प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने म्यांमार से भारत में अवैध रूप से लाई जा रही सुपारी की तस्करी करने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है. एजेंसी ने असम और दिल्ली में 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं. जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क म्यांमार से सुपारी लाकर देश के कई राज्यों में सप्लाई कर रहा था और इसके जरिए करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार चल रहा था.
CBI की FIR से शुरू हुई जांच
यह मामला मणिपुर में सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर सामने आया. गुवाहाटी हाईकोर्ट ने भी एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान इस पूरे नेटवर्क की जांच के निर्देश दिए थे. आरोप था कि म्यांमार से बड़े पैमाने पर सुपारी की तस्करी कर उसे फर्जी दस्तावेजों और ई-वे बिल के जरिए भारतीय बाजार में पहुंचाया जा रहा है.
337 करोड़ रुपये से ज्यादा के ई-वे बिल का खुलासा
ED की जांच में पता चला कि वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 के बीच करीब 337 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के ई-वे बिल जारी किए गए. इनमें 86.25 करोड़ रुपये के CGST और 251.19 करोड़ रुपये के SGST से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं. हैरानी की बात यह रही कि जिन लोगों के नाम पर कई ई-वे बिल बने थे उनमें से कुछ GST में पंजीकृत ही नहीं थे.
तीन चरणों में चलता था पूरा नेटवर्क
जांच के अनुसार मिजोरम का जोकहावतार इस नेटवर्क का प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट था. पहले चरण में म्यांमार के सप्लायर बिना कस्टम क्लियरेंस के सुपारी को मिजोरम के चंफाई जिले तक पहुंचाते थे. दूसरे चरण में स्थानीय लोग खेप को असम के कछार, करीमगंज और हैलाकांडी के कारोबारियों और फाइनेंसरों तक पहुंचाते थे. तीसरे चरण में इसे देश के अलग-अलग राज्यों में बेच दिया जाता था.
दिल्ली से यूपी तक फैला कारोबार
जांच में पता चला कि तस्करी की सुपारी सिर्फ पूर्वोत्तर तक सीमित नहीं थी. इसकी सप्लाई दिल्ली, पश्चिम बंगाल के कोलकाता और फालाकाटा, महाराष्ट्र के नागपुर तथा उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में की जा रही थी. दिल्ली के कारोबारी रोमी जैन और उनकी कंपनी गणपति ट्रेडर्स की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है.
ED को जांच में ऐसे कई बैंक खातों की जानकारी मिली जिनका इस्तेमाल तस्करी से मिले धन को छिपाने और वैध दिखाने के लिए किया जाता था. खाताधारकों के GST पंजीकरण और व्यापारिक लाइसेंस का भी उपयोग किया गया. इसके बदले संबंधित लोगों को रकम दी जाती थी.
छापेमारी में मिले अहम सबूत
कार्रवाई के दौरान एजेंसी ने खाली हस्ताक्षरित चेक, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए हैं. ED का मानना है कि इन दस्तावेजों से मनी लॉन्ड्रिंग और तस्करी के पैसों के नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है.
जांच अभी जारी
इससे पहले जून 2026 में मिजोरम के चंफाई जिले में नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. वहीं से मिले सुराग असम और दिल्ली तक पहुंचे. अब जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और बैंक रिकॉर्ड की फोरेंसिक जांच की जा रही है. एजेंसी को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और कारोबारी, फाइनेंसर और तस्कर जांच के दायरे में आ सकते हैं.
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