- ओरछा पहुंचे सीएम ने महल को सूर्य मंदिर कहा, नाम बदलने के दिए संकेत.
- इतिहास कहता है वीर सिंह ने जहांगीर के सम्मान में बनवाया महल.
- सरकारी पर्यटन पोर्टल पर भी जहांगीर आगमन का उल्लेख मौजूद.
Jahangir Mahal Vivad: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के जहांगीर को लेकर दिए बयान के बाद इतिहास पर बहस छिड़ गई है. ओरछा दौरे पर जब जहांगीर महल का दौरा किया तो उन्होंने कहा कि ओरछा में रामराज लोक के बनने के बाद यहां पर श्रद्धालुओं का बढ़ना और धार्मिक केंद्र बनना वाकई यह अद्भुत है. जहांगीर महल का नाम बदलने को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि जहांगीर यहां कभी आया ही नहीं था. महल तो राजा वीर सिंह ने बनवाया था, जिसे सूर्यदेव मंदिर कहते हैं.
मुख्यमंत्री के इस बयान के सामने आने के बाद अब राज्य में ओरछा के महलों के नामकरण और उनके इतिहास को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है. सीएम के बयान पर कांग्रेस का भी बयान सामने आया है.

क्या है फिर इतिहास?
बुंदेलखंड की धरती पर स्थित ओरछा का जहांगीर महल एक ऐतिहासिक है. इसे बुंदेला शासक वीर सिंह देव और मुगल बादशाह जहांगीर के रिश्तों से जोड़कर देखा जाता है. इतिहास के अनुसार, वीर सिंह देव और मुगल शहजादे सलीम यानी जहांगीर के बीच राजनीतिक संबंध थे. 1602 में अबु फजल की हत्या के बाद दोनों के रिश्ते और मजबूत हुए. 1605 में सलीम जहांगीर के नाम से मुगल बादशाह बने और वीर सिंह देव ओरछा के शासक.
यहीं से जहांगीर महल की कहानी शुरू होती है. सरकारी पर्यटन सामग्री में दर्ज विवरणों के अनुसार, वीर सिंह देव ने जहांगीर के ओरछा आगमन की याद में इस महल का निर्माण कराया. भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल इन्क्रेडिबल इंडिया पर भी जहांगीर के ओरछा आने और वीर सिंह द्वारा उनके सम्मान में महल बनवाने का उल्लेख है.

महल में बुंदेली और मुगल शैली
महल में बुंदेली और मुगल शैली का मेल देखने को मिलता है. महल में विशाल प्रवेश द्वार, गुंबद, छतरियां, झरोखे और बहुमंजिला संरचना भी मौजूद है. इमारत उस दौर की स्थापत्य शैली को दिखाती है, जब बुंदेला और मुगल के बीच राजनीतिक रिश्ते भी और टकराव भी.

बुंदेलखंड सिर्फ पत्थरों से बनी इमारत नहीं, बुंदेलखंड की राजनीति का भी प्रतीक है, जहां रिश्ते सत्ता की दिशा तय करते थे. वीर सिंह देव और जहांगीर के रिश्ते हों या फिर मुगल और बुंदेला राजाओं के बीच बदलते समीकरण, ओरछा का इतिहास कई परतों में दर्ज है.

सीएम ने क्या कहा था
सीएम ने अब इस पर सवाल उठाए हैं. ओरछा दौरे के दौरान रविवार को सीएम ने कहा था, "जहांगीर महल को राजा वीर सिंह देव ने बनवाया था और इसे सूर्य मंदिर कहते हैं. जहांगीर कभी ओरछा आए ही नहीं थे. मेरा इस पर ज्यादा बोलना ठीक नहीं है."
सीएम के बयान ने अब इतिहास की नई परत खोल दी है. सीएम का दावा है कि जहांगीर ओरछा आए नहीं और महल का नाम बदला जाना चाहिए.
कांग्रेस का आया बयान
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आनंद जाट ने कहा कि मुख्यमंत्री जी आपको इसलिए नहीं चुना कि आप गड़े मुर्दे उखाड़ें, इधर-उधर झूठे इतिहास के तथ्य प्रस्तुत करें. आपको प्रदेश, किसान, छात्र, युवाओं के कल्याण के लिए चुना है. जिस तरह से हाल ही में युवाओं ने केंद्रीय मंत्री को सबक सिखाया है, आप इधर उधर की बात करेंगे तो आपकी भी बारी आ जाएगी.
निवाड़ी पहुंचे थे सीएम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को अपने निवाड़ी जिले दौरे के दौरान सबसे पहले पर्यटन नगरी ओरछा पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध जहांगीर महल का भ्रमण किया. इस दौरान मुख्यमंत्री ने महल की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं की जानकारी ली तथा इसकी समृद्ध विरासत का अवलोकन किया. जहांगीर महल के भ्रमण के बाद मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम मन की बात को सुना. मन की बात कार्यक्रम सुनने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे रामराजा सरकार मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने विधि-विधान से दर्शन-पूजन कर प्रदेश की खुशहाली, विकास और जनकल्याण की कामना की. चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि रामराजा सरकार से प्रदेश की जनता की खुशहाली की कामना की.
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