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मंदिरों के दान पर सियासत तेज: MP सरकार लाएगी डिजिटल दान व्यवस्था, कांग्रेस ने मांगा ऑडिट

अयोध्या में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बाद मध्यप्रदेश में मंदिरों की दान व्यवस्था पर बहस शुरू हो गई है. एमपी सरकार महाकाल और ओंकारेश्वर सहित प्रमुख मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस ने ऑडिट की मांग की है.

मंदिरों के दान पर सियासत तेज: MP सरकार लाएगी डिजिटल दान व्यवस्था, कांग्रेस ने मांगा ऑडिट
मंदिरों की दान व्यवस्था पर घमासान, कांग्रेस ने धार्मिक परियोजनाओं के ऑडिट की मांग उठाई

Temple Donation System MP: अयोध्या के श्रीराम मंदिर (Ram Mandir Donation Scam) में चढ़ावे और दान प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बाद मध्यप्रदेश में भी मंदिरों की दान व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में आने वाले चढ़ावे और उसके उपयोग पर सवाल उठने के बाद कांग्रेस ने बड़े मंदिरों और धार्मिक परियोजनाओं के ऑडिट की मांग की है. वहीं राज्य सरकार मंदिरों की दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की तैयारी में जुट गई है. महाकालेश्वर मंदिर, ओंकारेश्वर सहित प्रमुख देवस्थानों में डिजिटल दान व्यवस्था को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है. इस बीच ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर से जुड़ा पुराना मामला भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

मंदिरों में डिजिटल दान व्यवस्था लागू करने की तैयारी

मध्यप्रदेश सरकार प्रमुख मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में दान प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है. धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के अनुसार महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर और अन्य प्रमुख देवस्थानों में क्यूआर कोड और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से दान को प्रोत्साहित किया जाएगा. सरकार का उद्देश्य नकद लेन-देन को कम करना और दान संबंधी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है. इसके लिए देश के प्रमुख मंदिरों के प्रबंधन मॉडल का अध्ययन भी किया जा रहा है, ताकि मध्यप्रदेश के लिए एक अलग और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जा सके.

ओरछा के रामराजा मंदिर का मामला फिर चर्चा में

मंदिरों की वित्तीय पारदर्शिता पर चर्चा के बीच ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर का पुराना मामला भी फिर सुर्खियों में आ गया है. वर्ष 2017 में मंदिर के तत्कालीन लिपिक मुन्नालाल तिवारी पर दान राशि और आभूषणों से जुड़े कथित अनियमितता के आरोप लगे थे. इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई थी. हालांकि लगभग नौ वर्ष बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी. हाल ही में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त कर दिया है. इस फैसले के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि यदि अनियमितताएं हुई थीं तो आखिर उनकी जिम्मेदारी किसकी थी और जांच लंबित क्यों रही.

कांग्रेस ने उठाई ऑडिट की मांग

मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर हमला तेज कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि धार्मिक संस्थानों और उनसे जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित होना चाहिए. उन्होंने मंदिर प्रबंधन और दान व्यवस्था को लेकर सरकार को घेरा. वहीं कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने अयोध्या से लेकर मध्यप्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों तक ऑडिट कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि महाकाल लोक, श्रीराम लोक, ओरछा और अन्य धार्मिक परियोजनाओं पर हुए खर्च और कार्यों की स्वतंत्र जांच एवं ऑडिट कराया जाना चाहिए.

उमंग सिंघार ने भी उठाए सवाल

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनका कहना है कि धार्मिक संस्थानों की व्यवस्थाओं पर समय-समय पर समीक्षा और निगरानी आवश्यक है.

संत समाज ने भी पारदर्शिता पर दिया जोर

मंदिरों की दान व्यवस्था को लेकर संत समाज ने भी अपनी राय रखी है. संत सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगतगुरु आचार्य देवमुरारी बापू और संत अनिलानंद महाराज ने कहा कि मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र हैं, इसलिए वहां प्राप्त दान और खर्च की व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित व्यवस्था से श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा मंदिर प्रबंधन अधिक जवाबदेह बनेगा.

महाकाल और ओंकारेश्वर पर रहेगा विशेष फोकस

सरकारी सूत्रों के अनुसार उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर और ओंकारेश्वर जैसे बड़े धार्मिक केंद्रों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है. इसी कारण इन मंदिरों में डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन रिकॉर्डिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत किए जाने की संभावना है. इससे दान की प्राप्ति और उपयोग दोनों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा.

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