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बाघों की मौत पर HC सख्त, NTCA से मांगा 10 साल के फंड का हिसाब, सभी टाइगर रिजर्व में CDV की रोकथाम के निर्देश

NTCA (राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण) से पिछले 10 साल का साल-वार फंड का ब्योरा मांगा है, जिसमें पूछा है कि फंड कहां, कितना और कैसे खर्च हुआ. अगली सुनवाई सितंबर के आखिरी सप्ताह में होगी.

बाघों की मौत पर HC सख्त, NTCA से मांगा 10 साल के फंड का हिसाब, सभी टाइगर रिजर्व में CDV की रोकथाम के निर्देश
बाघों की मौत पर NTCA से 10 साल के फंड का हिसाब मांगा
  • बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त हुआ, NTCA से 10 साल के फंड का हिसाब मांगा.
  • MP के सभी टाइगर रिजर्व में खाली पदों को भरने का निर्देश दिया.
  • बाघों के संरक्षण और उनकी सुरक्षा-व्यवस्था के निर्देश दिए.

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) सहित अन्य संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की लगातार संदिग्ध मौतों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. इसके लिए कोर्ट ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से पिछले 10 साल का टाइगर रिजर्व फंड का ब्योरा मांगा है. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से फंड भी पर्याप्त नहीं मिल रहा है और टागइर रिजर्व में खाली पड़े पदों की भी भर्ती नहीं हो रहा है.

साथ ही याचिका में अप्रैल-माह में हुई बाघों की मौत को लेकर CDV के संक्रमण की आशंका जताई गई है, जिसमें इस वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग की है. हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख सिंतबर के अंतिम सप्ताह में रखी है. तब फंड और संसाधनों का पूरा लेखा-जोखा सामने आएगा. साथ ही प्रदेश के टाइगर रिजर्व की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में आएगी.

NTCA से पिछले 10 वर्षों का वर्षवार फंड डाटा मांगा

हाईकोर्ट ने एनटीसीए से पिछले 10 साल के फंड का ब्यौरा मांगा है, जिसमें पूछा है कि उसे हर साल कहां, कितना और कैसे खर्च किया. इससे बाघ संरक्षण, निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी खर्च की जांच होगी.

बाघों की मौतों पर गंभीर सवाल

कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका जताई गई है, जिसको लेकर बाघों की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर सवाल उठाए हैं. याचिका में बताया है कि अप्रैल–मई के बीच 8 बाघों की मौत हुई थी.

इसमें बाघिन सुनैना, बाघिन अमाही और उसके चार शावक शामिल हैं. 19 मई को युवा नर बाघ महावीर की मौत हुई. वहीं, बालाघाट और किसली क्षेत्र में दो अन्य वयस्क बाघ मृत मिले थे. सभी बाघों की मौत मामलों में CDV संक्रमण की आशंका जताई गई.

कुत्तों से फैलने का खतरा

सीडीवी का खतरा यह है कि यह वायरस कुत्तों से वन्यजीवों में फैल सकता है, जो बाघों में संक्रमण गंभीर बीमारी और मौत का कारण बन सकता है. अगर एक टाइगर में फैलता है तो संक्रमण के अन्य टाइगर रिजर्व में भी फैलने का खतरा है.

कुत्तों के वैक्सीनेशन पर कार्रवाई

हाईकोर्ट ने पहले ही कुत्तों के क्वारंटाइन और वैक्सीनेशन के निर्देश दिए थे. सरकार ने बताया कि करीब 2000 आवारा कुत्तों का वैक्सीनेशन किया जा चुका है. साथ हीबूस्टर डोज देने की तैयारी भी जारी है.

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अन्य टाइगर रिजर्व पर भी चिंता

याचिकाकर्ता ने पूरे प्रदेश में निगरानी बढ़ाने की मांग की है, जिसमें बताया है कि सभी टाइगर रिजर्व में वैक्सीनेशन और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत किया जाए. इस पर हाईकोर्ट ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.

खाली पदों पर भी सख्ती

टाइगर रिजर्व में लंबे समय से खाली पदों का मुद्दा उठ रहा है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद कई पद अब भी खाली पड़े हैं. हाईकोर्ट ने राज्य के सभी नौ टाइगर रिजर्व में पशु चिकित्सकों के पद जल्द भरने के निर्देश दिए हैं.

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