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अमेरिका गहरे संकट में, कोरोना से भी ज्यादा खराब अभी का समय मान रहे अमेरिकी बिजनेसमैन

यूनिवर्सिटी ऑफ डेनवर में सप्लाई चेन प्रोग्राम के डायरेक्टर जैक बफिंगटन ने कहा, "यह निश्चित रूप से कोविड से भी बड़ी समस्या है. यह बिल्कुल अलग मामला है. यह ऊर्जा से जुड़ी समस्या है."

अमेरिका गहरे संकट में, कोरोना से भी ज्यादा खराब अभी का समय मान रहे अमेरिकी बिजनेसमैन
ट्रंप के जल्द सब ठीक होने के वादों को भी अब लोग गंभीरता से नहीं ले रहे.
  • US आर्थिक संकट की गहराई में पहुंच रहा है, जिसका प्रमुख कारण देश के अंदरूनी व्यापारिक और शिपिंग समस्याएं हैं
  • उद्योगों में बिजनेस माहौल इतना अनिश्चित है कि व्यापारियों को भविष्य की योजना बनाने में कठिनाई हो रही है
  • मिडिल ईस्ट युद्ध, यूक्रेन-रूस संघर्ष और प्राकृतिक आपदाओं ने सप्लाई चेन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है

अमेरिका गहरे आर्थिक संकट में फंसता जा रहा है. इसका कारण भी खुद अमेरिका है. अब अमेरिका के बिजनेसमैन खुलकर इस बात को स्वीकार करने लगे हैं.  नेशनल कॉफी डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी को तीन दशक से भी पहले शुरू करने वाले जेफ वोज्टा ने कहा कि शिपिंग में रुकावट, कंटेनरों की कमी, रेड सी में चल रही घटनाओं की वजह से ज्यादा लागत और खाद की बढ़ती कीमतों के कारण, हम एक ऐसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं जिसका सामना हमने पहले कभी नहीं किया. अभी बहुत ज्यादा अनिश्चितता है.

अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना के रैले में 'डिलवर्थ कॉफी' के CEO जेफ वोज्टा को 2024 में ब्राजील में कॉफी की बहुत खराब फसल का सामना करना पड़ा, जिससे कॉफी फ्यूचर्स की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं. अगले साल, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ की वजह से कॉफी की कीमतें और भी बढ़ गईं. फिर, इस साल ईरान युद्ध शुरू हो गया. और साथ ही 'सुपर अल नीनो' का असर भी देखने को मिला.

हर क्षेत्र में दिक्कत

पूरे देश में, अलग-अलग इंडस्ट्रीज के अमेरिकी बिजनेस मालिकों का कहना है कि वे भी एक जैसी स्थिति में हैं. 'इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट' के एक अहम मासिक सर्वे ने इस महीने की शुरुआत में लोगों का ध्यान खींचा, जब कई बिजनेस लीडर्स ने मौजूदा बिज़नेस माहौल की तुलना महामारी के समय से की.उन्होंने कहा कि कोविड का समय इससे बेहतर था.

बड़ी रुकावटों और कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से कारोबारियों को ऐसे फैसले लेने पड़ रहे हैं जो लगभग नामुमकिन हैं. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे की योजना कैसे बनाएं, और महंगाई से परेशान उनके ग्राहक और ज्यादा कीमत बढ़ोतरी के लिए बिल्कुल तैयार नहीं हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ डेनवर में सप्लाई चेन प्रोग्राम के डायरेक्टर जैक बफिंगटन ने कहा, "यह निश्चित रूप से कोविड से भी बड़ी समस्या है. यह बिल्कुल अलग मामला है. यह ऊर्जा से जुड़ी समस्या है."

ट्रंप प्रशासन दे रहा दिलासा

ट्रंप प्रशासन ने ईरान युद्ध को एक अस्थायी आर्थिक उतार-चढ़ाव के तौर पर पेश करने की कोशिश की है और यह भी कहा है कि एक बार मामला सुलझ जाने पर, बढ़ी हुई महंगाई तेजी से वापस सामान्य हो जाएगी. लेकिन अमेरिका के कारोबारियों को सप्लाई चेन से जुड़ी जिन ऐतिहासिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उनसे पता चलता है कि महंगाई की इस नई लहर को आसानी से काबू नहीं किया जा सकेगा — भले ही युद्ध चमत्कारिक रूप से कल ही खत्म क्यों न हो जाए.

मगर समस्याएं एक नहीं

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और यूक्रेन द्वारा रूसी रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे हमलों की वजह से मार्च के बाद से डीज़ल की कीमतें दोगुनी हो गई हैं. मौसम की वजह से होने वाली रुकावटें भी बढ़ गई हैं, जिनकी वजह से शिपिंग का खर्च भी बढ़ गया है. इनमें लगातार आए टाइफून भी शामिल हैं, जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट, शंघाई पोर्ट को दो हफ़्ते के लिए बंद कर दिया था और जिनकी वजह से अभी भी काफ़ी देरी हो रही है.

सप्लाई चेन ध्वस्त

यह चिंता की बात थी जब ISM सर्वे में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि सप्लाई चेन की मौजूदा स्थिति कोविड के दौरान और उसके बाद की स्थिति से भी बड़ी और ज्यादा जटिल संकट है. 2020 में, कंटेनर जहाज हफ्तों तक बंदरगाहों में घुसने के इंतजार में अटके रहे. दुकानों में टॉयलेट पेपर, मास्क या हैंड सैनिटाइज़र का स्टॉक नहीं मिल पा रहा था. सप्लाई चेन लगभग ठप हो गई थी, और फिर धीरे-धीरे दोबारा शुरू हुई. आज सप्लाई चेन की समस्याएं बिल्कुल अलग हैं: शिपिंग कभी शुरू होती है, कभी रुकती है, कभी हालात बिगड़ते हैं, कभी बहुत बेहतर हो जाते हैं, और फिर दोबारा बहुत खराब हो जाते हैं. कीमतें ऊपर-नीचे होती हैं और फिर तेजी से बढ़ जाती हैं. कंपनिों के पास मौजूद सीमित कैश भी एक वजह है. शिपिंग का खर्च बहुत ज्यादा होने के कारण कंपनियां ज्यादा स्टॉक नहीं कर पा रही हैं.

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