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इंदौर–दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट में तेजी, टीही सुरंग में फिनिशिंग का काम जारी; मार्च अंत तक ट्रायल रन का लक्ष्य

Indore-Dahod Railway Project: इंदौर-दाहोद रेल लाइन परियोजना का काम तेजी से चल रहा है और मार्च 2026 तक पूरा होने की संभावना है. इस परियोजना से इंदौर और मुंबई के बीच दूरी कम हो जाएगी और माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी.

इंदौर–दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट में तेजी, टीही सुरंग में फिनिशिंग का काम जारी; मार्च अंत तक ट्रायल रन का लक्ष्य

Indore-Dahod Rail Line Project: इंदौर–दाहोद रेल लाइन परियोजना का काम निर्णायक चरण में पहुंच गया है. पश्चिम रेलवे के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (निर्माण) विनीत गुप्ता और मुख्य इंजीनियर धीरज कुमार ने बुधवार को पीथमपुर होकर गुजर रहे रेल सेक्शन और टीही से धार के बीच निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने टनल (सुरंग), रेलवे स्टेशन निर्माण, ट्रैक बिछाने, आरओबी एवं तकनीकी कार्यों की प्रगति का जमीनी स्तर पर आकलन किया.

अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट में अब फिनिशिंग एवं तकनीकी कार्य तेजी से किए जा रहे हैं. इस दौरान मुख्य प्रशासनिक अधिकारी विनीत गुप्ता ने टीम को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शेष निर्माण व तकनीकी कार्य मार्च 2026 के अंत तक पूरे कर लिए जाएं, ताकि समय पर ट्रायल रन (Trial Run) कराया जा सके.

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उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट औद्योगिक और माल परिवहन के नजरिए से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित किया जाए.

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2.9 किमी लंबी सुरंग

मुख्य इंजीनियर धीरज कुमार ने बताया कि टीही (Tihi Rail Tunnel) में बन रही 2.9 किलोमीटर लंबी टनल में लगभग 2 किलोमीटर तक बैलेस्टलैस ट्रैक बिछाने का काम पूरा हो चुका है. बाकी हिस्से में ट्रैक बिछाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिफिकेशन और सिग्नलिंग का कार्य भी समानांतर रूप से चल रहा है.

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इलेक्ट्रिक लाइन में केबल लगाए जा रहे

टीही-पीथमपुर सेक्शन (Tihi-Pithampur Section) में ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइनों (Electric Railway Line) के लिए हुक लगाए जा चुके हैं और केबलिंग का काम भी प्रगति पर है. वहीं, सभी रेलवे ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है.

इंदौर में बैलेस्टलैस ट्रैक टनल (Tihi Railway Tunnel)

टीही टनल इंदौर क्षेत्र की पहली बैलेस्टलैस ट्रैक टनल (Ballastless Track Tunnel) है, जिसमें गिट्टी रहित आधुनिक ट्रैक तकनीक अपनाई जा रही है. इससे ट्रेन परिचालन अधिक सुचारू, सुरक्षित और मेंटेनेंस कम खर्चीला होगा. यह टनल पिछले छह वर्षों से निर्माणाधीन थी और वर्ष 2024 में सिविल कार्य पूरे हुए थे.

इन चार स्टेशनों का काम पूरा

प्रोजेक्ट के तहत धार, सागौर, पीथमपुर और गुनावद चार रेलवे स्टेशनों का निर्माण लगभग पूर्ण हो चुका है, जिनमें फिनिशिंग व प्लेटफॉर्म कार्य जारी हैं. सागौर स्टेशन (Sagour Railway Station) पर विशेष रूप से दो यात्री और एक मालगाड़ी प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, ताकि औद्योगिक माल ढुलाई को मजबूत किया जा सके.

इंदौर-मुंबई के बीच दूरी होगी कम

परियोजना के पूरा होने पर इंदौर–मुंबई रेल (Indore-Mumbai Train Corridor) दूरी 829 किमी से घटकर 774 किमी रह जाएगी, जिससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी. पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र (Pithampur Industrial Area) को विशेष लाभ मिलेगा और मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारू होगी. फिलहाल रेलवे टीम मार्च तक ट्रायल रन को लक्ष्य बनाकर कार्यों को पूर्ण करने में लगी है.

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