- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची 10 दिनों से लापता थी, जिसे सकुशल बरामद किया गया.
- परिजन ने एएसपी केबी सिंह पर बच्ची को अपने पास रखने और दबाव बनाने के गंभीर आरोप लगाए हैं.
- बच्ची एएसपी के घर पर बच्चों की देखरेख का काम करती थी और शराब के नशे में दुर्व्यवहार का आरोप है.
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अंडा थाना क्षेत्र से 10 दिनों से लापता 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची की बरामदगी के बाद पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया है. बच्ची के परिजनों ने राजनांदगांव की 8वीं बटालियन में पदस्थ एडिशनल एसपी (एएसपी) केबी सिंह पर बच्ची को अपने पास रखने, दबाव बनाने और दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं.
मामला तब और संवेदनशील हो गया, जब पुलिस कार्रवाई तेज होने और एएसपी की रिश्तेदार के हिरासत में लिए जाने के बाद एएसपी खुद बच्ची को लेकर कंट्रोल रूम पहुंच गया. अब इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका, जांच की दिशा और आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.
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10 दिन से लापता थी नाबालिग
अंडा थाना क्षेत्र की 17 वर्षीय नाबालिग बच्ची 30 अगस्त से लापता थी. परिजनों के मुताबिक वह घर से स्कूटी लेकर निकली थी, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटी. बच्ची की गुमशुदगी के बाद परिवार लगातार उसकी तलाश में जुटा रहा, जबकि पुलिस भी मामले की जांच कर रही थी. आखिरकार 10 दिन बाद बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया.
एएसपी के घर काम करती थी बच्ची
परिजनों ने बताया कि उनकी बेटी पिछले सात से आठ महीनों से भिलाई के तालपुरी क्षेत्र स्थित एएसपी केबी सिंह के घर पर बच्चों की देखरेख का काम करती थी. परिवार का आरोप है कि अधिकारी शराब के नशे में बच्ची के साथ अशोभनीय व्यवहार करते थे. इन परिस्थितियों से परेशान होकर बच्ची ने नौकरी छोड़ दी थी और वापस अपने घर आ गई थी.
काम पर लौटने का बनाया जा रहा था दबाव
परिवार का दावा है कि नौकरी छोड़ने के बाद भी एएसपी और उनकी पत्नी लगातार बच्ची पर वापस काम पर आने का दबाव बना रहे थे. परिजनों के अनुसार, बार-बार आने वाले कॉल और कथित धमकियों से परेशान होकर बच्ची ने उनके नंबर तक ब्लॉक कर दिए थे. इसके कुछ समय बाद ही वह अचानक लापता हो गई.
जांच के दौरान बढ़ा संदेह
गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के बाद परिजनों को एएसपी की ओर से फोन आने की बात कही. आरोप है कि उन्होंने बताया कि बच्ची घर वापस नहीं आना चाहती. इतना ही नहीं, परिवार पर कोर्ट में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर बच्ची को उनके पास छोड़ने का दबाव भी बनाया गया. इस घटनाक्रम के बाद परिजनों का संदेह और गहरा गया.
एसडीओपी के सामने भी हुआ विवाद
शक बढ़ने पर परिजन पाटन एसडीओपी प्रांशु तिवारी के साथ एएसपी के निवास पर पहुंचे. परिजनों का आरोप है कि वहां जांच के दौरान एएसपी ने अपने वरिष्ठ पद का प्रभाव दिखाया और परिवार के साथ अभद्र व्यवहार किया. इसके बाद मामला दुर्ग पुलिस अधीक्षक तक पहुंचा, जहां वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप करते हुए जांच को आगे बढ़ाया.
साली पर भी लगा जांच में बाधा डालने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि लापता बच्ची को भिलाई के एक अस्पताल में एएसपी की साली डॉ. झरना राणा उर्फ स्वीटी के साथ देखा गया था. पुलिस जब पूछताछ के लिए उनके घर पहुंची तो वहां हंगामे की स्थिति बन गई. आरोप है कि महिला ने खुद पर मिट्टी का तेल डालने की कोशिश की और कार्रवाई के दौरान एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ झूमाझटकी भी की. बाद में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया.
बच्ची को लेकर कंट्रोल रूम पहुंचा एएसपी
पुलिस कार्रवाई के कुछ समय बाद ही एएसपी केबी सिंह नाबालिग बच्ची को लेकर सीधे कंट्रोल रूम पहुंच गए. बताया जा रहा है कि रात में काफी देर तक कंट्रोल रूम में इस मामले को लेकर हलचल बनी रही. इसके बाद बच्ची को पुलिस संरक्षण में लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई.
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