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लखनऊ की KGMU में मजारों को हटाने का मामला क्या है, जिस पर गरमा गई है सियासत

लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में मजारों और दरगाहों को हटाने का नोटिस दिया गया है. ये मामला अब गरमा गया है. क्या है पूरा मामला? समझते हैं.

लखनऊ की KGMU में मजारों को हटाने का मामला क्या है, जिस पर गरमा गई है सियासत
  • लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी ने आठ मजारों में से छह को ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया है
  • शाहमीना की मजार और हरमैन शाह की दरगाह को विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस नहीं दिया है
  • मजारों के व्यवस्थापक ने केजीएमयू के नोटिस को अवैध बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में मजारों का नोटिस देने का मामला गरमाता जा रहा है. जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने चिट्ठी लिखकर इन मजारों के ध्वस्तीरण के नोटस को गलत बताया है. वहीं केजीएमयू प्रशासन का दावा है कि जिन मजांरों का जिक्र मौलाना मदनी कर रहे हैं, उन्हें नोटिस ही नहीं दिया गया है.

8 में से 6 मजारों को नोटिस

दरअसल, लखनऊ के केजीएमयू के अंदर कुल आठ मजारें/दरगाहें हैं. इन आठ में से छह को केजीएमयू ने अवैध बताते हुए 15 दिन का नोटिस दिया है. केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि शाहमीना की मजार और हरमैन शाह की दरगाह को किसी तरह का नोटिस नहीं जारी किया गया है. इनके अलावा जो छह अन्य मजारें हैं, नोटिस उनके लिए है.

केजीएमयू प्रशासन के दावों को मजारों से जुड़े लोग खारिज करते दिखाई दे रहे हैं. शाहमीना की मजार के व्यवस्थापक नासिर मिनाई ने कहा कि मजारों को दिया नोटिस ही अवैध है. मजारों/दरगाहों के बाकायदा नजूल में दर्ज कागजात हैं. ऐसे में इन कागजों के आधार पर केजीएमयू के नोटिस को कोर्ट में चुनौती दी जाएगी.

केजीएमयू का क्या है कहना?

मजारों के व्यवस्थापक के दावे पर केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह ने कहा कि हम ससम्मान मजारों को हटाने के पक्ष में हैं. नोटिस की अवधि पूरी होने के बाद कागज लेकर मजार संचालक व्यक्तिगत तौर पर पेश हों. फिर मामला रजिस्ट्रार के यहां जाएगा. रजिस्ट्रार की जांच में मजारें अवैध निकलीं तो कब्र को आसपास की किसी कब्रिस्तान में शिफ्ट करके बाकी की इमारत तोड़ी जाएगी. 

कांग्रेस ने भी उठाए सवाल

इस मामले में कांग्रेस ने भी नोटिस पर सवाल खड़ा किया है. कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने कहा कि केजीएमयू सरकार के इशारे पर अशांति फैलाना चाहता है. इस तरह से जनता से जुड़े मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने की ये कोशिश है. उन्होंने कहा कि उन्होंने प्लेसेज ऑफ वरशिप एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि नियम है कि जो जहां जैसे है, उसके छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. 

15 दिन में मांगा जवाब

लखनऊ के केजीएमयू में 22 जनवरी को छह मजारों को नोटिस देकर 15 दिन में मजारों को ध्वस्त करने को कहा गया था. इस नोटिस में कहा गया है कि नोटिस अवधि पूरी होने के बाद अगर प्रशासन ने इसे हटाया तो हटाने का सारा खर्च मजार संचालकों से वसूला जाएगा. इस नोटिस को लेकर जमीयत के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने आपत्ति दर्ज कराई है. फिलहाल देखना होगा कि केजीएमयू मजार हटा पाता है या ये मामला कोर्ट में जाकर अटक जाएगा.

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