Kukru Coffee Estate Betul: मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के सतपुड़ा अंचल में बसा कुकरू गांव इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है. वजह है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav Visit) का प्रस्तावित दौरा और उससे जुड़ी बड़ी उम्मीदें. कुकरू केवल एक गांव नहीं, बल्कि मध्य भारत की एक अनूठी प्राकृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है. यहां स्थित कॉफी बागान को मध्य भारत का इकलौता पारंपरिक कॉफी क्षेत्र माना जाता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने की थी. घने जंगलों, पहाड़ियों, बादलों से घिरी वादियों और दुर्लभ कॉफी उत्पादन के कारण कुकरू को ‘मिनी पचमढ़ी' भी कहा जाता है. अब स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री के दौरे से इस क्षेत्र को पर्यटन और कॉफी हब के रूप में नई पहचान मिलेगी.
कुकरू: जहां जंगल, बादल और कॉफी एक साथ बसते हैं
भैंसदेही तहसील में स्थित कुकरू समुद्र तल से लगभग 3668 फीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है. सतपुड़ा पर्वतमाला की गोद में बसे इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत इसका प्राकृतिक वातावरण है. चारों ओर घने जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियां, कोहरे से ढकी घाटियां और सालभर अपेक्षाकृत ठंडा मौसम इसे मध्यप्रदेश के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक स्थलों में शामिल करते हैं. मानसून और सर्दियों के दौरान यहां का नजारा किसी हिल स्टेशन जैसा दिखाई देता है. इसी कारण स्थानीय लोग और पर्यटक इसे बैतूल का ‘मिनी पचमढ़ी' कहते हैं.
Looking for an offbeat escape? Kukru might just be your perfect destination.
— Madhya Pradesh Tourism (@MPTourism) January 6, 2026
Tucked away in the Betul district, Kukru is a hidden gem waiting for you to be explored. From the rhythmic dance of the windmills to the lush green valleys, every frame here is nature's masterpiece.… pic.twitter.com/JknKUPDWJj
1944 में शुरू हुई थी कॉफी की कहानी
कुकरू की सबसे बड़ी पहचान यहां मौजूद कॉफी बागान हैं. वर्ष 1944 में ब्रिटिश महिला फ्लोरेंस हैंड्रिक्स ने यहां लगभग 44 हेक्टेयर (करीब 160 एकड़) क्षेत्र में कॉफी की खेती शुरू कराई थी. सतपुड़ा के इस इलाके की जलवायु और मिट्टी कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल पाई गई. कुछ ही वर्षों में यहां उच्च गुणवत्ता वाली कॉफी बीन्स का उत्पादन होने लगा और कुकरू की पहचान पूरे क्षेत्र में बनने लगी. विशेषज्ञों के अनुसार यह मध्य भारत का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कॉफी क्षेत्र माना जाता है.

Kukru Coffee Estate Betul: बैतूल का हिल स्टेशन
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आज भी मौजूद है अंग्रेजों के दौर का कॉफी बागान
आजादी के बाद यह बागान वन विभाग के अधीन आ गया. संरक्षण और निवेश की कमी के कारण धीरे-धीरे इसका विस्तार और उत्पादन दोनों प्रभावित हुए. एक समय यहां हर साल 80 से 100 क्विंटल तक कॉफी बीन्स का उत्पादन होता था, लेकिन अब यह घटकर 8 से 10 क्विंटल के आसपास रह गया है. इसके बावजूद यहां की अरेबिका कॉफी अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती है. विशेषज्ञों की जांच में इसकी गुणवत्ता निर्यात योग्य पाई गई है और कुछ विदेशी कंपनियों ने भी इसमें रुचि दिखाई है.

Kukru Coffee Estate Betul: रेस्ट हाउस
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GI टैग की दौड़ में शामिल कुकरू कॉफी
राज्य सरकार ने कुकरू कॉफी सहित 38 उत्पादों को GI टैग दिलाने के लिए आवेदन भेजा है. यदि कुकरू कॉफी को GI टैग मिलता है तो इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान मिलेगी. इससे स्थानीय किसानों, आदिवासी समुदायों और वन आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिल सकता है.
Situated in the lap of Satpura range, Kukru is a scenic village in Betul District known for the coffee plantation, windmills and jungle camping experiences. Plan a road trip to this offbeat destination to cherish the pristine beauty of nature away from urban chaos!#MPTourism pic.twitter.com/VDaNoaoshk
— Madhya Pradesh Tourism (@MPTourism) January 21, 2021
क्यों बन सकता है बड़ा पर्यटन केंद्र?
कुकरू सिर्फ कॉफी के लिए ही नहीं, बल्कि कई प्राकृतिक आकर्षणों के लिए भी जाना जाता है.
- सनराइज और सनसेट प्वाइंट : यहां सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य बेहद आकर्षक माना जाता है. बादलों के बीच से निकलती सूर्य की किरणें पर्यटकों को विशेष अनुभव देती हैं.
- घने वन और जैव विविधता : क्षेत्र में सागौन, मिश्रित वन और समृद्ध जैव विविधता मौजूद है. प्राकृतिक पर्यटन के लिए यह क्षेत्र काफी संभावनाएं रखता है.
- आदिवासी संस्कृति : यह इलाका कोरकू जनजाति की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी संजोए हुए है. यहां के लोकगीत, परंपराएं और जीवनशैली पर्यटकों को विशेष आकर्षित कर सकती हैं.

Kukru Coffee Estate Betul: प्राकृतिक नजारा
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स्थानीय स्वाद भी बन सकता है आकर्षण
कुकरू केवल प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित नहीं है. यहां कोदो-कुटकी, रबड़ी, मावा, स्थानीय व्यंजन और वन उत्पादों की समृद्ध परंपरा है. वन धन योजना के तहत इन उत्पादों की ब्रांडिंग की तैयारी की जा रही है. प्रशासन "कुकरू ब्रांड" विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बाजार मिल सके.
रोजगार और विकास की नई उम्मीद
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां कॉफी प्रोसेसिंग यूनिट, पर्यटन सुविधाएं, होम-स्टे, कैफेटेरिया और साहसिक पर्यटन गतिविधियां विकसित की जाएं तो हजारों युवाओं को रोजगार मिल सकता है. वर्तमान में कॉफी की फसल प्रोसेसिंग के लिए बाहर भेजनी पड़ती है. स्थानीय स्तर पर सुविधाएं विकसित होने से मूल्यवर्धन और आय दोनों बढ़ेंगे.

Kukru Coffee Estate Betul: इको टूरिज्म सेंटर
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पर्यटन सर्किट बनाने की तैयारी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल के अनुसार कुकरू को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है. प्रस्तावित पर्यटन सर्किट में कुकरू कॉफी क्षेत्र, मुक्तागिरी जैन तीर्थ और महाराष्ट्र का चिकलदरा हिल स्टेशन को जोड़ा जाएगा. इससे देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी.
कैसे पहुंचें कुकरू?
सड़क मार्ग
- बैतूल से दूरी: लगभग 90 किमी
- भैंसदेही से दूरी: लगभग 30 किमी
- मार्ग: बैतूल – भैंसदेही – घटांग – कुकरू
रेल मार्ग
निकटतम प्रमुख रेलवे स्टेशन बैतूल है, जो दिल्ली-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग पर स्थित है.
हवाई मार्ग
- नागपुर एयरपोर्ट
- भोपाल एयरपोर्ट
दोनों यहां पहुंचने के लिए प्रमुख विकल्प हैं.

Kukru Coffee Estate Betul: कॉफी का पौधा
मुख्यमंत्री दौरे से बढ़ीं उम्मीदें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे को लेकर स्थानीय लोगों, पर्यटन व्यवसायियों और आदिवासी समुदायों में उत्साह है. लोगों को उम्मीद है कि कुकरू कॉफी बागान के संरक्षण, GI टैग, प्रोसेसिंग यूनिट और पर्यटन विकास को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. यदि ऐसा होता है तो कुकरू सिर्फ बैतूल की पहचान नहीं रहेगा, बल्कि मध्यप्रदेश का नया कॉफी हब, ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन और आदिवासी सांस्कृतिक केंद्र बन सकता है.
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