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इंदौर में डॉक्टरों ने 20 मिनट में एक किशोर को दी नई जिंदगी: 27 MM का दिल में था छेद, क्या है इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी?

Heart Hole Surgery: इस प्रक्रिया में पैरों की नसों के माध्यम से कैथेटर डालकर दिल तक पहुंचाया गया. फिर विशेष एएसडी डिवाइस और सेप्टल ऑक्लूडर लगाकर छेद को बंद किया गया. पूरी प्रक्रिया लगभग 20 मिनट में पूरी हो गई.

इंदौर में डॉक्टरों ने 20 मिनट में एक किशोर को दी नई जिंदगी: 27 MM का दिल में था छेद, क्या है इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी?

Heart Hole Surgery: आर्थिक तंगी से परेशन एक किसान परिवार के लिए उस वक्त उम्मीद की नई किरण जगी, जब डॉक्टरों ने 15 वर्षीय किशोर के दिल में मौजूद 27 एमएम बड़े दिल का छेद का इलाज कर नया जीवन दिया. डॉक्टरों ने इस जटिल सर्जरी को आधुनिक तकनीक से महज 20 मिनट में किया. फिलहाल किशोर की हालत में सुधार है और उसे जल्द डिस्चार्ज कर दिया जाएगा.

6 महीनों से बच्चे की हालत काफी गंभीर थी

यह मामला खंडवा जिले के एक गांव के रहने वाले 15 वर्षीय किशोर से जुड़ा हुआ है. किसान परिवार के 15 वर्षीय बेटे की हालत पिछले 6 महीनों से काफी गंभीर थी और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से वह परेशन था. उन्हें लगातर थकान, घबराहट, सांस फूलने और कमजोरी महसूस होती थी, पीछले दो महीनों में हालात इतनी बिगड़ी की कई बार वह अचानक बेहोश हो जाते थे.

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दिल में 27 MM का छेद था 

परिवार ने कई जगह इलाज करवाया, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण महंगा इलाज संभव नहीं हो सका, जिसके बाद किशोर को 15 मई को निजी एसपताल लाया गया है, जहां जांच में उसके दिल में 27 एमएम का बड़ा छेद मिला.

डॉक्टर ने बताया कि 'एट्रायल सेप्टअल डिफेक्ट' नमक जन्मजात हृदय रोग से बालक पीड़ित था और इस बीमारी में दिल के ऊपर ही दोनों चैंबर्स के बीच छेद होता है, जिससे शरीर में रक्त संचार प्रभावित होने लगता है.

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इस तकनीक से हुआ सर्जरी

डॉक्टर्स ने 16 मई को ओपन हार्ट सर्जरी की बजाय आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक से ऑपरेशन किया. इस प्रक्रिया में पैरों की नसों के मध्यम से केथेटर डालकर दिल तक पहुंचा जाता है... फिर विशेष एएसडी डिवाइस और सेपटल ओक्लूडर लगाकर क्षेत्र को बंद किया जाता है. पूरी प्रक्रिया लगभग 20 मिनट में पूरी हो गई.

डॉक्टर ने क्या कहा?

बाल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुदीप वर्मा ने बताया कि 15 वर्षीय एक बच्चे का हार्ट में होल था. जिसे बिना चीर फाड़ के आधुनिक तकनीक से सर्जरी किया गया. यह बीमारी जन्मजात होता है. किसी किसी बच्चों को जन्म के समय में पता चल जाता है, जबकि कई बच्चों में काफी समय बाद इसकी जानकारी लगती है.

क्या होता है इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी?

डॉक्टर सुदीप वर्मा के अनुसार, इस तकनीक में बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे मरीज जल्दी स्वस्थ होता है. साथ ही संक्रमण का खतरा भी काफी कम रहता है. 

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