विज्ञापन

बारिश बुलाने के लिए अनोखी परंपरा, बस्तर में देवी-देवताओं की कराई शादी, शामिल हुए दूल्हा और दुल्हन पक्ष

कम बारिश से फसल खराब हो रही थी तो बस्तर के आदिवासियों ने सदियों पुरानी परंपरा निभाई. यहां बारिश के देवता भीम और देवी भिमिन की भव्य शादी कराई गई.

बारिश बुलाने के लिए अनोखी परंपरा, बस्तर में देवी-देवताओं की कराई शादी, शामिल हुए दूल्हा और दुल्हन पक्ष
आदिवासी समुदाय ने बारिश के देवताओं की कराई शादी.
सभी फोटो- ANI
  • सूखा दूर करने के लिए बस्तर के आदिवासियों ने सदियों पुरानी परंपरा निभाई.
  • उन्होंने बारिश के देवताओं की शादी कराई, उन्हें है कि अब बारिश होगी.
  • लकड़ी काटने वालों ने महुआ काटकर मूर्ति बनाई. महिलाओं ने हल्दी, फूल, तेल का इंतजाम किया.

Bastar Adivasi Culture: छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासी अपनी सदियों पुरानी विरासत संजोए हुए हैं. मानसून की बारिश बुलाने के लिए उन्होंने एक भव्य और पारंपरिक शादी कराई. यह शादी किन्हीं दो व्यक्तियों के बीच नहीं, बल्कि पवित्र महुआ के पेड़ की लकड़ी से तराशे गए बारिश के प्राचीन देवता थे, जिन्हें दूल्हा-दुल्हन बनाया गया था. फिर उन्हें पवित्र बंधन में बांधा गया. तीन गांव के लोगों ने मिलकर यह आयोजन किया था.

मानसून में कम बारिश की वजह से खेती का नुकसान हो रहा है. बादलों को बुलाने के लिए टोकापाल समुदाय ने एक प्राचीन परंपरा का सहारा लिया., जिसके लिए उन्होंने बारिश के देवता भीम और देवी भिमिन की शादी कराई. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, ये देवता सीधे बारिश के देवता भगवान इंद्र से प्रार्थना करते हैं, जिससे भारी बारिश और अच्छी फसल सुनिश्चित होती है.

Latest and Breaking News on NDTV

समुदाय ने जुटाया चंदा

शादी की रस्म पूरी करने के लिए 10 हजार रुपये चंदे के रूप में आदिवासी समुदाय के लोगों से जुटाए गए, जो गांव की देवी के आध्यात्मिक मार्गदर्शन में हुआ. स्थानीय निवासी तरुण कुमार ठाकुर ने बताया कि उनका बेटा 'सिरहा' (आध्यात्मिक माध्यम) के तौर पर काम करता है, जिसके जरिए देवता रस्म के लिए निर्देश देते हैं. बस्तर की युवा पीढ़ी के लिए, इस कार्यक्रम में शामिल होना सांस्कृतिक संरक्षण और आस्था, दोनों ही मामलों में महत्वपूर्ण है.

Latest and Breaking News on NDTV

लोगों को बांटी गई जिम्मेदारी

इस रस्म को आम इंसानों की शादियों की तरह निभाई गई और जिम्मेदारियों को आदिवासी समुदायों के बीच बांटा गया था. लकड़ी काटने वालों ने महुआ के पेड़ से लकड़ी काटकर, उन्हें भीम और भिमिन के रूप में तराशा.

दूल्हा-दुल्हन के पक्ष में बंटा समुदाय

महिलाओं ने ताजा हल्दी, स्थानीय फूल और तेल का इंतजाम किया. एक सुंदर मंडप भी सजाया, जिसके नीचे विधिवत स्थापित किया गया. शादी के कपड़ों के साथ मुकुट भी पहनाया. देवताओं पर हल्दी का लेप भी लगाया. शादी के लिए बाकायदा पुजारी की भी व्यवस्था की गई, जिन्होंने मंत्र पढ़े. वहीं, समुदाय के लोगों ने खुद को अलग-अलग ग्रुप में बांट लिया, जिसमें एक दूल्हा पक्ष था और दूसरा दुल्हन पक्ष.

Latest and Breaking News on NDTV

दूर से लोग आए हिस्सा लेने

दूर-दूर से आए ग्रामीणों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम पूरा होने के बाद लोगों का कहना है कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अब बारिश होगी और फसलें लहलहाएंगी. शादी आयोजन समिति के सदस्य बालसिंह ठाकुर ने कहा कि हम देवता भीम और भीमसेन की शादी करवाई है. ताकि बारिश हो. इसके लिए शादी की हर एक रस्म निभाई गई थी.

कम बारिश होने पर निभाते हैं ये परंपरा

टोकापाल गांव के युवा यशपाल सिंह ठाकुर ने कहा कि आज यहां एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया है, जो हमारे गांव में भीम और भीमिन की शादी है. यह खास तौर पर देवताओं की शादी का जश्न है और बारिश बुलाने की एक रस्म या परंपरा है. अगर दो-तीन साल तक बारिश कम होती है तो हम उस दौरान ऐसी परंपराएं निभाते हैं. आज का कार्यक्रम इसी परंपरा के तहत आयोजित किया गया.

ये भी पढ़ें- MP विधानसभा में UCC बिल पेश: हलाला पर सजा, शादी, लिव-इन और तलाक पर क्या हैं कड़े प्रावधान

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Tribal Community, Bastar Tribal Culture, Rain God, Chhattisgarh News, Bastar Adivasis
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com