विज्ञापन

इस साल यूपी में पंचायत का चुनाव हो पाएगा या नहीं, क्या कह रही हैं सरकार की तैयारियां

उत्तर प्रदेश सरकार की तैयारियों को देखते हुए लग नहीं रहा है कि इस साल पंचायत के चुनाव हो पाएंगे. प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है. इन त्रिस्तरीय पंचायतों के संचालन के लिए अब सरकार को वहां प्रशासक बिठाना होगा.

इस साल यूपी में पंचायत का चुनाव हो पाएगा या नहीं, क्या कह रही हैं सरकार की तैयारियां
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दी. इलाहाबाद हाई कोर्ट में अवमानना की कार्रवाई शुरू होने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया. इस आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण तय किया जाएगा.इसके बाद पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो सकेगा. जिसकी मांग प्रदेश ग्राम प्रधान पिछले काफी समय से कर रहे हैं. प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है. ऐसे में लग नहीं रहा है कि इस साल प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो पाएंगे, क्योंकि सरकार ने जिस आयोग का गठन किया है, उसका कार्यकाल ही छह महीने का है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद ही हो पाएं. 

ओबीसी आयोग कब सौंपेगा अपनी रिपोर्ट

प्रदेश के ग्राम प्रधानों के संगठन पिछले काफी समय से समय पर चुनाव कराने की मांग कर रहे थे. वो लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे थे और सरकार को ज्ञापन भेज रहे थे. लेकिन सरकार सकारात्मक रुख दिखाते हुए नजर नहीं आ रही थी. इसको लेकर अदालतों में भी कई याचिकाएं दाखिल की गईं.इसी तरह की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अप्रैल के अंतिम हफ्ते में इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच के न्यायमूर्ति सौरभ लावणिया ने पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को अवमानना ​​नोटिस जारी किया. अदालत ने पंचायत चुनाव के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग के गठन की समय सीमा पर  सफाई मांगी थी.इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई को होनी है.इसके बाद सरकार हरकत में आई और अगली सुनवाई से ठीक एक दिन पहले समर्पित ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी दी. इस आयोग का कार्यकाल छह महीने का होगा. आयोग की सिफारिशों के आधार पर ओबीसी आरक्षण दिया जाएगा. इस पर सरकार लोगों से आपत्तियां मांगेगी और उनका निस्तारण करेगी. यह प्रक्रिया भी समय लेगी. इसके बाद ग्राम प्रधानों, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्यों का आरक्षण तय होगा. 

उत्तर प्रदेश में कितनी ग्राम पंचायतें हैं

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायतों में 75 जिला पंचायत, जिला पंचायतों के तीन हजार 51 सदस्य, 826 क्षेत्र पंचायत और क्षेत्र पंचायत के 75 हजार 855 सदस्य और 57 हजार 695 ग्राम पंचायतें हैं. इनमें से जिला पंचायतों के तीन हजार 51 सदस्यों, क्षेत्र पंचायतों के 75 हजार 855 सदस्य (बीडीसी) और 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों का चुनाव होना है. इनका कार्यकाल 27 मई 2021 से शुरू हुआ था. यह 26 मई 2026 तक वैध है. इसे देखते हुए लगता है कि इस साल पंचायत चुनाव शायद ही हो पाएं. क्योंकि जब तक ओबीसी आरक्षण की तस्वीर साफ होगी तब तक प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी होंगी, जो अगले साल के शुरू में ही होने हैं. वहीं पंचायत चुनाव को कराने वाले कर्मचारी इन दिनों जनगणना के काम में लगे हुए हैं. 

Latest and Breaking News on NDTV

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की अंतिम मतदाता सूची का भी प्रकाशन अभी तक नहीं हुआ है. राज्य निर्वाचन आयोग ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन करने के लिए 10 जून की तारीख तय की है.आयोग ने पांचवीं बार यह तारीख बढाई थी.10 जून को भी प्रकाशन हो पाएगा या नहीं अभी यह भी तय नहीं है, क्योंकि प्रदेश में जनगणना के तहत मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का पहला चरण 22 मई से शुरू होकर 20 जून तक चलेगा. इसमें भी प्रदेश सरकार के कर्मचारी व्यस्त रहेंगे, ऐसे में मतदाता सूची का प्रकाशन एक बार फिर टलने की संभावना है. 

क्या नियुक्त किए जाएंगे प्रशासक

इस बीच ऐसी भी खबरें हैं कि पंचायती राज विभाग ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है, इसमें ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल बढ़ाने की बात कही गई. सरकार प्रशासक समिति गठित कर वर्तमान प्रधानों और अध्यक्षों को ही अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का विचार कर रही है.समय पर चुनाव न होता देख वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान इसकी मांग भी कर रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने सोमवार को लखनऊ में धरना भी दिया था. उनकी मांग है कि यदि समय पर चुनाव संभव नहीं हैं, तो मध्य प्रदेश और राजस्थान की तरह कार्यवाहक प्रशासक के जरिए ग्राम प्रधानों को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार  दिए जाएं.

ऐसे में लगता है कि अभी उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में जनगणना और विधानसभा चुनाव ऊपर हैं. इसलिए हो सकता है कि प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएं. उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ और विपक्षी दल भी नहीं चाहते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले पंचायतों के चुनाव कराए जाएं. 

ये भी पढ़ें: नैनीताल का सूखाताल पेट्रोल पंप भी सूख गया! ईंधन भरवाने आ रहे वाहनों के लिए लिमिट भी तय,जानिए वजह

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com