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छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को राहत, SC ने जमानत रद्द करने से किया इनकार; ED की याचिका खारिज

छत्तीसगढ़ के 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले में भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने हाई कोर्ट से मिली जमानत रद्द करने से इनकार करते हुए ईडी और राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी.

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को राहत, SC ने जमानत रद्द करने से किया इनकार; ED की याचिका खारिज
  • सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के 2161 करोड़ रुपये के शराब घोटाले मामले में चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी है.
  • अदालत ने कहा कि कानूनी त्रुटि मात्र जमानत रद्द करने का पर्याप्त कारण नहीं बनती है.
  • सुप्रीम कोर्ट ने जमानत आदेशों पर लगातार अपीलों से न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की चिंता जताई.

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द करने से इनकार कर दिया और ईडी तथा राज्य सरकार की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई बंद कर दी. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि किसी जमानत आदेश में केवल कानूनी त्रुटि होना ही उसे रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता. अदालत ने यह भी माना कि जमानत आदेशों को लगातार चुनौती देने की बढ़ती प्रवृत्ति न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना रही है.

हाई कोर्ट की जमानत में दखल से इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल को मिली जमानत को बरकरार रखते हुए कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है. अदालत ने ईडी और राज्य सरकार की उन दलीलों को स्वीकार नहीं किया, जिनमें जमानत रद्द करने की मांग की गई थी. इसके साथ ही जमानत रद्द करने से संबंधित दोनों याचिकाओं पर सुनवाई समाप्त कर दी गई.

ईडी ने गवाहों पर असर पड़ने की आशंका जताई

सुनवाई के दौरान जांच एजेंसियों की ओर से कहा गया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले के प्रमुख गवाह सामने आने से डर रहे हैं. एजेंसियों का तर्क था कि आरोपी की रिहाई से जांच और मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. हालांकि अदालत ने माना कि केवल ऐसी आशंकाओं के आधार पर जमानत रद्द नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि आरोपी की स्वतंत्रता वास्तव में न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पैदा कर रही है.

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान जमानत से जुड़े व्यापक कानूनी सिद्धांतों पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की. जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि जमानत रद्द करने की असली कसौटी यह है कि क्या आरोपी की आजादी न्याय प्रशासन को प्रभावित कर रही है. अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल यह कहना कि जमानत आदेश कानूनी रूप से गलत है, किसी व्यक्ति की जमानत रद्द करने के लिए पर्याप्त कारण नहीं बन सकता.

बढ़ती अपीलों पर अदालत ने जताई चिंता

पीठ ने कहा कि हाल के वर्षों में जमानत आदेशों के खिलाफ अपीलों की संख्या तेजी से बढ़ी है. अदालत के अनुसार, हर जमानत आदेश की विस्तृत कानूनी समीक्षा में काफी न्यायिक समय खर्च होता है, जिससे अन्य मामलों के निपटारे में देरी होती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्याय व्यवस्था के व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए न्यायिक समय का संतुलित और सावधानीपूर्वक उपयोग किया जाना चाहिए.

यूएपीए और पीएमएलए मामलों का भी किया जिक्र

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि यूएपीए और पीएमएलए जैसे मामलों में जमानत आदेश कई बार 40 से 50 पन्नों तक लंबे होते हैं. ऐसे मामलों में उच्च अदालतों के सामने जमानत से जुड़ी कानूनी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं. अदालत ने माना कि जमानत कानून से जुड़ा न्यायशास्त्र भी इसी कारण लगातार विकसित और विस्तृत होता जा रहा है.

हाई कोर्टों के सख्त रुख पर भी टिप्पणी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई हाई कोर्ट जमानत मामलों में अत्यधिक सख्त रुख अपना रहे हैं. उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक हालिया मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एक वकील को करीब दो साल तक जेल में रहना पड़ा. अदालत ने संकेत दिया कि जमानत से जुड़े मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया, दोनों के बीच उचित संतुलन बना रहे.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चैतन्य बघेल की जमानत बरकरार रखी, लेकिन हाई कोर्ट द्वारा जांच एजेंसी के खिलाफ की गई कुछ प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया. अदालत ने इन टिप्पणियों को "पूरी तरह अनावश्यक" बताया और कहा कि उनकी जरूरत नहीं थी.

2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले का मामला

यह मामला 2161 करोड़ रुपये के कथित शराब घोटाले से जुड़ा है, जिसकी जांच ईडी और सीबीआई दोनों एजेंसियां कर रही हैं. ईडी का आरोप है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच शराब कारोबार से जुड़े एक कथित सिंडिकेट के माध्यम से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया. इसी मामले में चैतन्य बघेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है. छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इसी वर्ष जनवरी में उन्हें जमानत दे दी थी, जिसे चुनौती देते हुए ईडी और राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं.

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