Farmer Success Story: कभी सूखा और मौसम की मार झेलने वाला बुंदेलखंड में किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ नई फसलों को अपनाकर अच्छी आमदनी के रास्ते तलाश रहे हैं. सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य केसली अंचल के प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध सिंह ने भी ऐसा ही नवाचार कर क्षेत्र के किसानों के सामने एक नई मिसाल पेश की है. उन्होंने पहले ही साल में ऐसी फसल तैयार की कि आसपास के किसान इसे देखने खेत तक पहुंच रहे हैं. दरअसल, उनकी मेहनत और लगन से अब बुंदेलखंड की माटी में चिया सीड्स जैसी महंगी और पौष्टिक फसल लहलहा रही है.
कोरोना में बदली जिंदगी की दिशा
किसान अनिरुद्ध सिंह साल 2012 में सागर छोड़कर इंदौर चले गए थे और वहां सक्सेस अकैडमी के नाम से कोचिंग क्लास चलाते थे. इससे उन्हें हर साल करीब 25 से 30 लाख रुपये तक की बचत हो जाती थी, लेकिन 2020 में कोविड के दौरान उन्हें गांव वापस लौटना पड़ा. खाली समय में उन्होंने अपने फार्महाउस पर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की. इसके बाद उन्होंने इंदौर में संचालित अपनी कोचिंग बंद कर दी और पैतृक खेतों में चिया सीड्स की खेती शुरू कर दी. यह फैसला उनके लिए बेहद लाभदायक साबित हुआ और आज उन्हें इस खेती से अच्छा मुनाफा हो रहा है.
डेढ़ एकड़ भूमि में चिया सीड्स की खेती
प्रगतिशील किसान अनिरुद्ध सिंह ने इस वर्ष अपने श्री किसान फार्म हाउस पर करीब डेढ़ एकड़ भूमि में चिया सीड्स की बुवाई की है. यह फसल देखने में भले ही छोटी लगे, लेकिन इसकी बाजार में काफी अधिक मांग है. चिया सीड्स को दुनिया भर में 'सुपर फूड' के रूप में जाना जाता है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यही कारण है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग इसे अपने आहार में तेजी से शामिल कर रहे हैं.

विशेषज्ञों के अनुसार चिया सीड्स का नियमित सेवन हृदय को स्वस्थ रखने, पाचन तंत्र को मजबूत बनाने, वजन नियंत्रित करने और ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखने में मददगार माना जाता है. इसके अलावा यह त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी बताया जाता है, जिसके कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.
कोरोना में बदली जिंदगी की दिशा
किसान अनिरुद्ध सिंह बताते हैं कि चिया सीड्स की खेती कम पानी में भी आसानी से की जा सकती है, जो बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र के लिए काफी उपयुक्त है. उनके अनुसार, एक एकड़ खेत में करीब ढाई किलो बीज की बुवाई करने पर औसतन 6 से 7 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हो जाता है. बाजार में इसकी कीमत 25 हजार से 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाती है. इस हिसाब से किसान कम लागत में अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं.
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अनिरुद्ध सिंह का कहना है कि वे अपने फार्म पर तैयार होने वाली अधिकांश उपज का ऑनलाइन विक्रय भी करते हैं, जिससे उन्हें देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने का मौका मिलता है और बेहतर दाम मिल पाते हैं.
नई फसलों को अपनाने की प्रेरणा
अनिरुद्ध सिंह केवल चिया सीड्स की खेती तक ही सीमित नहीं हैं. उन्होंने सागर जिले में सबसे पहले स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत भी की थी. अपने फार्म हाउस पर वे अब तक करीब 45 प्रकार की अलग-अलग फसलों की खेती कर चुके हैं. उनका मानना है कि यदि किसान नई तकनीक और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाएं तो बुंदेलखंड की खेती भी समृद्ध और लाभकारी बन सकती है. आज उनके इस प्रयोग को देखकर क्षेत्र के कई किसान भी चिया सीड्स और अन्य वैकल्पिक फसलों की खेती की ओर रुचि दिखा रहे हैं. अनिरुद्ध सिंह की यह पहल न केवल खेती को लाभ का धंधा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि बुंदेलखंड के किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण भी बनती जा रही है.
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