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MP की जेलों में होगी हार्डकोर अपराधियों के दिमाग की जांच; क्राइम क्यों दोहराते हैं मिलेगा जवाब; जानिए प्लान

मध्य प्रदेश में पहली बार हार्डकोर अपराधियों की मानसिकता बदलने के लिए अनूठा प्रयोग शुरू हो रहा है. गुजरात की राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के सहयोग से कैदियों के दिमागी स्थिति की जांच की जाएगी, जिससे उन्‍हें बार-बार अपराध करने से रोका जा सके.

MP की जेलों में होगी हार्डकोर अपराधियों के दिमाग की जांच; क्राइम क्यों दोहराते हैं मिलेगा जवाब; जानिए प्लान
mp bhopal central jail hardcore criminals mind and behavior therapy rru model.
  • मध्य प्रदेश में हार्डकोर अपराधियों की मानसिकता बदलने के लिए अनूठा प्रयोग शुरू हो रहा है.
  • राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के सहयोग से अब कैदियों की दिमागी स्थिति की जांच की जाएगी‌.
  • रिसर्च में दिक्कतों की सटीक पहचान होने के बाद अपरााधियों को मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ बनाने पर जोर दिया जाएगा.

अपराधियों को जेल भेजा जाता है ताकि उनमें सुधार हो सके और वे अपने किए की सजा भुगतकर समाज में आम लोगों की तरह रह सकें. लेकिन, कई अपराधी जेल से बाहर आने के बाद फिर क्राइम की दुनिया में चले जाते हैं और एक के बाद एक वारदात को अंजाम देते रहते हैं. अपराधी ऐसा क्‍यों करते हैं, इस सवाल का जानने के लिए मध्‍य प्रदेश में कवायद शुरू हो गई, ताकि उन्‍हें भविष्‍य में अपराध करने से रोका जा सके. 

मध्‍य प्रदेश के जेल विभाग ने बार-बार अपराध करने वाले हार्डकोर अपराधियों के दिमागी पैटर्न और व्यवहारिक दिक्कतों को समझने के लिए गुजरात की राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी (आरआरयू) से हाथ मिलाया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली यह यूनिवर्सिटी एमपी की जेलों में बंद ऐसे अपराधियों पर वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक अध्‍ययन करेगी. 

क्‍या है रिसर्च का मकसद? 

स्कूल ऑफ बिहेवियरल साइंस की डायरेक्टर नूरीन मोमीन के अनुसार, इस स्टडी का मकसद आदतन अपराधियों की दिमागी स्थिति और उनके हिंसक बर्ताव की वजहों का पता लगाना है, जिससे भविष्य में उनके दोबारा अपराध करने की संभावना को कम या खत्म किया जा सके. 

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हार्डकोर कैदियों पर कैसे होगी रिसर्च

मध्‍य प्रदेश के जेल विभाग के इस प्‍लान की शुरुआत भोपाल सेंट्रल जेल से हो चुकी है, जहां महिला साइकोलॉजिस्ट मुस्कान वर्मा हार्डकोर विचाराधीन कैदियों का आकलन कर रही हैं. वहीं, अब राष्ट्रीय रक्षा यूनिवर्सिटी के एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर अपराधियों की स्क्रीनिंग की जाएगी. 

रिसर्च के दौरान कैदियों से आम तौर पर दिखने वाली मानसिक परेशानियों- गहरी नींद न आना और जेल के माहौल में एडजस्‍ट न हो पाने के साथ-साथ उनकी अन्‍य समस्‍याओं पर विशेष फोकस किया जाएगा. 

समस्‍या पता चलने के बाद क्‍या होगा?

रिसर्च में दिक्कतों की सटीक पहचान होने के बाद अपरााधियों-बंदियों को मानसिक रूप से स्‍वस्‍थ बनाने पर जोर दिया जाएगा. इसके लिए प्राचीन विपासना पद्धति के साथ-साथ आधुनिक थैरेप्यूटिक मॉडल, जैसे- 'रैशनल इमोटिव बिहेवियर थेरेपी' की मदद ली जाएगी. सबसे खास बात यह भी है क‍ि इस पूरे सिस्टम को चलाने के लिए यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है. प्रशिक्षित हो चुके कर्मचारी अन्य स्टाफ को ट्रेनिंग दे रहे हैं. 
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भोपाल से शुरुआत फ‍िर पूरे प्रदेश में होगा लागू 

डीजी जेल वरुण कपूर के अनुसार, सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में भोपाल सेंट्रल जेल से इस विशेष 'माइंड-रिफॉर्म सेंटर' की शुरुआत होने जा रही है. इसके दो महीने बाद इंदौर सेंट्रल जेल में भी ऐसा ही सेंटर खुलेगा. यहां ट्रायल सफल होने के बाद मध्य प्रदेश की सभी 11 सेंट्रल जेलों में इसे लागू किया जाएगा.

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