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कार बेची, नौकरी छोड़ी और निकल पड़ी संसार देखने, जानिए आरजू की कहानी, जो साइकिल से दुनिया नाप रही

एस्कंदरी की यात्रा में यादगार पल थाईलैंड में एक मंदिर विवाह समारोह और भारत की कांवड़ यात्रा शामिल है. उन्होंने कहा ऋषिकेश में श्रद्धालुओं को गंगाजल लेते हुए देखना अद्भुत अनुभव था.

कार बेची, नौकरी छोड़ी और निकल पड़ी संसार देखने, जानिए आरजू की कहानी, जो साइकिल से दुनिया नाप रही
आरजू एस्कंदरी

ईरानी महिला साइकिल चालक आरजू एस्कंदरी (Arzoo Eskandari) की कहानी हर किसी को प्रभावित कर रही है. एक समय था जब उन्हें अपने घर पर साइकिल चलाने की इजाजत नहीं थी. आज वह ईरान से बाहर सात देशों में करीब 11,000 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से कर चुकी हैं. 36 वर्षीय एस्कंदरी का कहना है कि जब वह महज आठ साल की थीं. तब उन्होंने अपनी पहली साइकिल खरीदी थी. मगर उनके पिता उन्हें सड़कों पर साइकिल चलाने की इजाजत नहीं देते थे. वह बताती हैं कि उन्हें साइकिल चलाने के लिए पहले अपनी कार में उसे रखकर पार्क तक ले जाना पड़ता था. उसके बाद वह वहां उसे चला पाती थीं. मौजूदा समय में वह साइकिल जिसे वह प्यार से 'अफरा' कहकर बुलाती हैं. उससे एशिया के सात देशों में 11,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा कर चुकी हैं 

वीजा विस्तार के प्रयास में हैं एस्कंदरी

मंगलवार यानी कि आज दोपहर आरजू एस्कंदरी राजधानी दिल्ली स्थित होटल कॉनॉट रॉयल में बेचैनी पूर्वक अपने भारत वीजा विस्तार का इंतजार कर रही थीं. उन्हें उम्मीद है कि वीजा का विस्तार बढ़ जाएगा. जिससे वह भारत को और करीब से देख पाएंगी. एस्कंदरी बताती हैं कि भारत में उनकी पहली साइकिल यात्रा जयपुर की थी. यही नहीं उन्हें जयपुर अपने शहर इस्फहान की तरह नजर आता है. वह कहती हैं, 'जयपुर, इस्फहान जैसा नजर आता है.'

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Photo Credit: @X

एक दिन की यात्रा से लेकर पूरे एशिया तक 

आरजू एस्कंदरी जब केवल आठ साल की थीं. तब उन्हें घर के बाहर साइकिल चलाने की इजाजत नहीं थी. उनके पिता और भाई हमेशा टोकते रहते थे. मगर उन्होंने हार नहीं मानी. मां का साथ मिलने के बाद उन्होंने अपनी यात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ाई. शुरूआत में उन्होंने एक दिन की यात्रा की. इसके बाद दो दिन, फिर तीन दिन, पांच महीना ... अब वह करीब 8,400 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं. 

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एस्कंदरी का बयान

एस्कंदरी कहती हैं, 'यह आसान सफर नहीं था. मुझे कई बार यात्रा के दौरान पुरुषों जैसे कपड़े पहनने पड़ते थे. खुद को पूरी तरह से ढक कर सड़क पर निकलना पड़ता था. कई बार तो पुलिस की नजर भी मुझपर पड़ जाती थी. मेरे माता-पिता के लिए आसान नहीं था कि 36 साल की उनकी बेटी जो कि अविवाहित है. वह अकेले लंबी यात्रा करे. मगर धीरे-धीरे उनका भरोसा मुझपर होने लगा. अब पूर्ण रूप से मेरे ऊपर विश्वास करते हैं.'

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कार बेच दी, मनोवैज्ञानिक की नौकरी छोड़ दी और निकल पड़ीं एस्कंदरी 

एस्कंदरी का कहना है कि ईरान की यात्रा करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह जीस चीज से डरती हैं. जरूरी नहीं है कि वही चीज उनकी जीवन में बांधा बने. ईरान की यात्रा करने के बाद उन्होंने अपनी कार बेच दी. यहीं नहीं उन्होंने मनोवैज्ञानिक की अपनी नौकरी भी छोड़ दी और एशिया के भ्रमण पर निकल पड़ीं.

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यात्रा में 4,500 डॉलर खर्च कर चुकी हैं एस्कंदरी 

एस्कंदरी का कहना कि उन्हें इस कार्य के लिए किसी कंपनी का समर्थन प्राप्त नहीं है. वह खुद के पैसे से यात्रा कर रही हैं. मंगलवार यानी की आज तक वह करीब 4,500 डॉलर खर्च कर चुकी हैं. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, 'एक महिला होते हुए जयपुर में खरीददारी के आकर्षण से बचना बहुत मुश्किल है. मैंने वहां के कुछ स्थानीय हस्तशिल्प खरीदे हैं. मगर बाद में सामान ज्यादा होने की वजह से कुछ चीजें छोड़नी भी पड़ीं.'

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सामान और साइकिल का कुल वजन  60 किलोग्राम

आपको जानकर हैरानी होगी कि एस्कंदरी का सामान और साइकिल की कुल वजन मिलाकर 60 किलोग्राम है. जिसपर वह कहती हैं, 'कभी-कभी इसे चलाना बहुत मुश्किल होता है, खासकर पहाड़ियों में.' हालांकि, इस दौरान उनके चेहरे पर स्माइल थी. 

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चुनौतियों भरी है राह

एस्कंदरी बताती हैं कि सफर के दौरान उन्हें पहाड़ों, भीषण गर्मी, उमस और कई रातें टेंट में बितानी पड़ी हैं. क्योंकि होटल काफी महंगे पड़ते हैं. कई बार तो पैसे बचाने के लिए उन्हें खुद से खाना बनाना पड़ा है. इसके अलावा भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. जैसे सीमा पार करना, वीजा की व्यवस्था और हर रात रुकने के लिए सुरक्षित जगह का चुनाव करना आदि. मौजूदा समय में उनकी सबसे बड़ी समस्या पैसों की है. यदि उन्हें आर्थिक सहायता नहीं मिलती है तो उन्हें अपनी यात्रा योजना से पहले ही समाप्त करना पड़ेगा. 

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'अफरा' के साथ एस्कंदरी का जुड़ाव 

एस्कंदरी अपनी साइकिल जिसे वह प्यार से 'अफरा' कहती हैं. उसके हैंडल पर खास संदेश लिखा है. जिसमें से सबसे प्रमुख संदेश है, 'धीरे चलो और आंखें खोलकर दुनिया देखो.'

वह कहती हैं, 'अतीत और भविष्य की चिंता नहीं कीजिए. वर्तमान में रहिए और आसपास की चीजों का आनंद लीजिए. मेरा संदेश माइंडफुलनेस का है.' एस्कंदरी प्रतिदिन करीब 70 से 100 किलोमीटर तक साइकिल चलाती हैं. 

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मुस्कान हर जगह काम आती है काम 

एस्कंदरी का कहना है कि दूसरे यात्री हवाई जहाज से आते हैं. बड़े-बड़े होटलों में ठहरते हैं. दर्शनीय स्थलों को देखते हैं और फिर चले जाते हैं. उन्होंने लंबा रास्ता चुना है. वह कहती हैं, 'मैंने लंबा रास्ता चुना है. गांवों से गुजरती हूं, कस्बों में रुकती हूं, लोगों से मिलती हूं, स्थानीय भोजन करती हूं और उनकी संस्कृति को समझने की कोशिश करती हूं. कभी-कभी भाषा समझ नहीं आती है. मगर चेहरे की मुस्कान हर जगह काम आती है.'

एस्कंदरी के मुताबिक उन्हें लाओस, वियतनाम और थाईलैंड में भाषा की वजह से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा था. मगर इसके बावजूद वहां के लोगों ने उन्हें अपने घरों में बुलाया, खाना खिलाया और अपनापन जैसा प्यार दिया. जिसे वह 'मानवता की भाषा' कहती हैं. 

एस्कंदरी का यादगार पल

एस्कंदरी की यात्रा में यादगार पल थाईलैंड में एक मंदिर विवाह समारोह और भारत की कांवड़ यात्रा शामिल है. उन्होंने कहा, 'ऋषिकेश में श्रद्धालुओं को गंगाजल लेते हुए देखना अद्भुत अनुभव था. हर दिन जीवन में एक नई कहानी देता है और कुछ नया सिखाता है.'

वर्षों से था भारत की यात्रा का सपना 

भारत की यात्रा करना एस्कंदरी का वर्षों पुराना सपना था. जिसमें बॉलीवुड की बड़ी भूमिका है. उन्होंने कहा, 'ईरान में लोग भारत और विशेष रूप से बॉलीवुड फिल्मों के काफी करीब हैं. बचपन से ही मैं भारत आना चाहती थी. यहां के खाने, संस्कृति और पारंपरिक कपड़ों को करीब से देखना चाहती थी. अब मैं भारतीय कपड़े भी पहन रही हूं.' खबर लिखे जाने तक उन्होंने आगरा, जयपुर और दिल्ली की यात्रा की है. 

एस्कंदरी ने मनोविज्ञान से हासिल की डिग्री 

लोगों का मानना है कि ईरानी महिलाओं को आजादी नहीं है. मगर इस सवाल पर वह संतुलित दृष्टिकोण रखती हैं. उनका कहना है, 'मैंने विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. मनोविज्ञान में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. ईरान में बहुत सी महिलाओं ने उच्च शिक्षा हासिल की है और बड़े पदों पर काम कर रही हैं. जीवन कठिन है, लेकिन यह केवल ईरान में ही नहीं, दक्षिण एशिया के कई देशों में महिलाओं के लिए चुनौतियां हैं. यह कहना गलत है कि महिलाओं को कुछ करने की अनुमति नहीं है.'

प्रेरणा बन चुकी हैं आरजू

आरजू एस्कंदरी मौजूदा समय में लोगों के बीच प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं. मगर उनका उद्देश्य कभी किसी के लिए आदर्श बनना नहीं था. मौजूदा समय में उन्हें सोशल मीडिया पर लगभग एक लाख लोग फॉलो करते हैं. उनकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पर लिखा है, 'एक लड़की जिसने अपने सबसे बड़े डर का सामना किया और अब अपने सपनों को जी रही है. मैं एशिया महाद्वीप की साइकिल यात्रा पर हूं और फिलहाल भारत अपने सातवें देश के दौरे पर हूं.'

वह कहती हैं, 'मेरे अधिकांश फॉलोअर्स महिलाएं और लड़कियां हैं. जो मुझे एक नायिका के रूप में देखती हैं. मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि यदि आपके पास कोई सपना है तो आप उसे पूरा कर सकती हैं.'

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