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अरब सागर को रत्नाकर सागर क्यों कहा जाता था? जानिए इतिहास और महत्व

आज अरब सागर भारत के लिए सामरिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. इसका प्राचीन नाम हमें भारत की समुद्री विरासत और ग्लोबल बिजनेस में उसकी ऐतिहासिक भूमिका की याद दिलाता है.

अरब सागर को रत्नाकर सागर क्यों कहा जाता था? जानिए इतिहास और महत्व
हिंदू धार्मिक ग्रंथों और संस्कृत साहित्य में भी समुद्र को रत्नों का भंडार माना गया है.

कॉम्पिटिटिव एग्जाम में अक्सर एक सवाल पूछा जाता है. वो ये कि किस महासागर को भारत में रत्नाकर सागर के नाम से जानते हैं. इस सवाल का जवाब है अरब सागर. भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिम में फैला अरब सागर आज भले ही आधुनिक नाम से जाना जाता हो, लेकिन प्राचीन भारत में इसे एक बेहद खास नाम दिया गया था. इसे रत्नाकर सागर भी कहा जाता है. ये नाम अपने आप में उस समय की आर्थिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक समृद्धि की कहानी कहता है. आखिर अरब सागर को रत्नाकर सागर क्यों कहा गया? इसके पीछे का इतिहास क्या है?

रत्नों और संपदा का सागर

संस्कृत में रत्नाकर का अर्थ होता है, रत्नों की खान या रत्नों को धारण करने वाला. प्राचीन काल में अरब सागर को ये नाम इसलिए मिला क्योंकि इसके तटवर्ती क्षेत्र व्यापार, खनिज और कीमती वस्तुओं से भरपूर थे. भारत के पश्चिमी तट से होकर होने वाला समुद्री व्यापार अत्यंत समृद्ध था. मोती, मसाले, रत्न, हाथीदांत और कपड़े जैसे बहुमूल्य सामान इसी मार्ग से पश्चिम एशिया, अफ्रीका और यूरोप साम्राज्य तक पहुंचते थे.

प्राचीन व्यापार का प्रमुख मार्ग

सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य और गुप्त काल तक, अरब सागर भारत का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग रहा. गुजरात, कोंकण और मलाबार तट के बंदरगाहों से व्यापारी जहाज दूर-दूर तक जाते थे. मोतियों की खेती, विशेष रूप से अरब सागर के कुछ हिस्सों में, इस नाम को और भी सार्थक बनाती है. इसी कारण इसे रत्नों से भरा सागर यानी रत्नाकर कहा गया.

धार्मिक और साहित्यिक संदर्भ

हिंदू धार्मिक ग्रंथों और संस्कृत साहित्य में भी समुद्र को रत्नों का भंडार माना गया है. समुद्र मंथन की कथा में समुद्र से अनेक रत्न और अमृत निकलने का उल्लेख मिलता है. कई विद्वानों का मानना है कि अरब सागर को रत्नाकर सागर कहने की परंपरा इसी सांस्कृतिक सोच से जुड़ी हुई है.

नाम बदलने की कहानी

समय के साथ विदेशी यात्रियों और इस्लामी ज्योग्राफी एक्सपर्ट के प्रभाव से इसका नाम अरब सागर प्रचलित हो गया. ये नाम अरब देशों के साथ इसके ज्योग्रोफिकल और बिजनेस संबंधों को दर्शाता है. हालांकि रत्नाकर सागर नाम आज भी इतिहास और संस्कृत साहित्य में जीवित है.

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