीने लगभग 3700, और हर दिन औसतन 130 महिलाएं और बच्चियां गायब हो रही हैं. सरकार ने बताया कि इनमें से 2 लाख 35 हजार 977 को खोज लिया गया है, लेकिन अब भी 68 हजार 334 महिलाएं और बालिकाएं लापता हैं। यानी एक छोटे शहर की पूरी आबादी जितनी महिलाएं आज भी अपने घरों से दूर, अनजान हालात में हैं.
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मध्य प्रदेश के इंदौर और भोपाल जैसे बड़े और प्रमुख शहरों में लगातार बढ़ रही है लापता महिलाओं की संख्या
विधानसभा के पटल पर दी गई जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में लगातार लापता महिलाओं की संख्या बढ़ रही है, वहीं आदिवासी और सीमावर्ती जिलों में भी कई मामले सालों से अनसुलझे पड़े हैं। इससे मानव तस्करी, जबरन विवाह, शोषण और निगरानी तंत्र की कमजोरी जैसे गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
MLA विक्रांत भूरिया ने लापता लेडीज संकट की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए एपस्टीन फाइल्स से की
एनडीटीवी से बातचीत में विधायक विक्रांत भूरिया ने इस संकट की तुलना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने आए एपस्टीन फाइल्स से करते हुए कहा,“जब हजारों नहीं बल्कि लाखों महिलाएं लापता दर्ज हों और उनमें से 68 हजार से ज्यादा अब भी नहीं मिल पाई हों, तो यह सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला नहीं है। यह एक मानवीय त्रासदी है। इसे सामान्य गुमशुदगी की तरह नहीं देखा जा सकता। सरकार को सर्वोच्च स्तर पर जवाबदेह होना होगा.”
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सवाल अब यही है क्या मध्य प्रदेश की यह ‘लापता लेडीज' त्रासदी सिर्फ आंकड़ों में सिमटकर रह जाएगी
उल्लेखनीय है मध्य प्रदेश में लगातार लापता हो रही लेडीज के हर आंकड़े के पीछे एक परिवार है, जो इंतजार में है. हर संख्या के पीछे एक कहानी है, जो अधूरी है. सवाल अब यही है क्या मध्य प्रदेश की यह ‘लापता लेडीज' त्रासदी सिर्फ आंकड़ों में सिमटकर रह जाएगी, या इसके समाधान की दिशा में कोई निर्णायक कदम उठेगा.
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