राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. नगर निगम सोमवार से बड़े स्तर पर सीलिंग अभियान शुरू करने जा रहा है. निगम ने ऐसे प्रतिष्ठानों की पहचान कर ली है जो आवासीय भवनों में नियमों के विपरीत कारोबार चला रहे हैं. कार्रवाई से पहले दुकानदारों और संचालकों को 24 घंटे का नोटिस दिया है. गौतम नगर में एक अवैध ओयो होटल को सील किए जाने के बाद अब शहर के कई इलाकों में कार्रवाई की तैयारी है. निगम का कहना है कि रहवासी क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक, शोर-शराबे, भीड़ और सुरक्षा संबंधी शिकायतों को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है.
सोमवार से शुरू होगा सीलिंग अभियान
भोपाल नगर निगम सोमवार से रिहायशी इलाकों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ सीलिंग अभियान शुरू करेगा. निगम अधिकारियों के अनुसार जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं, उनके दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी. अभियान के दौरान पुलिस बल भी तैनात रहेगा ताकि किसी तरह की विवाद की स्थिति से निपटा जा सके.
24 घंटे के नोटिस चस्पा
कार्रवाई से पहले नगर निगम ने संबंधित प्रतिष्ठानों पर 24 घंटे के नोटिस चस्पा किए हैं. निगम का कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले भवन मालिकों और कारोबारियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जा रहा है. तय समय सीमा पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम की शुरुआती कार्रवाई मिसरोद, हबीबगंज, रातीबड़, कोहेफिजा, गोविंदपुरा और ऐशबाग क्षेत्रों में की जाएगी. इन इलाकों में ऐसे कई प्रतिष्ठानों की पहचान की गई है जो आवासीय उपयोग की अनुमति वाले भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं.
गौतम नगर में हो चुकी है पहली कार्रवाई
तीन दिन पहले जोन-12 के वार्ड-58 स्थित गौतम नगर में एक रिहायशी भवन में अवैध रूप से संचालित ओयो होटल को सील किया था. इसे अभियान की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. अब इसी तरह की कार्रवाई अन्य इलाकों में भी की जाएगी.
8500 से ज्यादा भवनों को जारी हुए नोटिस
नगर निगम अब तक 8,264 से अधिक भवनों को अधिभोग उल्लंघन के नोटिस जारी कर चुका है. निगम के रिकॉर्ड के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे भवन हैं जिनकी अनुमति आवासीय उपयोग के लिए है, लेकिन वहां व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.
नगर निगम के अनुसार शहर में करीब 62 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठान दर्ज हैं. इनमें से केवल करीब 2 हजार प्रतिष्ठान ही लैंड यूज नियमों के अनुरूप पाए गए हैं. ऐसे में लगभग 60 हजार प्रतिष्ठान भविष्य में सीलिंग कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं. निगम के निशाने पर कुल मिलाकर करीब एक लाख ऐसे भवन हैं जहां नियमों के विपरीत गतिविधियां संचालित होने की आशंका है.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
नगर निगम की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद तेज हुई है. वहीं, पहले से मिले कुछ न्यायिक राहत आदेश भी निरस्त हो चुके हैं. इसके बाद प्रशासन ने अवैध व्यावसायिक गतिविधियों और भूमि उपयोग के उल्लंघन के मामलों पर सख्त रुख अपनाया है.
अवधपुरी, अयोध्या बायपास, गौतम नगर, अशोका गार्डन और लालघाटी जैसे इलाकों में कारोबारियों के बीच कार्रवाई को लेकर चिंता का माहौल है. कई व्यापारी नोटिस मिलने के बाद अपने दस्तावेजों को व्यवस्थित करने और नियमों की जानकारी जुटाने में लगे हैं.
अवैध निर्माणों की भी होगी जांच
नगर निगम सिर्फ रिहायशी इलाकों में चल रहे कारोबार तक ही सीमित नहीं रहेगा. मुख्य मार्गों के किनारे बने निर्माण, नदी और तालाबों के आसपास के क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट, बफर जोन और कैचमेंट एरिया में बने अवैध निर्माणों की भी जांच की जाएगी. निगम का कहना है कि जहां भी नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सभी प्रतिष्ठानों पर एक साथ कार्रवाई नहीं होगी. प्रत्येक मामले में नोटिस, दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण के बाद ही फैसला लिया जाएगा. निगम का दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी.
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