- भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच न्यायिक जांच आयोग ने पूरी कर 600 से अधिक पन्नों की रिपोर्ट HC को सौंप दी.
- जांच में पानी की गुणवत्ता, प्रभावित लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड और प्रशासनिक निर्णयों की गहराई से पड़ताल की गई है.
- 36 मौतों और बीमारियों के कारणों का विश्लेषण कर रिपोर्ट में दूषित पानी से संबंध की संभावना पर प्रकाश डाला.
इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में अब सच सामने आने की उम्मीद और बढ़ गई है. 36 लोगों की मौत और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले की जांच पूरी हो चुकी है. न्यायिक जांच आयोग ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट को सौंप दी. 600 से अधिक पन्नों की इस रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम, पानी की गुणवत्ता, स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की गहराई से पड़ताल की है. अब सभी की नजर हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई पर है.
न्यायिक जांच आयोग ने पूरी की जांच
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड की जांच के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित न्यायिक जांच आयोग ने अपनी पड़ताल पूरी कर ली. आयोग ने लंबे समय तक मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की और अब अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दी. यह रिपोर्ट 600 से ज्यादा पन्नों की बताई जा रही है, जिसमें घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल किया है.
किन बिंदुओं पर हुई गहन पड़ताल
जांच आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने से पहले पूरे घटनाक्रम का विस्तृत अध्ययन किया. दूषित पानी की गुणवत्ता की जांच, प्रभावित लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड, अस्पतालों के दस्तावेज और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले गए. इसके अलावा अलग-अलग विभागों की भूमिका और उनकी जिम्मेदारियों को भी परखा गया, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही कहां और किस स्तर पर हुई.
36 मौतों और बीमारी के कारणों पर फोकस
इस मामले में 36 लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने के कारणों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में इन मौतों के पीछे की परिस्थितियों और संभावित वजहों का विश्लेषण किया है. यह रिपोर्ट इस बात पर भी रोशनी डाल सकती है कि मौतों और बीमारी के मामलों का दूषित पानी से कितना संबंध था.
जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
रिपोर्ट में केवल घटना के कारणों का ही नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने का भी प्रयास किया है. जांच के दौरान संबंधित विभागों और अधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन किया. माना जा रहा है कि रिपोर्ट में उन अधिकारियों और कर्मचारियों के बारे में भी उल्लेख किया है, जिनकी कार्यप्रणाली या लापरवाही जांच के दौरान सामने आई हो.
हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी नजरें
अब रिपोर्ट हाईकोर्ट के पास पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में इस रिपोर्ट पर सुनवाई होगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी. अदालत की टिप्पणी और आदेश यह स्पष्ट करेंगे कि मामले में किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी और जिम्मेदारी तय करने के लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे.
रिपोर्ट से बढ़ीं जवाबदेही तय होने की उम्मीदें
भागीरथपुरा कांड को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल उठे थे. मौतों के आंकड़ों से लेकर प्रशासनिक जिम्मेदारी तक कई मुद्दे चर्चा में रहे. ऐसे में 600 से अधिक पन्नों की यह जांच रिपोर्ट बेहद अहम मानी जा रही है. रिपोर्ट के सार्वजनिक होने और अदालत की सुनवाई के बाद यह साफ हो सकेगा कि इस पूरे मामले में चूक कहां हुई और आखिर किस पर गाज गिर सकती है.
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