विज्ञापन

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों का झुंड; बाघाें की गणना वाले कैमरे में हुए ट्रैप

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड रिकॉर्ड हुआ है. वन विभाग ने इसे सफल वन्यजीव संरक्षण और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत बताया है.

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों का झुंड; बाघाें की गणना वाले कैमरे में हुए ट्रैप
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ ढोल का झुंड, कैमरा ट्रैप में कैद हुई बड़ी उपलब्धि

छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक नतीजे अब मैदान में दिखाई देने लगे हैं. अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का एक दुर्लभ झुंड रिकॉर्ड हुआ है. वन विभाग इसे रिजर्व क्षेत्र में बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र और सफल संरक्षण कार्यों का महत्वपूर्ण संकेत मान रहा है. ढोल देश के संकटग्रस्त और कम दिखाई देने वाले मांसाहारी वन्यजीवों में गिने जाते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि जंगल में पर्याप्त शिकार प्रजातियां उपलब्ध हैं और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास विकसित हो रहा है.

कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड हुआ दुर्लभ झुंड, देखिए VIDEO

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अखिल भारतीय बाघ आकलन के तहत लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार ढोलों का एक संगठित समूह दर्ज किया गया है. वन अधिकारियों के मुताबिक यह रिकॉर्डिंग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ढोल सामान्यतः कम दिखाई देने वाले वन्यजीव हैं. किसी संरक्षित क्षेत्र में इनके झुंड का दिखाई देना जंगल की समृद्ध जैव विविधता का संकेत माना जाता है.

Udanti Sitanadi Tiger Reserve: दुर्लभ जंगली कुत्ते

Udanti Sitanadi Tiger Reserve: दुर्लभ जंगली कुत्ते

क्यों खास है ढोल की मौजूदगी?

ढोल, जिन्हें भारतीय जंगली कुत्ता भी कहा जाता है, देश के दुर्लभ मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल हैं. ये झुंड में रहने वाले सामाजिक प्राणी होते हैं और जंगल की खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. ढोल मुख्य रूप से चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों का शिकार करते हैं. इससे वन क्षेत्र में वन्यजीव आबादी का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है. विशेषज्ञों के अनुसार किसी वन क्षेत्र में ढोल की उपस्थिति उस क्षेत्र के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है.

संरक्षण प्रयासों का दिख रहा असर

वन विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में रिजर्व क्षेत्र में संरक्षण को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इनमें अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत बनाना, आधुनिक तकनीक के जरिए निगरानी और वन्यजीव अपराधियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है. साथ ही स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी बढ़ाई गई है. वन अधिकारियों का मानना है कि इन्हीं प्रयासों के कारण रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए अधिक सुरक्षित वातावरण तैयार हुआ है.

956 हेक्टेयर वन भूमि कराई गई मुक्त

रिजर्व क्षेत्र में संरक्षण अभियान के दौरान लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया. इससे वन्यजीवों को अपने प्राकृतिक आवास और आवाजाही के गलियारे दोबारा उपलब्ध हुए. वन विभाग का कहना है कि आवास संरक्षण किसी भी वन्यजीव प्रजाति की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारकों में से एक है.

शिकारियों के खिलाफ भी हुई बड़ी कार्रवाई

वन विभाग ने अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों पर भी सख्ती दिखाई है. जानकारी के अनुसार पिछले वर्षों में 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई. इससे रिजर्व क्षेत्र में शिकार की घटनाओं पर नियंत्रण मिला और वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत हुई है.

खाद्य श्रृंखला के मजबूत होने का संकेत

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि ढोलों का संगठित झुंड रिकॉर्ड होना इस बात का संकेत है कि जंगल में शिकार प्रजातियों की पर्याप्त उपलब्धता है. जब किसी वन क्षेत्र में शीर्ष या मध्य स्तर के शिकारी वन्यजीव बेहतर संख्या में पाए जाते हैं, तो इसे उस क्षेत्र की मजबूत और संतुलित खाद्य श्रृंखला का प्रमाण माना जाता है.

वन्यजीव संरक्षण का उभरता केंद्र बन रहा रिजर्व

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हाल के वर्षों में वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी ने इसे मध्य भारत के महत्वपूर्ण संरक्षण क्षेत्रों में शामिल कर दिया है. वन विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक प्रबंधन, प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के कारण यह क्षेत्र जैव विविधता संरक्षण का मजबूत मॉडल बनकर उभर रहा है. ढोल के दुर्लभ झुंड का रिकॉर्ड होना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें : तीन फीट लंबी पूंछ... गजब का रंग; छत्तीसगढ़ के देवपुर जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल मालाबार गिलहरी, देखिए तस्वीर

यह भी पढ़ें : कोबरा ने उगली मृत नागिन, शिवपुरी में हैरान करने वाला रेस्क्यू; सर्प मित्र भी चौंके, स्कूल परिसर का VIDEO वायरल

यह भी पढ़ें : देश में पहली बार एक साथ 12 उद्यानिकी फसलों को GI टैग; MP ने रचा इतिहास, इन उत्पादों को मिली खास पहचान

यह भी पढ़ें : शादी के ढाई महीने बाद विवाद: पत्नी पर 5 लाख मांगने और ‘नीले ड्रम' की धमकी देने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Udanti Sitanadi Tiger Reserve, Wild Dog, Rare Wildlife Species, Chhattisgarh, IUCN Red List
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com