- Wildlife SOS एनजीओ के 2 कर्मचारी तस्करी में गिरफ्तार.
- एनजीओ के CEO कार्तिक सत्यनारायण को STSF का नोटिस.
- आरोपी NGO की गाड़ी से करते थे रेकी, शिवपुरी-मुरैना जंगल में मिले अवशेष और ट्रैप.
उत्तर प्रदेश के आगरा से गिरफ्तार हुए तेंदुआ की खाल के तस्करी कांड में नया मोड़ आया है. कुछ दिनों पहले गिरफ्तार हुए दो मुख्य तस्करों के बारे में पता चला है कि वह तेंदुए की खालों का सौदा करते थे और वह दिल्ली के एक बड़े वाइल्डलाइफ एनजीओ में काम करते हैं. अब एनजीओ के चीफ को मध्य प्रदेश स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने 17 अगस्त को तलब किया है.
इनमें से गिरफ्तार आरोपी भगवान सिंह उर्फ सलीम एक पुराना वाइल्डलाइफ तस्कर है, जो 11 अगस्त को गिरफ्त में आया है. बाद में 13 अगस्त को उसका साथी वसीम गिरफ्तार हुआ था. इस मामले में जांच एंजेंसियां जांच कर रही हैं और तस्करी की पूरी कड़ी जोड़ रही हैं.
ये है पूरा मामला
मामला 23 जुलाई का है, जब ग्वालियर-आगरा हाईवे पर यूपी पुलिस ने एक ढाबे के पास 10 तेंदुओं की खालों के साथ 4 शिकारियों को पकड़ा था. उस वक्त दिल्ली की संस्था वाइल्डलाइफ SOS ने क्रेडिट लिया था कि उसकी फॉरेस्ट वॉच टीम ने महीनों की निगरानी के बाद ये कार्रवाई यूपी पुलिस के साथ मिलकर करवाई है.

तस्करों से बरामद तेंदुओं की खालें मध्य प्रदेश के जंगलों की थी, इसलिए MP की स्टेट टाइगर टास्क फोर्स भी जांच कर रही थी. इसी जांच के दौरान पूरी कहानी पलट गई. STTF की टीम शिवपुरी और मुरैना के जंगलों में पहुंची, वहां कई जगहों पर तेंदुओं के अवशेष जमीन में गड़े मिले. तीन लोहे के फंदे वाले ट्रैप भी बरामद हुए. इन अवशेषों को देहरादून WII भेजा गया है, ताकि 23 जुलाई को मिली खालों से DNA मैच किया जा सके.
इसका अलावा जांच टीम को अवशेष वाले स्थानों पर वाइल्डलाइफ SOS एनजीओ की जीपों और जिप्सी के पहियों के निशान भी मिले, जिनका बिना रोक-टोक के लगातार आना जाना लगा रहता था. कड़ी से कड़ी मिलाते हुए टीम भगवान सिंह और वसीम तक पहुंच गई और दोनों को गिरफ्तार किया.
NGO कनेक्शन के जांच के दौरान मिले कुछ सबूत
जांच टीम को संभावना है कि दोनों आरोपी कम से कम 5 साल से वाइल्डलाइफ SOS में कार्यरत थे. आरोप है कि दोनों शिवपुरी-मुरैना के जंगलों में उसी NGO की गाड़ी में घूमकर रेकी करते थे और वह तेंदुओं को फंसाने के लिए हरियाणा से लाए गए ट्रैप लोकल शिकारियों को बांटते थे.
आरोपियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि 10 खालों को हाईवे तक पहुंचाने की योजना भी भगवान सिंह ने ही बनाई थी, ताकि एक फर्जी खरीदार को बेचा जा सके और फिर NGO उसे अपनी बड़ी कामयाबी के तौर पर दिखा सके. इसी बयान के आधार पर STTF ने वाइल्डलाइफ SOS के CEO कार्तिक सत्यनारायण को 17 अगस्त को शिवपुरी में जांच अधिकारी के सामने पेश होने का नोटिस जारी किया. इसके अलावा यह अभी पता चला है कि यह एनजीओ भोपाल वन विहार में भी काम करता है.
UP से पकड़े गए चार तस्कर तो हुआ खुलासा
एसटीएसएफ ने आगरा से चार तस्करों खुमानसिंह बारेला, रमेश उर्फ पप्पू बारेला, लखन बारेला और डूमसिंह बारेला को गिरफ्तार किया था. इनमें दो हरियाणा और दो एमपी के आरोपी थे. आरोपियों की निशानदेही पर जंगल से तेंदुए का कटा हुआ सिर, चारों पंजे, पूरी खाल और अन्य अवशेष बरामद किए गए. प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने तस्करों के पास से 10 तेंदुए की खालों को बरामद किया था. इससे पहले 7 शिकारी गिरफ्तारी हुए थे.
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