Largest donation to the Ram Mandir: अयोध्या में बने भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दिया था. किसी ने कुछ रुपये का सहयोग किया तो किसी ने करोड़ों रुपये और सोना-चांदी अर्पित किए. लेकिन जब सबसे बड़े दान की बात आती है, तो यह नाम देश के बड़े उद्योगपतियों का नहीं, बल्कि प्रसिद्ध रामकथा वाचक मोरारी बापू का है.
राम मंदिर के सबसे बड़े नकद दानदाता कौन हैं?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, मोरारी बापू ने राम मंदिर निर्माण के लिए 11.3 करोड़ रुपये का दान दिया था. बाद में उनके विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं की ओर से जुटाई गई राशि भी ट्रस्ट को सौंपी गई, जिसके बाद कुल सहयोग 18.6 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसे राम मंदिर निर्माण के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान माना जाता है.
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18.6 करोड़ रुपये में कितने जीरो होते हैं?
अगर 18.6 करोड़ रुपये को अंकों में लिखा जाए, तो यह राशि होती है-
₹18,60,00,000
उद्योगपतियों ने भी दिया बड़ा योगदान
राम मंदिर निर्माण में कई उद्योगपतियों और कारोबारी परिवारों ने भी सहयोग किया था. जिनमें दिलीप कुमार वी. लाखी का स्वर्ण दान बहुत चर्चा में रहा था.
दिलीप कुमार लाखी ने दिया था इतना सोना
सूरत के हीरा कारोबारी दिलीप कुमार लाखी और उनके परिवार ने मंदिर के लिए 101 किलोग्राम सोना दान किया था. उस समय इसकी अनुमानित कीमत करीब 68 करोड़ रुपये बताई गई थी. इस सोने का उपयोग मंदिर के दरवाजों, गर्भगृह और अन्य सजावटी हिस्सों में किया गया.
केवल बड़े दानदाताओं से नहीं बना मंदिर
राम मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसके निर्माण में करोड़ों सामान्य श्रद्धालुओं ने भी अपनी क्षमता के अनुसार दान दिया. देश के गांवों, कस्बों और शहरों में चलाए गए निधि समर्पण अभियान के दौरान लाखों स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर लोगों से सहयोग जुटाया. इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे बड़े जनसहयोग (क्राउडफंडिंग) अभियानों में से एक माना जाता है.
मंदिर निर्माण पर कितना खर्च आया
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार, राम मंदिर परियोजना के लिए हजारों करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ. मंदिर और पूरे परिसर के निर्माण की अनुमानित लागत लगभग 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि दान की कुल राशि इससे कहीं अधिक रही. जिससे मंदिर परिसर के विस्तार और अन्य सुविधाओं का विकास कार्य हुआ.
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