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'आवारा कुत्तों को अमीर से गरीब कॉलोनी में फेंक दिया जाता है'... सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बोलीं मेनका गांधी

Maneka Gandhi on Stray Dogs: पीपल फॉर एनीमल्स संगठन की अध्यक्ष मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एबीसी फ्रेमवर्क समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी है.

Stray Dogs Supreme Court: मेनका गांधी की आवारा कुत्तों के मामले में प्रतिक्रिया
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने आदेश में आवारा कुत्तों पर अपनी सख्त गाइडलाइन को बरकरार रखा है. इसमें आवारा कुत्तों की नसबंदी, वैक्सीनेशन  से लेकर उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर खाना न खिलाने पर रोक से लेकर पागल-बीमार कुत्तों को कानूनी दायरे में दया मृत्यु देने का आदेश शामिल है. पीपुल्स फॉर एनीमल्स संगठन अध्यक्ष और पशु कल्याण  से जुड़ीं पूर्व सांसद मेनका गांधी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आवारा कुत्तों के लिए बने एबीसी फ्रेमवर्क, शेल्टर होम जैसे किसी आदेश का पालन नहीं किया गया. अदालत ने कहा है कि अब किसी को दिक्कत है तो उसके पास हाईकोर्ट का दरवाजा खुला है.

कोर्ट ने स्कूल-कॉलेज, अस्पतालों से आवारा कुत्तों को हटाने और शेल्टर्स बनाने को कहा था, लेकिन सबने हाथ खड़े कर दिए. देश भर में 54 हजार कॉलेज हैं, लेकिन आवारा जानवरों वो बेबस नजर आए. रेलवे का कहना है कि उसके स्टेशनों पर हजारों यात्री आते हैं, हम क्या कर सकते हैं. अस्पताल ने भी वही बोला कि हर मरीज के साथ 10 तीमारदार आते हैं. दिल्ली समेत 780 जिलों में एक में भी शेल्टर नहीं बना. 

मेनका गांधी ने कहा, हमारा मानना है कि आवारा कुत्तों के लिए एबीसी सेंटर बनाओ, लेकिन तमीज से बनाओ, घटिया नहीं. तमाम रिश्तेदारों को ये सेंटर दे दिए गए. वो जानवरों को ठीक से नहीं रखते. ऑपरेशन करके आवारा कुत्तों को अमीर कालोनी से गरीब कालोनी में फेंक दिया जाता है. लेकिन कुत्ते किसको काटते हैं, ज्यादातर गरीब लोगों को. सोसायटी वाले, आरडब्ल्यूए चोरी से रात में उन्हें उठवाते हैं.इधर-उधर फेंकना बंद हो जाएगा तो सब कुछ ठीक से चलेगा. 

भयमुक्त जीवन जीने का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में भेजने के आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया है. अधिवक्ता विवेक शर्मा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने इसे जीवन जीने के अधिकार से जोड़ा है. स्कूल-कॉलेज, अस्पताल, सड़क, एयरपोर्ट या अन्य सभी सार्वजनिक स्थानों पर बिना किसी भय के बच्चे-बुजुर्ग वहां जा सकें. कुत्तों के काटने से हुई घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

अदालती आदेश में कहा गया है कि वैक्सीनेशन, नसबंदी जैसे कार्यक्रम में लगे या कुत्तों को पकड़ने के काम में लगे एमसीडी या अन्य एजेंसियों के कर्मचारियों को पूर्व पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया है. ऐसे कामों के दौरान उन पर कोई एफआईआर या कानूनी कार्यवाही नहीं होगी. 

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शर्मा ने कहा कि कोई भी बिना किसी डर (आवारा कुत्तों के काटने) पढ़ाई-लिखाई, कामकाज या अन्य किसी जरूरी काम के लिए जा सके. लोगों के अंदर सुरक्षा की भावना हो, यह राज्य सरकारों और एजेंसियों की जिम्मेदारी है. नगर निगम और अन्य एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि एबीसी कार्यक्रम को सही तरीके से लागू करें. 

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