
नयी दिल्ली:
कई प्रतिष्ठित कलाकारों को अपने जीवन में महिलाओं से प्रेरणा मिली थी और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर भी इससे अछूते नहीं रहे थे.
लेखिका अरुणा चक्रवर्ती ने अपनी किताब ‘‘डाउटर ऑफ जोड़ासांको’’ में उन महिलाओं के जीवन पर प्रकाश डाला है जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी थीं.
‘‘जोड़ासांको’’ में टैगोर के परिवार के इतिहास पर प्रकाश डालने के बाद, चक्रवर्ती ने अपनी इस नई किताब में टैगोर के परिवार के सदस्यों और महिलाओं को लेकर टैगोर के दृष्टिकोण की चर्चा की है.
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘टैगोर का परिवार उस दौरान अधिक शिक्षित और उदार था. लेकिन वह महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर की छत्रछाया में महिलाओं को लकर अपने दृष्टिकोण में दूसरों से अलग नहीं था.’’ महर्षि द्वारा घर की महिलाओं को लेकर बनाये गये नियम का पालन करते हुये, रवीन्द्रनाथ ने अपनी बेटियों की शादी 10 और 13 वर्ष की उम्र में कर दी थी और उन्होंने 15 वर्षीय विधवा शहाना को पुनर्विवाह करने से भी रोक दिया था.
बाद के वर्षों में उन्होंने चीजों को ठीक करने की कोशिश की और अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से कराया. अपनी छोटी बेटी को उसके असंवेदनशील पति से अलग कराया और अपनी पोती को एक सिंधी व्यक्ति से शादी करने की अनुमति दी.
इस किताब में कवि में आध्यात्मिक रूप से आये परिवर्तन को बताया गया है. इसमें बताया गया है कि कैसे पितृसत्तात्मक नजरिया रखने वाले टैगोर महिलाओं की खराब स्थिति के लेकर बहुत संवेदनशील हो गये.
लेखिका अरुणा चक्रवर्ती ने अपनी किताब ‘‘डाउटर ऑफ जोड़ासांको’’ में उन महिलाओं के जीवन पर प्रकाश डाला है जो रवीन्द्रनाथ टैगोर के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी थीं.
‘‘जोड़ासांको’’ में टैगोर के परिवार के इतिहास पर प्रकाश डालने के बाद, चक्रवर्ती ने अपनी इस नई किताब में टैगोर के परिवार के सदस्यों और महिलाओं को लेकर टैगोर के दृष्टिकोण की चर्चा की है.
चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘टैगोर का परिवार उस दौरान अधिक शिक्षित और उदार था. लेकिन वह महर्षि देवेंद्रनाथ टैगोर की छत्रछाया में महिलाओं को लकर अपने दृष्टिकोण में दूसरों से अलग नहीं था.’’ महर्षि द्वारा घर की महिलाओं को लेकर बनाये गये नियम का पालन करते हुये, रवीन्द्रनाथ ने अपनी बेटियों की शादी 10 और 13 वर्ष की उम्र में कर दी थी और उन्होंने 15 वर्षीय विधवा शहाना को पुनर्विवाह करने से भी रोक दिया था.
बाद के वर्षों में उन्होंने चीजों को ठीक करने की कोशिश की और अपने इकलौते पुत्र का विवाह एक विधवा से कराया. अपनी छोटी बेटी को उसके असंवेदनशील पति से अलग कराया और अपनी पोती को एक सिंधी व्यक्ति से शादी करने की अनुमति दी.
इस किताब में कवि में आध्यात्मिक रूप से आये परिवर्तन को बताया गया है. इसमें बताया गया है कि कैसे पितृसत्तात्मक नजरिया रखने वाले टैगोर महिलाओं की खराब स्थिति के लेकर बहुत संवेदनशील हो गये.
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