Guna Triple Murder Case: मध्यप्रदेश के गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में सामने आया ट्रिपल मर्डर केस अब केवल एक हत्याकांड नहीं, बल्कि रहस्य, रिश्तों की टूटन और पहचान की बड़ी गफलत का मामला बन गया है. हनुमान मंदिर के पास स्थित एक सूने मकान से दो दिनों में तीन सड़ी-गली लाशें मिलने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस ने कुछ ही घंटों में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा तो कर दिया, लेकिन शवों की पहचान में हुई एक गंभीर चूक ने जांच को नए मोड़ पर ला खड़ा किया. जिस लाश का अंतिम संस्कार परिजनों ने ओमप्रकाश शर्मा समझकर कर दिया था, वह दरअसल किसी और की निकली. अब इस हत्याकांड को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं.
सूने मकान से मिलीं तीन सड़ी-गली लाशें
मामला गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र का है, जहां हनुमान मंदिर के पास एक सूने मकान से दो दिनों के भीतर तीन लोगों के शव बरामद हुए. पहले दिन पुलिस ने मकान का एक कमरा खोलकर एक वृद्ध व्यक्ति का शव बरामद किया था. शव काफी सड़-गल चुका था, जिसके कारण उसकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था. प्रारंभिक जांच और कपड़ों के आधार पर पुलिस ने मृतक की पहचान 60 वर्षीय ओमप्रकाश शर्मा के रूप में की. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा गया और उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया.

Guna Triple Murder Case: डॉग स्क्वॉड टीम जांच करती हुई
दूसरे दिन खुला दूसरा कमरा, सामने आई बड़ी सच्चाई
सोमवार को पुलिस और एफएसएल टीम दोबारा घटनास्थल पर पहुंची. जांच के दौरान पास के दूसरे बंद कमरे से तेज दुर्गंध आने पर उसका ताला तोड़ा गया. कमरे के भीतर एक महिला और एक पुरुष का शव मिला. दोनों शव भी अत्यधिक सड़े-गले और क्षत-विक्षत हालत में थे. महिला की पहचान गिंदाबाई जाटव निवासी बदरवास के रूप में हुई. वहीं दूसरे पुरुष की पहचान ओमप्रकाश शर्मा के रूप में हुई, जिसकी पहले तलाश की जा रही थी. यहीं से पूरे मामले में बड़ा मोड़ आ गया.
जिसका अंतिम संस्कार हुआ, वह ओमप्रकाश नहीं था
दूसरे कमरे में ओमप्रकाश शर्मा का शव मिलने के बाद पुलिस और परिजन हैरान रह गए. पता चला कि जिस शव को पहले दिन ओमप्रकाश शर्मा समझकर परिजनों ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वह वास्तव में रामकिशन जाटव का था. यह खुलासा होते ही जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस और पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया. परिजनों ने शवों की पहचान की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए.

Guna Triple Murder Case: पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
मृतक के बेटे ने उठाए सवाल
रामकिशन जाटव के बेटे सोनू जाटव ने आरोप लगाया कि उसके पिता का शव अभी तक नहीं मिला है. उसने कहा कि पुलिस ने तीन मृतकों में से एक शव का अंतिम संस्कार गलत परिजनों से करवा दिया. अब उनके परिवार को अपने पिता के अंतिम संस्कार का अवसर भी नहीं मिल पाया. इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
अवैध संबंध और बदनामी बनी हत्या की वजह
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतका गिंदाबाई जाटव लंबे समय से ओमप्रकाश शर्मा के साथ रह रही थी. एसपी हितिका वासल के अनुसार मृतका के बेटे सीताराम और उसके मौसेरे भाई सुरेंद्र को यह संबंध पसंद नहीं था. उन्हें लगता था कि इस वजह से परिवार की बदनामी हो रही है. आरोपियों के अनुसार मृतका के रिश्तों के कारण परिवार में तनाव बढ़ रहा था और सीताराम की बहू तक घर छोड़कर चली गई थी.
प्लॉट विवाद ने भी बढ़ाया तनाव
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संबंधित लोगों के बीच जमीन और प्लॉट को लेकर विवाद चल रहा था. अवैध संबंधों को लेकर नाराजगी और संपत्ति विवाद दोनों ने मिलकर विवाद को गंभीर बना दिया. पुलिस का मानना है कि इन्हीं कारणों ने हत्या की साजिश को जन्म दिया.
18 जून को शराब पार्टी के बाद हुआ विवाद
पुलिस के अनुसार 18 जून को आरोपी और तीनों मृतक एक साथ थे. इस दौरान सभी ने शराब पी थी. नशे की हालत में विवाद बढ़ गया. आरोप है कि इसी दौरान सीताराम, सुरेंद्र और एक अन्य आरोपी ने मिलकर गिंदाबाई, ओमप्रकाश और रामकिशन का गला घोंटकर हत्या कर दी. हत्या के बाद शवों को मकान के अलग-अलग कमरों में छोड़ दिया गया, जहां वे कई दिनों तक पड़े रहे.
6 से 7 घंटे में पुलिस ने सुलझाई गुत्थी
एसपी हितिका वासल ने बताया कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण मामला था, क्योंकि शव पूरी तरह सड़ चुके थे और पहचान करना कठिन था. इसके बावजूद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर छह से सात घंटे में मामले का खुलासा कर दिया. पुलिस ने सीताराम और सुरेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे आरोपी की तलाश जारी है.
एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
शवों की हालत अत्यंत खराब होने के कारण डॉक्टर तत्काल मौत का सटीक समय और कारण तय नहीं कर पाए हैं. फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है. पुलिस अब डीएनए और अन्य वैज्ञानिक जांच के माध्यम से शवों की पहचान से जुड़े पहलुओं की भी पुष्टि करेगी.
परिजनों में नाराजगी, पुलिस पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि शवों की पहचान में इतनी बड़ी गलती नहीं होनी चाहिए थी. एक मृतक का अंतिम संस्कार गलत पहचान के आधार पर हो जाना पूरे मामले का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है. अब प्रशासन को न केवल हत्याकांड की जांच पूरी करनी है, बल्कि शव पहचान प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का भी जवाब देना होगा.
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