Bastar Pandum 2026: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की जनजातीय पहचान, लोक संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव ‘बस्तर पंडुम' (Bastar Pandum) इस साल 10 जनवरी 2026 से पूरे उत्साह और गरिमा के साथ प्रारंभ होने जा रहा है. यह आयोजन बस्तर अंचल की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, रहन-सहन, लोककला, पारंपरिक खान-पान, वेशभूषा, गीत-संगीत और नृत्य परंपराओं को एक मंच पर प्रस्तुत करने का अनूठा प्रयास है. आज बस्तर पंडुम एक उत्सव भर नहीं, बल्कि बस्तर की पहचान, अस्मिता और गौरव का प्रतीक बन चुका है. देश-प्रदेश से आने वाले पर्यटक और संस्कृति प्रेमी इस उत्सव के माध्यम से बस्तर की आत्मा को करीब से जानने का अवसर प्राप्त करते हैं.
बस्तर पंडुम, जहाँ जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और लोक कलाएं, सांस्कृतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति बनते हैं।
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) January 6, 2026
आइए, उल्लास के इस महाकुंभ में शामिल होकर बस्तर की विरासत को वैश्विक पहचान दिलाएँ। pic.twitter.com/Z42fboaofq
क्या है बस्तर पंडुम? Bastar Pandum 2026
‘पंडुम' शब्द का अर्थ ही उत्सव होता है और वास्तव में यह आयोजन बस्तर की आत्मा, उसकी सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक जीवन का जीवंत प्रतिबिंब है. बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत के संरक्षण और संवर्धन का सशक्त माध्यम बन चुका है.
बस्तर पंडुम, जहाँ हर रंग एक कहानी कहता है और हर वेशभूषा परंपरा का जीवंत बोध कराती है।
— CMO Chhattisgarh (@ChhattisgarhCMO) January 5, 2026
यह केवल जनजीवन, खानपान और लोक-कलाओं को करीब से महसूस करने का अवसर ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति से आत्मिक रूप से जुड़ने का उत्सव है।
आइए, इस उल्लासपूर्ण महापर्व का हिस्सा बनें और बस्तर की समृद्ध… pic.twitter.com/nDs8qM18HM
ऐसा है इस बार का आयोजन
इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा. ग्राम पंचायत स्तर, विकासखंड एवं जिला स्तर, संभाग/राज्य स्तरीय समापन समारोह. इन चरणों के माध्यम से बस्तर संभाग के सुदूर अंचलों में निवासरत आदिवासी कलाकारों, शिल्पकारों, लोक गायकों और नृत्य दलों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा. बस्तर पंडुम में माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा सहित विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे. मांदर, ढोल, तिरिया, बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे वातावरण को उत्सवी रंग में रंग देगी.
बस्तर पंडुम बस्तर की समृद्ध परंपराओं, विशिष्ट वेशभूषा, पारंपरिक खानपान, जनजीवन और जीवंत लोक-कलाओं को नज़दीक से जानने-समझने का अनूठा अवसर प्रदान करता है। यह महोत्सव हमारी सांस्कृतिक जड़ों को संजोते हुए उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रभावी मंच है। pic.twitter.com/BQNZh7BS0O
— Chhattisgarh Culture Department (@CGCultureDeptt) January 4, 2026
विभिन्न स्तरों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों, समूहों और प्रतिभागियों को पुरस्कार राशि एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा. यह पहल कलाकारों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ लोक कलाओं को जीवित रखने में सहायक सिद्ध हो रही है. बस्तर पंडुम के माध्यम से आदिवासी जीवन शैली, परंपरा, कला और सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है. यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करता है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देता है.
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