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बेमौसम आंधी-पानी से बुरहानपुर में करोड़ों की केला फसल तबाह; किसानों ने मांगा 1000 करोड़ का विशेष पैकेज

बुरहानपुर में तेज आंधी से 10 हजार हेक्टेयर केला फसल बर्बाद. किसानों ने शिवराज सिंह चौहान से 1000 करोड़ राहत पैकेज की मांग की है.

बेमौसम आंधी-पानी से बुरहानपुर में करोड़ों की केला फसल तबाह; किसानों ने मांगा 1000 करोड़ का विशेष पैकेज
बुरहानपुर में आंधी से तबाह केला फसल, किसानों ने मांगा 1000 करोड़ का पैकेज

Burhanpur Banana Crop Loss: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में पिछले चार दिनों से चल रही तेज हवा और आंधी ने केला उत्पादक किसानों की कमर तोड़ दी है. प्रदेश में सबसे अधिक केला उत्पादन करने वाले इस सीमावर्ती जिले में हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है. किसानों का कहना है कि 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज आंधी ने करोड़ों रुपये की फसल बर्बाद कर दी. प्राकृतिक आपदा से परेशान किसान अब केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. केला उत्पादकों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को जिले में आकर नुकसान का निरीक्षण करने और केंद्र से एक हजार करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की मांग की है. बुरहानपुर से NDTV के लिए शारिक अख्तर दुर्रानी की ग्राउंड रिपोर्ट.

चार दिन की आंधी बनी किसानों के लिए आफत

महाराष्ट्र सीमा से लगे बुरहानपुर जिले में केले की खेती बड़े पैमाने पर होती है. लेकिन इन दिनों मौसम ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है. लगातार चार दिनों तक चली तेज हवा और आंधी ने खेतों में तैयार खड़ी केले की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है. किसानों के मुताबिक कई खेतों में पूरी की पूरी फसल जमीन पर गिर चुकी है.

बुरहानपुर मध्यप्रदेश में केला उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र माना जाता है. यहां की बड़ी आबादी सीधे तौर पर केला खेती और उससे जुड़े व्यापार पर निर्भर है.

इसलिए फसल का नुकसान केवल किसानों ही नहीं, बल्कि पूरे स्थानीय कृषि अर्थतंत्र को प्रभावित कर सकता है.

Burhanpur Banana Crop Loss: केले की फसल को नुकसान

Burhanpur Banana Crop Loss: केले की फसल को नुकसान

10 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित

NDTV को प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में हर साल करीब 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में केले की खेती की जाती है. इनमें से अब तक करीब 10 हजार हेक्टेयर में लगी फसल प्राकृतिक आपदा की चपेट में आ चुकी है. किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में फिर मौसम खराब हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है.

किसान बोले- “सब कुछ तबाह हो गया”

किसान राजेंद्र महाजन NDTV को बताते हैं कि “चार दिन की तेज हवा ने हमारी पूरी मेहनत बर्बाद कर दी. खेतों में खड़ी केले की फसल पूरी तरह गिर गई है. लाखों रुपये का नुकसान हुआ है. सरकार को तुरंत मदद करनी चाहिए.”  वहीं सुनील महाजन ने कहा कि “हमारी सबसे बड़ी समस्या यह है कि केला फसल का मौसम आधारित बीमा नहीं है. फसल बर्बाद होने के बाद अब परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है. केंद्र सरकार विशेष पैकेज दे, तभी किसानों को राहत मिल सकेगी.”

करोड़ों के नुकसान का दावा

केला उत्पादकों का कहना है कि इस आपदा से करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है. एक तरफ फसल बर्बाद हो गई, दूसरी तरफ खेती में लगाया गया निवेश डूबने की स्थिति में पहुंच गया है. किसानों के मुताबिक केले की खेती में लागत अधिक आती है और ऐसे नुकसान के बाद आर्थिक संकट गहरा गया है.

Burhanpur Banana Crop Loss: करोड़ों का नुकसान

Burhanpur Banana Crop Loss: करोड़ों का नुकसान

फसल बीमा न होने से बढ़ी परेशानी

किसानों का कहना है कि केला फसल पर मौसम आधारित फसल बीमा लागू नहीं है. ऐसे में जो राहत राशि राज्य सरकार की ओर से मिलती है, वह नुकसान के मुकाबले बेहद कम होती है. किसानों ने कहा कि मामूली मुआवजा उनकी वास्तविक क्षति की भरपाई नहीं कर सकता.

कांग्रेस ने भी किया समर्थन

किसानों की मांग को विपक्षी दल कांग्रेस ने भी समर्थन दिया है. जिला कांग्रेस कमेटी के नेताओं ने केंद्र सरकार से किसानों के लिए विशेष पैकेज घोषित करने की मांग की है. कांग्रेस ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया अभियान भी चलाएगी. NDTV से जिला कांग्रेस कमेटी बुरहानपुर अध्यक्ष, रिंकू टाक ने कहा कि “बुरहानपुर के किसानों की हालत बेहद खराब है. करोड़ों की फसल तबाह हो चुकी है. हम केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग करते हैं कि वे खुद यहां आकर हालात देखें और तत्काल विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा करें.”

केंद्र सरकार से 1000 करोड़ पैकेज की मांग

केला किसानों ने केंद्र सरकार से विशेष राहत पैकेज की मांग की है. किसानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुरहानपुर आने का निमंत्रण देते हुए फसल नुकसान का निरीक्षण करने की अपील की है. साथ ही केंद्र सरकार की सर्वे टीम भेजकर वास्तविक नुकसान का आंकलन कराने की मांग की गई है.

प्रशासनिक सर्वे की तैयारी

प्रशासन की ओर से भी नुकसान का सर्वे शुरू करने की बात कही जा रही है. हालांकि किसान चाहते हैं कि सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं बल्कि वास्तविक राहत दी जाए, ताकि वे दोबारा खेती शुरू कर सकें. फिलहाल जिले के हजारों किसान सरकार की मदद का इंतजार कर रहे हैं. अब देखना होगा कि राज्य और केंद्र सरकार इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को कितनी राहत दे पाती है.

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