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Twisha Sharma: पूरे MP में नहीं -80 डिग्री का डीप फ्रीजर, 5 दिन से ज्यादा सुरक्षित नहीं रख सकते शव; असमंजस में पुलिस

Twisha Sharma Death Case: ट्विशा का शव 13 मई से एम्स भोपाल की मॉर्च्युरी में है. 18 मई को एम्स ने पुलिस को बताया कि उनकी मॉर्च्युरी -4°C तक ही जा सकती है, जहां शव सिर्फ 4-5 दिन सुरक्षित रह सकता है. ऐसे में पुलिस असमंजस में है कि कोर्ट के आदेश का पालन कैसे हो.

Twisha Sharma: पूरे MP में नहीं -80 डिग्री का डीप फ्रीजर, 5 दिन से ज्यादा सुरक्षित नहीं रख सकते शव; असमंजस में पुलिस

भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में एक तरफ कोर्ट ने ट्विशा के शव का दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग खारिज कर दी. वहीं, दूसरी तरफ शव को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसे माइनस 80 डिग्री सेल्सियस तापमान पर संरक्षित रखने का आदेश दे दिया. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है जब पूरे मध्यप्रदेश में ऐसी सुविधा ही मौजूद नहीं तो आखिर यह आदेश लागू कैसे होगा?

ट्विशा का शव 13 मई से एम्स भोपाल की मॉर्च्युरी में रखा हुआ है. 18 मई को एम्स ने पुलिस को लिखित रूप से बताया कि उनकी मॉर्च्युरी का तापमान केवल -4 डिग्री सेल्सियस तक ही जा सकता है. इस तापमान पर किसी शव को अधिकतम चार से पांच दिन तक ही सुरक्षित रखा जा सकता है.

कोर्ट कैसे पालन करें आदेश, असमंजस में पुलिस

कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि शव को लंबे समय तक संरक्षित रखने के लिए माइनस 80 डिग्री तापमान आवश्यक है, लेकिन हकीकत यह है कि राज्य के किसी मेडिकल कॉलेज या सरकारी अस्पताल में ऐसी अत्याधुनिक फ्रीजर सुविधा उपलब्ध नहीं है. कटारा हिल्स थाना पुलिस को शव सुरक्षित रखने का निर्देश तो दे दिया गया, लेकिन पुलिस और फॉरेंसिक विभाग अब खुद असमंजस में हैं कि आखिर इस आदेश का पालन कैसे किया जाए.

इसी बीच इस पूरे मामले में एक बेहद महत्वपूर्ण आवाज सामने आई है देश के वरिष्ठ फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ. डीके सतपथी की.

गैस त्रासदी के समय एक रात में किया था 876 शवों का पीएम

डॉ. सतपथी कोई सामान्य विशेषज्ञ नहीं हैं. वे भोपाल के मेडिको-लीगल इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक रह चुके हैं और 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के दौरान फॉरेंसिक जांच का नेतृत्व करने वाले प्रमुख विशेषज्ञों में शामिल थे. कहा जाता है कि गैस त्रासदी की उस भयावह रात उन्होंने और उनकी टीम ने एक ही रात में 876 शवों का पोस्टमॉर्टम किया था. बाद में उन्होंने मिथाइल आइसोसायनेट गैस के दीर्घकालिक और पीढ़ियों तक पड़ने वाले स्वास्थ्य प्रभावों पर भी महत्वपूर्ण अध्ययन किया. फॉरेंसिक विज्ञान की दुनिया में उनका नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है.

अब ट्विशा शर्मा मामले पर उनकी राय ने पूरे विवाद को नया आयाम दे दिया है.

अब क्या निकलकर आएगा?

डॉ. सतपथी का कहना है कि “परिजन दूसरी पोस्टमॉर्टम की मांग कर सकते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय कोर्ट का होता है. असली सवाल यह है कि अब नया क्या निकलकर आएगा? पहली पोस्टमॉर्टम की पूरी वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और मेडिकल रिकॉर्ड पहले से मौजूद हैं.”

डॉ सतपथी ने दिया ये सुझाव

उन्होंने सुझाव दिया कि दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने के बजाय देशभर के विशेषज्ञों की एक बड़ी मेडिकल कमेटी बनाई जानी चाहिए. इसमें चेन्नई, हैदराबाद, चंडीगढ़ और दिल्ली जैसे शहरों के विशेषज्ञ शामिल हों. यह समिति पहली पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा कर सकती है.

अगर पीएम होता है तो...

उन्होंने साफ कहा कि यदि दूसरी पोस्टमॉर्टम होती भी है तो दो ही संभावनाएं होंगी या तो पहली रिपोर्ट को सही ठहराया जाएगा, या फिर यदि कोई अतिरिक्त चोट है तो उसे नोट किया जाएगा. यानी या तो पहली रिपोर्ट की पुष्टि होगी या उसे गलत साबित किया जाएगा.

डॉ. सतपथी ने यह भी कहा कि उनकी जानकारी में फिलहाल मध्य प्रदेश में ऐसा कोई मॉर्च्युरी सिस्टम नहीं है, जहां माइनस 80 डिग्री तापमान पर शव को सुरक्षित रखा जा सके.

ट्विशा के परिवार ने लगाया ये आरोप

उधर, ट्विशा का परिवार लगातार जांच पर सवाल उठा रहा है. परिवार का आरोप है कि पोस्टमॉर्टम के दौरान जांच अधिकारी वह बेल्ट ही एम्स नहीं लेकर पहुंचे, जिससे कथित तौर पर ट्विशा ने फांसी लगाई थी. इसके कारण डॉक्टर गर्दन पर बने निशानों और कथित फंदे के बीच वैज्ञानिक मिलान नहीं कर सके. यही वजह है कि परिवार दूसरी पोस्टमॉर्टम और सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.

क्या है मामला

नोएडा की रहने वाली मॉडल ट्विशा का शव 12 मई को कटारा हिल्स स्थित उनकी ससुराल में फांसी पर लटका मिला था. उनकी शादी रिटायर्ड जज गिरीबाला सिंह के अधिवक्ता बेटे समर्थ सिंह से दिसंबर 2025 में हुई थी. दोनों का र‍िश्‍ता शादी डॉट कॉम के शुरू हुआ था. पुलिस ने ट्विशा के परिजनों की शिकायत पर सास गिरीबाला सिंह और बेटे समर्थ के खिलाफ दहेज मृत्यु और प्रताड़ना का मामला दर्ज किया है. ट्विशा का पति फिलहाल फरार चल रहा है, जबकि भोपाल पुलिस कमिश्नर ने समर्थ सिंह पर 30 हजार का इनाम घोषित किया है.

परिजन दोबारा पीएम की मांग कर रहे, अदालत ने किया इनकार

ट्विशा के माता-पिता शव का दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने की मांग कर रहे हैं. इसीलिए वह शव को मोर्च्युरी से नहीं ले रहे हैं. उनका कहना है कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर मौजूद चोट के निशानों को छिपाने की कोशिश की गई है. उन्हें आशंका थी कि ससुराल पक्ष के रसूख के कारण भोपाल में जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए वे शव को दिल्ली एम्स ले जाना चाहते थे. लेकिन अदालत ने केस डायरी और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद दोबारा ऑटोप्सी की मांग को कानूनी आधार पर खारिज कर दिया. वहीं, कोर्ट ने शव को सुरक्षित रखने का निर्देश दे दिया.

सीएम डॉ मोहन यादव से की मुलाकात

ट्विशा शर्मा के परिजनों ने बुधवार को मंत्रालय में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की. मुख्यमंत्री ने परिवार को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस संवेदनशील प्रकरण में परिवार की पूरी सहायता करेगी और मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई (CBI) को पत्र लिखेगी. दोबारा पोस्टमॉर्टम पर बोलते हुए सीएम ने साफ किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय न्यायालय ही करेगा. हालांकि, उन्होंने घोषणा की कि यदि परिजन चाहते हैं तो ट्विशा के पार्थिव शरीर को दिल्ली एम्स ले जाने के लिए राज्य सरकार परिवहन (गाड़ी) की पूरी सुविधा उपलब्ध कराएगी.

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