विज्ञापन

छोटा कदम, बड़ा कमाल: कोरिया का 5% मॉडल बना जल संकट का सबसे बड़ा हल, PM मोदी भी कर चुके तारीफ

किसानों ने स्वेच्छा से अपनी 5 प्रतिशत भूमि जल संरक्षण के लिए दी. इस जमीनों पर सोख्ता गड्ढे और डबरियां बनाकर वर्षा जल को रोका जा रहा है. हालांकि इसका प्रभाव भी देखने को मिल रहा है. दरअसल, भूजल स्तर में करीब 5.41 मीटर तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है.

छोटा कदम, बड़ा कमाल: कोरिया का 5% मॉडल बना जल संकट का सबसे बड़ा हल, PM मोदी भी कर चुके तारीफ

Korea Water Conservation Model: छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला से शुरू हुआ 5% जल संरक्षण मॉडल आज पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है. छत्तीसगढ़ के इस आदिवासी बहुल जिले में शुरू हुई यह पहल अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है, जिसकी सराहना खुद नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यक्रम मन की बात में भी पिछले महीने कर चुके है.

किसानों ने जल संरक्षण के लिए दी अपनी भूमि

आवा पानी झोंकी (गांव का पानी गांव में) और मोर गांव मोर पानी जैसे अभियानों के तहत किसानों ने स्वेच्छा से अपनी 5 प्रतिशत भूमि जल संरक्षण संरचनाओं के लिए समर्पित की है, जहां सोख्ता गड्ढे और डबरियां बनाकर वर्षा जल को खेतों में ही रोका जा रहा है. इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य कैच द रेन की अवधारणा को जमीन पर उतारना है, ताकि बारिश का पानी बहकर न जाए, बल्कि वहीं जमीन में समा कर भूजल स्तर को बढ़ाए.

Korea Water Conservation Model:

Korea Water Conservation Model: किसानों ने खेतों के कोनों में सीढ़ीनुमा सोख्ता गड्ढे बनाए. इससे बरसात का पानी रुकने लगा और जमीन में तेजी से समाने लगा.

भूजल स्तर में वृद्धि दर्ज

इसका प्रभाव भी अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है, जहां जिले में भूजल स्तर में करीब 5.41 मीटर तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. यह उपलब्धि केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता का परिणाम है, जिसमें ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. इस अभियान में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, जिन्हें नीर नायिका के रूप में पहचान मिली है.

कम हो रही पानी की समस्या

महिला किसान प्रसादो देवी बताती हैं कि बारिश और घरों से निकलने वाला पानी अब सोख्ता गड्ढों में डाला जा रहा है जिससे जमीन का जलस्तर बढ़ रहा है और गांव में पानी की समस्या धीरे-धीरे कम हो रही है.

सोनम नाम की महिला किसान कहती हैं कि घरों का गंदा पानी अब बेकार नहीं जाता, बल्कि उसे भी जल संरक्षण के काम में उपयोग किया जा रहा है.

वहीं सुमंती बताती हैं कि जिला प्रशासन से मिली जानकारी के बाद गांव में इस मॉडल को अपनाया गया और अब इसका सकारात्मक असर साफ दिखाई दे रहा है. कोरिया का यह मॉडल अब छत्तीसगढ़ से निकलकर पूरे देश में लागू किए जाने की दिशा में बढ़ रहा है, जो जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए एक सशक्त और टिकाऊ समाधान बनकर उभर रहा है.

‘आवा पानी झोंकी' अभियान से शुरू हुआ प्रयोग, आज बना मिसाल

जल संरक्षण का यह मॉडल आवा पानी झोंकी अभियान के तहत शुरू किया गया था. इसकी खासियत है कि इसमें न बड़े बांध की जरूरत, न भारी मशीनरी की मांग और न महंगा बजट है. सिर्फ जागरूकता, सामूहिक श्रम और समुदाय की इच्छाशक्ति के दम पर बड़े परिणाम देखने को मिले.

ये भी पढ़ें: मन की बात में PM मोदी ने छत्तीसगढ़ के काले हिरणों का किया जिक्र, बारनवापारा में 5 दशक बाद लौटे ये हिरण

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com