- पॉक्सो और गैंगरेप मामले के आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड में जन्मतिथि बदलने का आरोप है.
- आरोपी की वास्तविक जन्मतिथि 25 दिसंबर 2006 थी, लेकिन दस्तावेजों में इसे 25 दिसंबर 2007 दिखाया गया था.
- शपथ-पत्र और दस्तावेजों के आधार पर नया प्रमाणपत्र तैयार कराने में पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल थे.
भिंड जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक और पंचायत तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मुंबई में दर्ज पॉक्सो एक्ट और गैंगरेप के एक मामले में आरोपी को नाबालिग साबित करने के लिए कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई. आरोप है कि जन्मतिथि बदलकर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार किए गए ताकि आरोपी को बाल न्यायालय का लाभ मिल सके. मामले की जांच में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद जिला न्यायालय के आदेश पर तत्कालीन नायब तहसीलदार, पटवारी, पंचायत सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.
गैंगरेप और पॉक्सो मामले से जुड़ा है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, मामला महाराष्ट्र के ठाणे जिले के खड़बेली थाना क्षेत्र का है. यहां 8 सितंबर 2025 को 14 वर्षीय किशोरी के साथ कथित गैंगरेप का मामला दर्ज हुआ था. इस मामले में भिंड जिले के विलाव गांव निवासी विमल यादव आरोपी बनाया था. जांच के दौरान आरोपी की उम्र को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद दस्तावेजों की पड़ताल शुरू हुई.
आरोपी को नाबालिग दिखाने का आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपी को कानून का लाभ दिलाने के लिए उसकी जन्मतिथि में कथित बदलाव किया. आरोप है कि वास्तविक जन्मतिथि 25 दिसंबर 2006 थी, लेकिन रिकॉर्ड में इसे 25 दिसंबर 2007 दर्ज करा दिया. एक साल की इस हेराफेरी से आरोपी को घटना के समय नाबालिग दिखाने की कोशिश की गई, ताकि उसका मामला बाल न्यायालय में चल सके.
फर्जी दस्तावेज तैयार करने की साजिश
आरोप है कि इस काम के लिए फर्जी शपथ-पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए गए. जांच में पंचायत सचिव शेर सिंह, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन, सरपंच राजकुमार दुबे समेत अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है. कथित तौर पर इन दस्तावेजों के आधार पर नया जन्म प्रमाणपत्र तैयार कराया.
नायब तहसीलदार और पटवारी पर भी कार्रवाई
मामले में तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा और तत्कालीन पटवारी संजीव शर्मा का नाम भी सामने आया है. आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया था. इसके अलावा कल्लू यादव और आशुतोष सिंह यादव की भूमिका की भी जांच में चर्चा हुई है. एफआईआर दर्ज होने के बाद राजस्व और पंचायत विभाग में हलचल बढ़ गई है.
कोर्ट को हुआ संदेह, तब खुला मामला
बताया जा रहा है कि शुरुआती दस्तावेजों के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने आरोपी को नाबालिग मानते हुए बाल न्यायालय में पेश किया था. हालांकि सुनवाई के दौरान न्यायालय को दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह हुआ. इसके बाद विस्तृत जांच के निर्देश दिए. जांच में जन्मतिथि और अन्य अभिलेखों में कथित गड़बड़ी सामने आने लगी, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ.
अदालत के आदेश पर दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में अधिवक्ता गौरव भारद्वाज ने जिला न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया था. सुनवाई के बाद अदालत ने 18 मार्च 2026 को कलेक्टर को जांच कराने के निर्देश दिए. कलेक्टर ने जांच की जिम्मेदारी एसडीएम को सौंपी. जांच रिपोर्ट में दस्तावेजों में कथित हेरफेर की पुष्टि होने के बाद जिला न्यायालय ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया.
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी मुकेश शाक्य ने बताया कि मामले को जांच में लिया है. सभी दस्तावेजों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं