उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की परिक्षाएं निरस्त होने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा निरस्त करने का फैसला लिया. इससे पहले आयोग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को स्थगित करने का फैसला किया था. वहीं टीजीटी-पीजीटी की परीक्षा भी कई बार स्थगित होने के बाद अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि यह परीक्षा फिर कब आयोजित की जाएगी. इस तरह से परीक्षाएं स्थगित होने, रद्द होने और पेपर लीक से प्रदेश के युवा परेशान हैं. इससे प्रदेश के युवाओं में बेचैनी बढ़ती जा रही है. विधानसभा चुनाव से पहले युवाओं की यह चिंता प्रदेश की योगी सरकार को संकट में डाल सकती है.
असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती परीक्षा निरस्त
योगी सरकार ने 33 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के 910 पदों के लिए हुई परीक्षा निरस्त कर दी. यह परीक्षा बीते साल 16-17 नवंबर को प्रदेश के 52 केंद्रों पर परीक्षा हुई थी. उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने चार सितंबर को इस परीक्षा के नतीजे घोषित किए थे. इसका इंटरव्यू होना बाकी था. इस परीक्षा में उत्तर प्रदेश पुलिस की एटीएस को धांधली और अवैध धन वसूली का पता चला था. एसटीएफ ने आउटसोर्स कंपनी के एक कर्मचारी को गिरफ्तार किया था. इसके बाद सीएम योगी ने इस मामले की जांच के आदेश दिए थे. परीक्षा रद्द करने के बाद सीएम योगी ने आयोग को जल्द परीक्षा कराए जाने का निर्देश दिया है.
इससे पहले आयोग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) भी स्थगित कर दी थी. यह परीक्षा 28 और 29 जनवरी को प्रस्तावित थी. करीब चार साल के इंतजार के बाद यह परीक्षा आयोजित की जा रही थी. इस परीक्षा के लिए 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था. यह परीक्षा कब आयोजित की जाएगी. इसको लेकर आयोग ने अभी तक कोई जानकारी नहीं दी है.
कब होगी टीजीटी-पीजीटी की परीक्षा
इससे पहले आयोग ने नवंबर 2025 में होने वाली प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (पीजीटी) शिक्षक की भर्ती परीक्षा भी स्थगित कर दी थी. यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग यह परीक्षा 18 और 19 दिसंबर 2025 को आयोजित करने वाला था. इससे पहले भी यह परीक्षा कई बार स्थगित की जा चुकी है. टीजीटी के 3539 और पीजीटी के 624 पदों के लिए विज्ञापन 2022 में आया था. इन दोनों परीक्षाओं के लिए 13 लाख 33 हजार 136 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है. यह परीक्षा कई बार प्रस्तावित हुई लेकिन अलग-अलग कारणों से स्थगित कर दी गई. हालत यह है कि 2025 में यह परीक्षा चार बार स्थगित की गई. आयोग ने टीजीटी परीक्षा आयोजन की तिथि चार, पांच अप्रैल 2025 प्रस्तावित की थी. लेकिन उस तारीख पर भी परीक्षा नहीं हो पाई. इसके बाद 14-15 मई को नई तारीख दी गई. इस तारीख पर भी परीक्षा हुई. बाद में आयोग ने 21-22 जुलाई को परीक्षा प्रस्तावित की, लेकिन हो नहीं हो पाई. बाद में आयोग ने परीक्षा 18 और 19 दिसंबर के लिए प्रस्तावित की. लेकिन इससे पहले ही शिक्षा सेवा चयन आयोग की अध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति पाण्डेय ने 22 सितंबर को त्यागपत्र दे दिया. इससे परीक्षा एक बार फिर स्थगित कर दी गई.

योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का प्रमुख बनाया है.
क्या प्रशांत कुमार आयोग को पटरी पर ला पाएंगे
परीक्षाओं की यह हालत देख उत्तर प्रदेश सरकार ने कड़ा रुख अपनाया. प्रदेश सरकार ने यूपी पुलिस के पूर्व प्रमुख प्रशांत कुमार को यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष बनाया है. उन्होंने बीते साल 19 दिसंबर को अपना कार्यभार भी संभाल लिया. इसके बाद से आयोग दो परीक्षाएं निरस्त कर चुका है. इसके बाद कई दौर की बैठकों की बाद भी आयोग लंबित परीक्षाओं के लिए किसी नई तारीखों का ऐलान नहीं कर सका है. आयोग की एक बैठक मंगलवार को भी आयोजित की गई थी. इसमें भी टीईटी और टीजीटी-पीजीटी की परीक्षाओं की नई तारीखों का ऐलान नहीं कर सका है. आयोग का कहना है कि अब परीक्षा कराने वाली एजेंसियों के साथ किए गए समझौतों की समीक्षा की जाएगी. इसके साथ ही आयोग भर्ती के अलग-अलग चरणों की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करेगा. इसके बाद ही लंबित परीक्षाओं की नई तिथियां घोषित की जाएंगी.
उत्तर प्रदेश में यह हाल केवल यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग का ही नहीं है. उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीसीएस) का भी हाल बहुत अच्छा नहीं रहा. उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा-2024 चार बार स्थगित हुई थी. पहले यह परीक्षा मार्च 2024 में होनी थी. लेकिन चार बार स्थगित होने के बाद दिसंबर 2024 में जाकर यह परीक्षा हो पाई थी. इसका परिणाम फरवरी 2025 में जारी किया गया था.
यूपी में परीक्षा का पेपर लीक
यह तो हुई स्थगित हुई परीक्षाओं की बात. लेकिन उत्तर प्रदेश में परीक्षाएं केवल स्थगित भर नहीं हुई है. साल 2021 से यूपी में पांच बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक भी हुए हैं. साल 2021 के नवंबर में होने वाली टीईटी का पेपर लीक हो गया था. इसके बाद यह परीक्षा स्थगित कर दी गई थी. यूपी पुलिस की एसटीएफ ने टीईटी पेपर लीक मामले में 26 लोगों गिरफ्तार किया था. इसके अगले सात 30 मार्च 2022 को यूपी बोर्ड की 12वीं का अंग्रेजी का पेपर लीक हो गया था. इस वजह से बोर्ड ने 24 जिलों में परीक्षा स्थगित कर दी थी. इसके दो साल बाद 2024 में उत्तर प्रदेश पुलिस में 67 हजार कॉन्स्टेबलों की भर्ती के लिए फरवरी 2024 में ली गई परीक्षा का पेपर भी लीक हो गया. उसी साल उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की आरओ/एआरओ की भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हो गया. फरवरी 2024 में होने वाली परीक्षा का पेपर सोशल मीडिया पर आ गया. इस वजह से परीक्षा स्थगित करनी पड़ी. बीते साल मार्च में हुई यूपी बोर्ड की मार्च में हुई परीक्षा में हाई स्कूल के गणित का पेपर लीक हो गया. दरअसल एटा के एक इंटर कॉलेज में बने परीक्षा केंद्र के व्यवस्थापक ने प्रश्न पत्र को ऑफिशियल एग्जामिनेशन वॉट्सऐप ग्रुप में डाल दिया था.

यूपी पीसीएस की प्री परीक्षा 2024 में चार बार स्थगित हुई थी.
ऐसा नहीं है कि पेपर लीक और परीक्षा में देरी केवल योगी आदित्यानाथ सरकार में ही हुई है. इससे पहले की सरकारों में भी ऐसा होता रहा है. साल 2014 में उत्तर प्रदेश संयुक्त प्री-मेडिकल टेस्ट (यूपीसीपीएमटी) का पेपर लीक हुआ था. इस परीक्षा के प्रश्न पत्रों के सीलबंद बॉक्सों से छेड़खानी हुई थी. इस वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी. वहीं 2015 में यूपीपीसीएस प्री का व्हाट्सएप पर बिक रहा था. इसकी वजह से परीक्षा रद्द करानी पड़ी थी.
ऐसे में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने प्रतियोगी परीक्षाओं का त्रुटिपूर्ण आयोजन एक बड़ी चुनौती है, खासकर तब जब एक साल बाद ही उसे विधानसभा चुनाव का सामना करना है. उम्मीद की जा रही है कि सरकार विधानसभा चुवान से पहले युवाओं को बड़े पैमाने पर सरकार नौकरी देने का प्रयास करे. योगी सरकार ने पुलिस कांस्टेबल की 30 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की अधिसूचना निकालकर इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है. ऐसे में सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी होगी इस तरह परीक्षाएं निरस्त न करनी पड़ें और न ही परीक्षा का पेपर लीक हो. इसके साथ ही सरकार के सामने परीक्षाओं की उनके घोषित कैलेंडर के मुताबिक कराना भी एक बड़ी चुनौती होगी.
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