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E-20 पेट्रोल विवाद में देश का पहला ऐतिहासिक फैसला: कार कंपनी को देनी होगी नई कार या लौटाने होंगे पूरे पैसे

ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ता अदालत का देश में अपनी तरह का यह पहला और ऐतिहासिक फैसला सामने आया है जहां रायपुर उपभोक्ता फोरम ने एक मशहूर कार कंपनी को तगड़ा झटका देते हुए ग्राहक को उसी मॉडल की नई ई-20 कंपैटिबल कार देने या फिर 20.50 लाख रुपये की पूरी रकम ब्याज समेत लौटाने का सख्त आदेश जारी किया है.

E-20 पेट्रोल विवाद में देश का पहला ऐतिहासिक फैसला: कार कंपनी को देनी होगी नई कार या लौटाने होंगे पूरे पैसे

देश में E20 फ्यूल को लेकर चल रही बहस के बीच छत्तीसगढ़ की रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत (अतिरिक्त पीठ) ने एक मशहूर कार कंपनी और उसके स्थानीय डीलर के खिलाफ बेहद सख्त फैसला सुनाया है. ई-20 (E20) पेट्रोल और इंजन की खराबी को लेकर आया यह आदेश अपनी तरह का देश का पहला मामला है. कोर्ट ने ग्राहक के साथ हुए धोखे और खराब सर्विस को लेकर कंपनी और डीलर दोनों को जिम्मेदार माना है. उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की बेंच ने आदेश दिया है कि पीड़ित डॉक्टर ग्राहक को उसी मॉडल की नई ई-20 पेट्रोल सपोर्ट करने वाली कार दी जाए.

कंपनी और डीलर को 45 दिनों की मोहलत 

अदालत ने साफ किया है कि यदि कंपनी और उसका डीलर 45 दिनों के भीतर ग्राहक को नई कार नहीं सौंपते हैं, तो उन्हें गाड़ी की पूरी कीमत, आरटीओ और बीमा खर्च को मिलाकर कुल 20 लाख 50 हजार 494 रुपये का भुगतान करना होगा. इसके साथ ही इस रकम पर आदेश की तारीख से लेकर भुगतान के दिन तक 7% सालाना की दर से ब्याज भी देना पड़ेगा. यही नहीं, ग्राहक को हुई दिमागी परेशानी के लिए 1 लाख रुपये का हर्जाना और कोर्ट कचहरी के खर्च के रूप में 10,000 रुपये अलग से देने होंगे.

कंपनी ने मढ़ा पेट्रोल पर दोष, पर खुद फंस गई

यह पूरा मामला रायपुर के एक जाने-माने किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज देवता से जुड़ा है.

उन्होंने जून 2024 में मशहूर कार कंपनी के शोरूम से एक महंगी कार खरीदी थी. लेकिन गाड़ी लेते ही उसमें लगातार खराबी आने लगी और उसका इंजन बार-बार बंद होने लगा. जब डॉक्टर अपनी गाड़ी लेकर सर्विस सेंटर पहुंचे, तो कंपनी और डीलर ने इसे मुफ्त में ठीक करने से साफ मना कर दिया.सर्विस सेंटर और कंपनी के इंजीनियरों ने डॉक्टर को एक भारी-भरकम 5.30 लाख रुपये का एस्टीमेट थमा दिया.

कंपनी का तर्क था कि पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट के कारण गाड़ी का इंजन खराब हुआ है, इसलिए यह वारंटी के दायरे में नहीं आता. लेकिन जब मामला उपभोक्ता कोर्ट पहुंचा, तो कंपनी के दावों की हवा निकल गई.

अदालत में खुले कंपनी के दो बड़े राज

अदालत की जांच में कंपनी की दो बड़ी चालाकी सामने आई है. 

17 महीने पुरानी कार बेची: डॉक्टर को जून 2024 में जो कार बेची गई थी, उसका निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था. यानी कंपनी ने ग्राहक को अंधेरे में रखकर करीब पौने दो साल पुरानी गाड़ी नए दामों पर बेच दी.

नया पेट्रोल सपोर्ट नहीं करता था इंजन: देश भर के पेट्रोल पंपों पर अब 20% एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल (E20) मिल रहा है. जांच में पता चला कि इस मशहूर कार का इंजन इस नए पेट्रोल को झेलने के लायक ही नहीं था और कंपनी ने यह बेहद जरूरी बात गाड़ी बेचते समय ग्राहक से छुपा कर रखी थी.

अदालत ने माना कि पेट्रोल की मिलावट पर ग्राहक का कोई नियंत्रण नहीं था और कंपनी ने जानबूझकर ग्राहक को धोखा दिया है. इसी के मद्देनजर कोर्ट ने डॉक्टर के पक्ष में यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जो आने वाले समय में ई-20 पेट्रोल से जुड़ी शिकायतों के लिए देश में एक नजीर बनेगा.

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