भोपाल में फार्मेसी की पढ़ाई कर रहे जम्मू-कश्मीर के दो कश्मीरी छात्रों को उनकी क्षेत्रीय और धार्मिक पहचान के आधार परेशान करने का मामला सामने आया है. आरोप है कि उनके इलाके और धर्म की वजह से उन पर किराए का कमरा खाली करने का दबाव बनाया जा रहा है. मामला सामने आते ही भोपाल पुलिस हरकत में आ गई है.सीनियर पुलिस अधिकारी के निर्देश पर पुलिस टीम ने इलाके में जाकर पड़ताल की है. पुलिस टीम ने वहां के निवासियों के साथ-साथ आवासीय कॉलोनी से जुड़े सदस्यों से भी बातचीत की है.
सीएम मोहन यादव को लिखा 3 पन्नों का खत
दरअसल जम्मू एंड कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (JKSA) ने मंगलवार को एमपी के सीएम मोहन यादव को 3 पन्नों की चिट्ठी भेजी है. संगठन ने कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा और पढ़ाई का हवाला देते हुए सीएम से तुरंत दखल देने की मांग की है.
इसके बाद भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज में इनका एडमिशन हुआ. एसोसिएशन के मुताबिक, स्कीम में हॉस्टल का प्रावधान था, लेकिन कॉलेज के पास हॉस्टल नहीं था. इसी वजह से दोनों छात्र पिछले साल से पेइंग गेस्ट (PG) में रह रहे हैं.
पहचान देखकर घर खाली कराने की धमकी
एसोसिएशन का कहना है कि सोसाइटी के कुछ लोगों और उपद्रवियों ने मकान मालिक पर कमरा खाली कराने का भारी दबाव बनाया है. आरोप है कि यह सब सिर्फ इसलिए किया जा रहा है क्योंकि दोनों छात्र कश्मीर से हैं और मुस्लिम हैं. हद तो तब हो गई जब मकान मालिक को धमकी दी गई कि अगर उसने कमरे से नहीं निकाला, तो लोग घर में घुसकर छात्रों को बाहर फेंक देंगे.अब ये गंभीर आरोप भोपाल पुलिस तक पहुंच गए हैं. भोपाल ज़ोन IV के पुलिस उपायुक्त (DCP) आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि यह पूरा मामला पुलिस के संज्ञान में आ चुका है और एक स्थानीय पुलिस टीम को तुरंत संबंधित इलाके में भेजा गया.
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा मकान मालिक पर दोनों छात्रों से मकान खाली कराने के लिए कोई दबाव न बनाया जाए."
डर के साये में छात्र, पढ़ाई छूटी
पुलिस का यह हस्तक्षेप बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि JKSA का दावा है कि इस कथित धमकी का असर छात्रों के दैनिक जीवन और पढ़ाई पर पड़ने लगा है. पत्र के अनुसार, दोनों छात्र इस कदर डर गए हैं कि वे अपने आवास से बाहर निकलने, सामान्य रूप से यात्रा करने या कॉलेज जाने में भी परेशानी महसूस कर रहे हैं. एसोसिएशन का कहना है कि छात्रों ने सहायता के लिए कॉलेज अधिकारियों से भी संपर्क किया था, लेकिन अपने आवेदन के अनुसार, उन्हें अपनी तत्काल सुरक्षा और आवास संबंधी चिंताओं को हल करने के लिए पर्याप्त सहायता नहीं मिली.
यह सिर्फ कमरा खाली कराने का विवाद नहीं: JKSA
JKSA ने पत्र में जोर देकर कहा है कि इस विवाद को केवल एक सामान्य मकान मालिक-किरायेदार या आवास से जुड़े विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा, "यह मामला छात्रों की सुरक्षा, धमकी, जबरदस्ती और भेदभावपूर्ण उत्पीड़न से जुड़ा है." संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों की कश्मीरी पृष्ठभूमि या उनकी मुस्लिम पहचान उनके लिए एक सुरक्षित रहने और पढ़ने की जगह से वंचित करने का आधार नहीं बन सकती.
निष्पक्ष जांच और सुरक्षित जगह की मांग
छात्र संगठन ने सीएम से गुहार लगाई है कि भोपाल पुलिस और प्रशासन को स्वतंत्र जांच के निर्देश दिए जाएं. अफसर खुद छात्रों से बात करें और जो भी दोषी हो, उस पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही जांच पूरी होने तक किसी भी दबाव में छात्रों को कमरा खाली न कराने की हिदायत दी जाए.इसके अलावा, हॉस्टल न होने की सूरत में संगठन ने मांग की है कि कॉलेज के पास ही छात्रों के रहने की सुरक्षित जगह तय की जाए. कॉलेज प्रशासन को पुलिस के साथ मिलकर काम करना चाहिए ताकि इस पूरे विवाद का असर छात्रों की अटेंडेंस, एग्जाम, पढ़ाई और स्कॉलरशिप पर बिल्कुल न पड़े.
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