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MP में गांजा तस्करी का "कॉर्पोरेट मॉडल"; उड़ीसा से चंबल तक फैला था कोड वर्ड वाला नेटवर्क, ऐसे हुआ खुलासा

Ganja Taskari: गिरोह के सदस्य आपस में बातचीत के लिए असली नामों की जगह ‘फाइनेंसर’, ‘डीलर’, ‘स्टोरकीपर’ और ‘सेल्समैन’ जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे. पूरी बातचीत व्हाट्सएप पर होती थी. माल की डिलीवरी पूरी होने के बाद भुगतान नकद की जगह फोन-पे के माध्यम से लिया जाता था, ताकि लेन-देन का रिकॉर्ड बना रहे और शक से बचा जा सके.

MP में गांजा तस्करी का "कॉर्पोरेट मॉडल"; उड़ीसा से चंबल तक फैला था कोड वर्ड वाला नेटवर्क, ऐसे हुआ खुलासा
Ganja Smuggling: MP में गांजा तस्करी का "कॉर्पोरेट मॉडल"; उड़ीसा से चंबल तक फैला था कोड वर्ड वाला नेटवर्क, ऐसे हुआ खुलासा

Ganja Taskari News: मध्य प्रदेश के भिंड जिले में गांजा तस्करी (Ganja Taskari) के एक संगठित और सुनियोजित गिरोह का पुलिस (MP Police) ने पर्दाफाश किया है. कार्रवाई के दौरान गिरोह के मास्टरमाइंड सहित तीन सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था. जबकि दो आरोपी फिलहाल फरार हैं. पुलिस ने इनके कब्जे से 22 किलो 200 ग्राम गांजा पकड़ा था. साथ ही एक कार को जप्त किया था. पुलिस जांच पड़ताल में सामने आया है कि यह गिरोह किसी कंपनी की तरह काम करता था, जहां मुनाफा, पूंजी, जिम्मेदारियां और हिस्सेदारी पहले से तय रहती थी. प्रस्तुत है भिंड से NDTV रिपोर्टर दिलीप सोनी की खबर.

Ganja Smuggling: भिंड पुलिस का एक्शन

Ganja Smuggling: भिंड पुलिस का एक्शन

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस के अनुसार, गांजा तस्करी का यह पूरा नेटवर्क चार हिस्सों में बंटा हुआ था—फाइनेंसर, मैनेजर, स्टोरकीपर और सेल्समैन. फाइनेंसर की भूमिका सबसे अहम थी, जो पूरे कारोबार में पूंजी लगाता था. उड़ीसा से करीब दो लाख रुपये में गांजा खरीदा जाता और भिंड में उसे बेचकर कुल कारोबार लगभग दस लाख रुपये तक पहुंच जाता था. इसमें से पांच लाख रुपये सीधे फाइनेंसर को मिलते, जबकि शेष पांच लाख रुपये नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों में बांटे जाते थे. मैनेजर, स्टोरकीपर और सेल्समैन को डेढ़-डेढ़ लाख रुपये दिए जाते, जबकि बची पचास हजार की राशि नेटवर्क संचालन, सुरक्षा और अन्य खर्चों में लगाई जाती थी.

Ganja Smuggling: गांजा

Ganja Smuggling: गांजा की तस्करी

जेल से खड़ा हुआ नेटवर्क

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बरोही निवासी दीपक शुक्ला, जो चार साल पहले जेल गया था, ने जेल में रहते हुए नशे के इस कारोबार को मजबूत किया. शुरुआत में वह गांजा पीकर छोटी पुड़िया बेचने का काम करता था. मेहगांव उप-जेल में रहते हुए उसने गांजे की सप्लाई का नेटवर्क खड़ा किया और जेल में ही बाहर से गांजे की पुड़िया मंगवाकर अन्य कैदियों को बेचना शुरू कर दिया. गतिविधियां सामने आने के बाद उसे सेंट्रल जेल ग्वालियर भेजा गया, जहां उसकी मुलाकात उड़ीसा के बड़े गांजा तस्करों से हुई. यहीं से सस्ते दामों पर गांजा खरीदने की डील तय हुई.

जमानत के बाद भिंड में फैलाया जाल

जमानत पर बाहर आने के बाद पंकज शुक्ला ने इसी जेल में बने तस्करी नेटवर्क को भिंड में सक्रिय किया. उसने दोगुने मुनाफे का लालच देकर गांव के भोलू दंडौतिया को फाइनेंसर के रूप में तैयार किया. इसके बाद भरोसेमंद परिचित राजेन्द्र बघेल और आर्य नगर निवासी मजनू उर्फ शिवम शर्मा को सप्लायर के रूप में जोड़ा गया.

कोड वर्ड और डिजिटल लेन-देन

पुलिस की सख्ती से बचने के लिए गिरोह गांजा सीधे अपने पास नहीं रखता था. सोई गांव निवासी राजकुमार शर्मा के घर गांजे का स्टोरेज किया जाता था. गिरोह के सदस्य आपस में बातचीत के लिए असली नामों की जगह ‘फाइनेंसर', ‘डीलर', ‘स्टोरकीपर' और ‘सेल्समैन' जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे. पूरी बातचीत व्हाट्सएप पर होती थी. माल की डिलीवरी पूरी होने के बाद भुगतान नकद की जगह फोन-पे के माध्यम से लिया जाता था, ताकि लेन-देन का रिकॉर्ड बना रहे और शक से बचा जा सके.

उड़ीसा से 5 हजार, भिंड में 25 हजार प्रति किलो 

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह 50 किलो से लेकर एक क्विंटल तक गांजा एक साथ मंगवाता था. चेकिंग से बचने के लिए गांजे को कपड़े के बैग में नीचे रखा जाता और ऊपर कपड़े भर दिए जाते थे. गांजा उड़ीसा से करीब 5 हजार रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाता और भिंड व आसपास के इलाकों में 20 से 25 हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाता था. भिंड शहर में सप्लाई की जिम्मेदारी मजनू उर्फ शिवम शर्मा की थी, जबकि देहात क्षेत्र की कमान राजेन्द्र बघेल संभालता था. गिरोह की गतिविधियां इटावा और मुरैना जिले की पोरसा तहसील तक फैली हुई थीं.

कार से तस्करी, संपत्तियों की जांच तेज

जांच में यह भी सामने आया कि राजेन्द्र बघेल ने गांजा तस्करी से अर्जित रकम से करीब 12 लाख रुपये की हुंडई कार खरीदी थी, जिसका इस्तेमाल कई बार उड़ीसा से गांजा लाने में किया गया. कुछ महीने पहले पुलिस ने राजेन्द्र बघेल की पत्नी को भी इस मामले में आरोपी बनाया था. अब जांच एजेंसियां गांजा कारोबार से जुड़ी अन्य चल-अचल संपत्तियों की जानकारी जुटा रही हैं.

22 किलो गांजा बरामद, तीन जेल भेजे

कुछ दिन पहले बरोही थाना पुलिस को मदनपुरा गांव के पास एक संदिग्ध हुंडई कार के घूमने की सूचना मिली थी. पुलिस ने घेराबंदी कर कार को पकड़ा और तलाशी के दौरान 22 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद किया. कार सवार राजेन्द्र बघेल, पंकज शुक्ला और राजकुमार शर्मा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कर जेल भेज दिया गया है. गिरोह के दो आरोपी—भोलू दंडौतिया और मजनू उर्फ शिवम शर्मा—अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा लगातार की जा रही है.

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