- मध्य प्रदेश में हार्डकोर अपराधियों की मानसिकता बदलने के लिए अनूठा प्रयोग शुरू हो रहा है.
- राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के सहयोग से अब कैदियों की दिमागी स्थिति की जांच की जाएगी.
- रिसर्च में दिक्कतों की सटीक पहचान होने के बाद अपरााधियों को मानसिक रूप से स्वस्थ बनाने पर जोर दिया जाएगा.
अपराधियों को जेल भेजा जाता है ताकि उनमें सुधार हो सके और वे अपने किए की सजा भुगतकर समाज में आम लोगों की तरह रह सकें. लेकिन, कई अपराधी जेल से बाहर आने के बाद फिर क्राइम की दुनिया में चले जाते हैं और एक के बाद एक वारदात को अंजाम देते रहते हैं. अपराधी ऐसा क्यों करते हैं, इस सवाल का जानने के लिए मध्य प्रदेश में कवायद शुरू हो गई, ताकि उन्हें भविष्य में अपराध करने से रोका जा सके.
क्या है रिसर्च का मकसद?
स्कूल ऑफ बिहेवियरल साइंस की डायरेक्टर नूरीन मोमीन के अनुसार, इस स्टडी का मकसद आदतन अपराधियों की दिमागी स्थिति और उनके हिंसक बर्ताव की वजहों का पता लगाना है, जिससे भविष्य में उनके दोबारा अपराध करने की संभावना को कम या खत्म किया जा सके.

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हार्डकोर कैदियों पर कैसे होगी रिसर्च
रिसर्च के दौरान कैदियों से आम तौर पर दिखने वाली मानसिक परेशानियों- गहरी नींद न आना और जेल के माहौल में एडजस्ट न हो पाने के साथ-साथ उनकी अन्य समस्याओं पर विशेष फोकस किया जाएगा.
समस्या पता चलने के बाद क्या होगा?

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भोपाल से शुरुआत फिर पूरे प्रदेश में होगा लागू
डीजी जेल वरुण कपूर के अनुसार, सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में भोपाल सेंट्रल जेल से इस विशेष 'माइंड-रिफॉर्म सेंटर' की शुरुआत होने जा रही है. इसके दो महीने बाद इंदौर सेंट्रल जेल में भी ऐसा ही सेंटर खुलेगा. यहां ट्रायल सफल होने के बाद मध्य प्रदेश की सभी 11 सेंट्रल जेलों में इसे लागू किया जाएगा.
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