मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के मामले में कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह की सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणी को लेकर विवाद गहरा गया है. इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दिग्विजय सिंह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्यायपालिका की गरिमा के खिलाफ बताया है. उन्होंने इस संबंध में भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र भेजकर दिग्विजय सिंह के खिलाफ अदालत की अवमानना का प्रकरण दर्ज करने की मांग की है. उधर, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने महापौर के कदम का 'स्वागत' किया.
मेयर ने एसजी को सबूत में क्या-क्या भेजा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट व इंदौर महापौर भार्गव के अनुसार, उन्होंने दिग्विजय सिंह के बयान की पेनड्राइव, भाषण की प्रतिलिपि और अन्य संबंधित दस्तावेज सॉलिसिटर जनरल को भेजे हैं. उनका आरोप है कि दिग्विजय सिंह ने सोच-समझकर सुप्रीम कोर्ट के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की, जो सीधे तौर पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आती है. उन्होंने कहा कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट की धारा 15 के तहत ऐसे मामलों में सॉलिसिटर जनरल की सहमति आवश्यक होती है, इसलिए उन्होंने विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की मांग की है.
भार्गव ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि नामांकन निरस्तीकरण के मामले में पार्टी समय रहते कानूनी कदम उठाने में विफल रही. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास वरिष्ठ वकीलों की पूरी टीम होने के बावजूद उचित समय पर याचिका दायर नहीं की गई. महापौर ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को तकनीकी आधार पर नहीं, बल्कि चुनाव संबंधी स्थापित कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए खारिज किया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि दिग्विजय सिंह के बयान पर संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई होगी.
पूर्व सीएम ने क्या कहा?
न्यूज एजेंसी भाषा के अनुसार, दिग्विजय सिंह के कार्यालय ने बयान जारी कर बताया कि पूर्व सीएम ने भार्गव से फोन पर बात भी की और इस मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पत्र लिखने के लिए उनका धन्यवाद किया. दिग्विजय सिंह ने कहा कि इससे उन्हें अदालत के सामने अपने दलील रखने का मौका मिलेगा.
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