- भारतीय विशेषज्ञ बिमल पटेल ने ITLOS जज के रूप में ली शपथ
- कौन हैं बिमल पटेल? जानिए उनकी शिक्षा और उपलब्धियां
- राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति 115 वोट हासिल कर ITLOS पहुंचे
समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में भारत को बड़ी उपलब्धि मिली है. भारतीय विधि विशेषज्ञ डॉ. बिमल पटेल ने इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाल लिया है. जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में उनका कार्यकाल नौ वर्षों का होगा. डॉ. पटेल पहले संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य रह चुके हैं और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात) के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनका चयन भारत की बढ़ती वैश्विक कानूनी उपस्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.
हैम्बर्ग में ली शपथ
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक डॉ. बिमल पटेल ने गुरुवार को जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) मुख्यालय में न्यायाधीश पद की शपथ ली. इसके साथ ही उन्होंने नौ वर्षीय कार्यकाल की आधिकारिक शुरुआत कर दी. इससे पहले भारतीय न्यायविद् नीरू चड्ढा इस संस्था में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं. उनका कार्यकाल बुधवार को समाप्त हुआ.
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— India at UN, NY (@IndiaUNNewYork) October 1, 2026
Dr. Bimal N. Patel takes oath as a Judge of the International Tribunal for the Law of the Sea (ITLOS) at the Tribunal's headquarters in Hamburg, Germany.@PMOIndia @MEAIndia @IndianDiplomacy
Press Release here: https://t.co/XSYTDQbJiv pic.twitter.com/3NYTn0CCc5
कौन हैं बिमल पटेल?
डॉ. बिमल पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में भारत के प्रमुख विशेषज्ञों में गिने जाते हैं. उन्होंने नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. वह संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (Rashtriya Raksha University) के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनका नाम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में भी जुड़ा रहा है.
कैसे हुआ चयन?
पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में हुए चुनाव में बिमल पटेल को सदस्य देशों का व्यापक समर्थन मिला था. उन्हें 168 वैध मतों में से 115 वोट प्राप्त हुए थे. यह चुनाव संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) से जुड़े सदस्य देशों के बीच कराया गया था. उनके चुनाव को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और कानूनी उपलब्धि माना गया था.
क्या है ITLOS?
इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) समुद्री कानून से जुड़े विवादों का समाधान करने वाली दुनिया की प्रमुख न्यायिक संस्था है. इसकी स्थापना 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत की गई थी. जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित यह न्यायाधिकरण समुद्री सीमाओं, नौवहन अधिकारों, समुद्री संसाधनों और महासागरों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों की सुनवाई करता है.
21 न्यायाधीशों की होती है बेंच
ITLOS में कुल 21 न्यायाधीश होते हैं, जिनका चयन दुनिया के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के संतुलित प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर किया जाता है. बिमल पटेल के साथ इस बार घाना की सिल्विया अमा अडुसु, ब्राजील के जॉर्ज रोड्रिगो बंदेरा गालिंडो, ट्यूनीशिया के स्लिम लाघमानी और वियतनाम की लैन-अन्ह थी गुयेन ने भी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है.
भारत के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
समुद्री सुरक्षा, हिंद महासागर क्षेत्र, वैश्विक व्यापार मार्गों और समुद्री संसाधनों से जुड़े मुद्दों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है. ऐसे समय में ITLOS जैसी महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था में भारतीय न्यायविद् का होना रणनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. डॉ. बिमल पटेल की नियुक्ति न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक मंचों पर देश की बढ़ती भागीदारी और प्रभाव को भी मजबूत करती है.
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