President Murmu Mamata Banerjee Controversy: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कथित अपमान को लेकर गहरी नाराजगी जताई है. सीएम ने मांग की है कि ममता बनर्जी देश और राष्ट्रपति से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें. विष्णुदेव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पत्र की प्रति साझा करते हुए लिखा कि उन्हें दूसरी बार यह पत्र बड़े दुख के साथ लिखना पड़ रहा है. पत्र में उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं हमेशा सम्मानित रही हैं और मतभेद को कभी मनभेद में नहीं बदला गया है.

President Murmu Mamata Banerjee Controversy: सीएम साय का पत्र
पत्र में क्या लिखा?
साय ने लिखा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ हाल ही में हुए व्यवहार ने इन परंपराओं को ठेस पहुंचाई है. उनका कहना है कि महिला दिवस से पहले इस तरह की घटना होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है, विशेषकर तब जब इस टिप्पणी के लिए एक महिला मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.
“राष्ट्रपति को अपनी व्यथा सार्वजनिक करनी पड़ी”
पत्र में साय ने कहा कि यह पहली बार हुआ है जब किसी राज्य सरकार के विरुद्ध राष्ट्रपति को अपनी व्यथा सार्वजनिक करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की ‘भद्र लोक' संस्कृति दुनिया भर में चर्चित रही है, मगर इस घटना से राज्य की छवि धूमिल हुई है. साय ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान न्यूनतम शिष्टाचार का भी पालन नहीं किया गया. जनजातीय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम का स्थान मनमाने ढंग से बदल दिया गया और राष्ट्रपति को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया.
आदिवासी समाज के अपमान की बात भी उठाई
मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी कहा कि यह केवल राष्ट्रपति का ही नहीं, बल्कि देशभर के करोड़ों आदिवासियों, पिछड़ों और दलितों के सम्मान का भी प्रश्न है. उन्होंने इसे ‘मातृशक्ति का अपमान' भी बताया. साय ने संदेशखली कांड का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां जनजातीय समाज की महिलाओं के साथ हुए अपराधों पर भी ममता बनर्जी ने आवश्यक कदम नहीं उठाए. उन्होंने सवाल पूछा “आखिर जनजातीय समाज ने आपका क्या बिगाड़ा है?”
“देश-समाज और राष्ट्रपति से क्षमा मांगें”
साय ने ममता बनर्जी से आग्रह किया कि वे सच्चे मन से देश, समाज और राष्ट्रपति से क्षमा मांगें तथा भविष्य में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति स्वस्थ आचरण का आश्वासन दें. उन्होंने कहा कि ऐसा करना ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि के लिए भी उपयोगी होगा.
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